विद्युत निगम में खाली प्लॉट पर कथित फर्जी तरीके से कॉमर्शियल कनेक्शन देने के मामले में जांच के आदेश दिए गए हैं। अधीक्षण अभियंता ने कमेटी को सभी जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर रिपोर्ट देने और कार्रवाई की तैयारी के निर्देश दिए हैं।
साहिबाबाद: विद्युत कनेक्शन फर्जीवाड़ा जांच मामला में इंदिरापुरम के कनावनी क्षेत्र में खाली प्लॉट पर कथित तौर पर फर्जी रिपोर्ट के आधार पर कॉमर्शियल बिजली कनेक्शन देने के आरोपों की जांच शुरू हो गई है। विद्युत निगम के अधीक्षण अभियंता अखिलेश सिंह ने कमेटी को आदेश दिए हैं कि तत्कालीन एक्सईएन, एसडीओ और जेई की भूमिका की जांच कर रिपोर्ट तैयार की जाए। जांच में दोषी पाए जाने पर अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
खाली प्लॉट में कॉमर्शियल कनेक्शन मामले की जांच के आदेश
विद्युत निगम में खाली प्लॉट पर कथित रूप से कॉमर्शियल कनेक्शन देने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। मामले के सामने आने के बाद मुख्यालय स्तर से संज्ञान लिया गया और स्थानीय अधिकारियों को जांच के आदेश जारी किए गए हैं। दैनिक जागरण में 23 अप्रैल को इस अनियमितता से जुड़ी रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद प्रशासन हरकत में आया।
अधीक्षण अभियंता अखिलेश सिंह ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जांच कमेटी इस बात की भी गहराई से पड़ताल करे कि किन परिस्थितियों में कॉमर्शियल कनेक्शन जारी किए गए थे और क्या उस समय वास्तविक व्यावसायिक गतिविधि मौजूद थी या फिर कागजों में ही इसे दर्शाकर प्रक्रिया पूरी कर दी गई थी।
अधिकारियों की भूमिका और दस्तावेजों की जांच
जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि संबंधित समय में कौन-कौन अधिकारी तैनात थे, जिनमें एक्सईएन, एसडीओ और जेई के नाम शामिल होंगे। इन सभी अधिकारियों की सूची तैयार कर उनकी भूमिका की विस्तृत समीक्षा की जाएगी।
अधिकारियों द्वारा यह भी जांचा जाएगा कि कनेक्शन जारी करने से पहले किस प्रकार की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी और क्या वह रिपोर्ट वास्तविक स्थिति पर आधारित थी या उसमें हेरफेर की गई थी। यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है, तो उसे गंभीरता से लिया जाएगा।
अवैध बिजली कारोबार और संभावित कार्रवाई
मामले में यह भी सामने आया है कि इंदिरापुरम के कनावनी क्षेत्र में बड़ी संख्या में झुग्गियों में अवैध रूप से बिजली बेचने का काम चल रहा था। लगभग 1500 से अधिक झुग्गियों में बिजली आपूर्ति को लेकर अनियमितताओं की बात सामने आई है, जिससे निगम को हर महीने भारी राजस्व नुकसान होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों को नोटिस जारी कर उनका स्पष्टीकरण लिया जाएगा। यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए मुख्यालय को रिपोर्ट भेजी जाएगी। विभाग ने साफ किया है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।








