बॉलीवुड के ‘सुल्तान’ सलमान खान के लिए आज का दिन कानूनी उलझनों से भरा रहने वाला है। ‘राजश्री पान मसाला’ के कथित भ्रामक विज्ञापन और अदालत की अवमानना के मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें आज यानी शुक्रवार को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है।
जयपुर: बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान आज जयपुर जिला उपभोक्ता आयोग के समक्ष पेश हो सकते हैं। मामला ‘राजश्री पान मसाला’ के कथित भ्रामक विज्ञापन और अदालत के आदेशों की अवमानना से जुड़ा है। आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए सलमान खान के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है और जयपुर पुलिस आयुक्त को इसे लागू करने का निर्देश दिया है।
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या अभिनेता आज व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होंगे या अपने वकीलों के जरिए कानूनी राहत हासिल करने की कोशिश करेंगे। यह मामला न केवल सलमान खान के लिए बल्कि सेलिब्रिटी विज्ञापनों और ब्रांड एंडोर्समेंट के लिए भी एक मिसाल बनता दिख रहा है।
क्या है पूरा मामला?
विवाद की शुरुआत सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र सिंह द्वारा दायर अवमानना याचिका से हुई। उनका आरोप है कि सलमान खान ‘केसर युक्त इलायची’ के नाम पर वास्तव में पान मसाला का प्रचार कर रहे हैं, जो उपभोक्ताओं को गुमराह करता है। 6 जनवरी को जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष ग्यारसीलाल मीणा ने इस विज्ञापन पर अंतरिम रोक लगाते हुए इसके प्रसारण और प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगा दिया था।
बावजूद इसके, राजस्थान के कई इलाकों में पोस्टर, होर्डिंग और डिजिटल प्रचार जारी रहा, जिसे अदालत ने अपने आदेशों की खुली अवमानना माना। आयोग का मानना है कि यह सिर्फ एक व्यावसायिक विवाद नहीं, बल्कि उपभोक्ता अधिकारों और न्यायिक आदेशों के सम्मान से जुड़ा गंभीर मामला है।
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अदालत का सख्त रुख
अवमानना को गंभीरता से लेते हुए आयोग ने:
- सलमान खान के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया
- जयपुर पुलिस आयुक्त को वारंट की तामील सुनिश्चित करने का आदेश दिया
- मामले की सुनवाई के लिए शुक्रवार की तारीख तय की
आयोग ने स्पष्ट किया है कि अगर अदालत के आदेशों का उल्लंघन हुआ है, तो संबंधित पक्ष को इसका जवाब देना ही होगा, चाहे वह कितना भी बड़ा सेलिब्रिटी क्यों न हो। यह पहली बार नहीं है जब सलमान खान पान मसाला विज्ञापन को लेकर कानूनी विवाद में फंसे हों। इससे पहले कोटा उपभोक्ता आयोग ने भी उन्हें तलब किया था, लेकिन तब राज्य उपभोक्ता आयोग से उन्हें अस्थायी राहत मिल गई थी।
हालांकि, जयपुर का मामला अलग है क्योंकि यहां मुद्दा सिर्फ विज्ञापन नहीं, बल्कि अदालत की अवमानना का है, जिसे कानूनी तौर पर ज्यादा गंभीर माना जाता है।








