Sandeepa Dhar ने कहा- लड़कियों को आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनने से रोकता है समाज

Sandeepa Dhar ने महिलाओं और लड़कियों की आत्मनिर्भरता पर बात की। एक्ट्रेस ने कहा कि समाज अक्सर लड़कियों को आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनने से रोकता है।

सूरज बड़जात्या की फिल्म ‘इसी लाइफ’ से बॉलीवुड डेब्यू करने वाली एक्ट्रेस संदीपा धर लगातार अपने प्रोजेक्ट्स के जरिए इंडस्ट्री में पहचान बना रही हैं। फिल्म ‘दो दीवाने शहर में’ में अपनी अदाकारी के लिए तारीफ पाने के बाद अब वह फैमिली ड्रामा सीरीज ‘चुंबक’ को लेकर चर्चा में हैं।

एंटरटेनमेंट न्यूज़: अभिनेत्री संदीपा धर इन दिनों अपनी नई फैमिली ड्रामा सीरीज ‘चुंबक’ को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म ‘इसी लाइफ में’ से अभिनय की दुनिया में कदम रखने वाली संदीपा ने अपने करियर में अलग-अलग तरह के किरदार निभाकर पहचान बनाई है। हाल ही में उन्होंने अपने करियर, निजी अनुभवों, महिलाओं पर सामाजिक दबाव और अभिनय के सफर को लेकर खुलकर बात की। संदीपा ने कहा कि समाज लंबे समय तक लड़कियों को अपने फैसले खुद लेने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित नहीं करता रहा है।

‘चुंबक’ के सेट पर बना खास गर्ल गैंग

संदीपा धर के लिए सीरीज ‘चुंबक’ का अनुभव बाकी प्रोजेक्ट्स से काफी अलग रहा। यह पहला मौका है जब वह किसी प्रोजेक्ट में कॉमेडी करती नजर आ रही हैं। मल्टी-स्टारर शो में कई कलाकारों के साथ काम करने को लेकर उन्होंने कहा कि सेट पर खूब मस्ती और इम्प्रोवाइजेशन हुआ। उन्होंने बताया कि शो में कई कपल्स की कहानी होने के कारण एक सीन में बड़ी संख्या में कलाकार साथ मौजूद रहते थे। इस दौरान सभी ने मिलकर कई दृश्यों को अपने अंदाज में बेहतर बनाने की कोशिश की। संदीपा के मुताबिक, उन्होंने किसी दूसरे सेट पर शायद ही इतनी हंसी-मजाक की हो।

सीरीज की कास्ट में सुमित राघवन, सुमित व्यास और नीना गुप्ता जैसे कलाकार शामिल हैं, जिनके साथ काम करना संदीपा के लिए खास अनुभव रहा। शूटिंग के दौरान नीना गुप्ता, अमायरा, मानसी, हेली और संदीपा की दोस्ती भी काफी मजबूत हुई। उन्होंने बताया कि सभी का एक अलग गर्ल गैंग बन गया है, जो शूटिंग के बाद भी एक-दूसरे के संपर्क में रहता है।

खूबसूरती के सामाजिक पैमानों पर संदीपा की राय

संदीपा की पिछली फिल्म ‘दो दीवाने शहर में’ में महिलाओं पर सुंदर दिखने के दबाव को कहानी का हिस्सा बनाया गया था। फिल्म में उनका किरदार पति की पसंद के मुताबिक खुद को सुंदर बनाए रखने और लगातार डाइटिंग करने के दबाव से गुजरता है। संदीपा का मानना है कि समाज में लोगों को हमेशा दूसरों से तुलना करने की आदत हो गई है। 

उनके अनुसार, कोई व्यक्ति कितना भी अच्छा दिखता हो, उसे अक्सर लगता है कि उसे और बेहतर दिखना चाहिए। अभिनेत्री ने कहा कि दूसरों की अपेक्षाओं के हिसाब से जिंदगी जीने के बजाय व्यक्ति को अपने लिए जीना और खुद को समझना सीखना चाहिए। उनका मानना है कि दूसरों को खुश करने की कोशिश में लोग कई बार अपनी खुशी और पहचान को पीछे छोड़ देते हैं।

‘लड़कियों को आत्मविश्वासी बनने नहीं दिया गया’

महिलाओं पर सामाजिक दबाव के सवाल पर संदीपा ने कहा कि लड़कियों को बचपन से ही बताया जाता रहा है कि उन्हें कैसे कपड़े पहनने चाहिए, कैसे व्यवहार करना चाहिए और किस तरह बात करनी चाहिए। उनके मुताबिक, यह दबाव सिर्फ अभिनेत्रियों तक सीमित नहीं है, बल्कि आम महिलाओं की जिंदगी का भी हिस्सा रहा है।

संदीपा ने कहा कि अब वह पहले की तरह हर बात चुपचाप स्वीकार नहीं करतीं और जरूरत पड़ने पर जवाब देना सीख गई हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि महिलाओं को अपने फैसलों और व्यक्तित्व पर भरोसा करना चाहिए। अभिनेत्री का कहना है कि महिलाओं के बढ़ते आत्मविश्वास और स्वतंत्रता को लेकर समाज में बदलाव दिखाई दे रहा है। उनके मुताबिक, इसी बदलाव के कारण फेमिनिज्म को लेकर बहस भी तेज हुई है और कुछ लोग महिलाओं की स्वतंत्रता को स्वीकार करने में असहज महसूस करते हैं।

पहली फिल्म को लेकर था डर

संदीपा धर ने अपने बॉलीवुड डेब्यू ‘इसी लाइफ में’ को याद करते हुए बताया कि उस समय उन्हें फिल्म इंडस्ट्री के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। वह MBA करने के बाद कॉरपोरेट क्षेत्र में जाने की योजना बना रही थीं, लेकिन अचानक उन्हें फिल्म का प्रस्ताव मिला। अभिनय का अनुभव नहीं होने के कारण उन्हें डर था कि दर्शक उनके काम की आलोचना करेंगे। 

हालांकि, फिल्म को अपेक्षित व्यावसायिक सफलता नहीं मिली, लेकिन संदीपा को अपने अभिनय के लिए प्यार और सराहना मिली। उन्हें विभिन्न पुरस्कारों के लिए नामांकन भी मिले। यही प्रतिक्रिया उनके लिए आगे अभिनय जारी रखने का आत्मविश्वास बनी।

ऑस्ट्रेलिया में सीखा अभिनय का हुनर

संदीपा ने बताया कि इसके बाद उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में करीब पांच साल एक म्यूजिकल शो के साथ काम किया। उन्हें स्कॉलरशिप के जरिए खुद को थिएटर और परफॉर्मिंग आर्ट्स में बेहतर करने का अवसर मिला। इस दौरान उन्होंने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में 200 से ज्यादा शो किए और करीब 15 से 20 देशों में परफॉर्म किया। उनके मुताबिक, इस अनुभव ने उन्हें अपने अभिनय और मंचीय कौशल को समझने तथा निखारने में काफी मदद की।

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