सांसदों के निलंबन पर प्रियंका गांधी का तीखा हमला, NDA सरकार पर संसद में बहस दबाने का आरोप

लोकसभा में विपक्षी सांसदों के निलंबन पर प्रियंका गांधी ने NDA सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने बहस दबाने, विपक्ष को बोलने से रोकने का आरोप लगाया।

लोकसभा से आठ विपक्षी सांसदों के निलंबन पर प्रियंका गांधी ने NDA सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार बहस से डरती है, विपक्ष को बोलने नहीं देती और संसद की गरिमा व लोकतंत्र को कमजोर कर रही है।

New Delhi: लोकसभा में विपक्ष के आठ सांसदों के निलंबन को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस मुद्दे पर एनडीए सरकार पर बड़ा और सीधा हमला बोला है। उन्होंने सवाल किया कि सरकार संसद में बहस से क्यों डरती है और विपक्ष को बोलने से बार-बार क्यों रोका जा रहा है। प्रियंका गांधी ने इसे केवल सांसदों के निलंबन का मामला नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संसद की गरिमा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया।

संसद में बढ़ता टकराव

बजट सत्र के दौरान संसद में लगातार हंगामे और टकराव की स्थिति बनी हुई है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार जानबूझकर चर्चा से बच रही है और असहमति की आवाज को दबाया जा रहा है। इसी कड़ी में लोकसभा से आठ विपक्षी सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया, जिसके बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया।

प्रियंका गांधी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि संसद के भीतर इस तरह की घटनाएं अब असामान्य नहीं रहीं। उनके मुताबिक, हर सत्र में विपक्ष को किसी न किसी बहाने से बोलने से रोका जाता है।

“अब तो यह आम बात हो गई है”

प्रियंका गांधी ने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि आप हर सत्र में यही देखते हैं और अब तो सरकार इसे और भी ज्यादा कर रही है। उनके मुताबिक, यह सिर्फ विपक्ष के नेता को बोलने से रोकने का मामला नहीं है, बल्कि यह संसद के कामकाज और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा हमला है।

उन्होंने कहा कि संसद लोकतंत्र का मंदिर है। अगर कोई सांसद अपने विचार रखना चाहता है, तो इसमें समस्या क्या है। सरकार बहस से क्यों डरती है और उसे किस बात का डर है कि चर्चा का नतीजा क्या निकल सकता है।

Suspension को बताया लोकतंत्र का मूल मुद्दा

प्रियंका गांधी ने सांसदों के निलंबन को लोकतंत्र का मूलभूत मुद्दा करार दिया। उन्होंने कहा कि असहमति और सवाल पूछना लोकतंत्र की आत्मा है, लेकिन मौजूदा सरकार संसद को केवल औपचारिक प्रक्रिया तक सीमित रखना चाहती है।

उनका कहना था कि जब विपक्ष सवाल उठाता है, तो सरकार नियमों का हवाला देकर आवाज दबाने की कोशिश करती है। इससे संसद की भूमिका कमजोर होती है और जनता के मुद्दे हाशिये पर चले जाते हैं।

विपक्ष के नेता को जानबूझकर रोका जा रहा है

प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता को जानबूझकर बोलने नहीं दिया जा रहा। उन्होंने कहा कि यह कोई संयोग नहीं है, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति है।

उनके अनुसार, सरकार उन सवालों से बचना चाहती है, जिनका जवाब देना मुश्किल हो सकता है। इसलिए बहस से पहले ही शोर, निलंबन और नियमों का सहारा लिया जाता है।

पूर्व सेना प्रमुख की किताब का जिक्र

इस दौरान प्रियंका गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की किताब का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि इस किताब को प्रकाशित नहीं होने दिया गया, क्योंकि उसमें सरकार द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के तरीकों पर आलोचनात्मक बातें थीं।

प्रियंका गांधी ने कहा कि जहां तक उनकी जानकारी है, इस किताब में संकट के समय प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, रक्षा मंत्री और शीर्ष नेतृत्व की प्रतिक्रिया का उल्लेख है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ऐसी किसी भी बात को सामने आने नहीं देना चाहती, जिससे उसकी कार्यशैली पर सवाल खड़े हों।

राष्ट्रीय सुरक्षा पर सरकार की भूमिका पर सवाल

प्रियंका गांधी ने कहा कि जब देश पर संकट होता है और सीमा पर चीनी सैनिक गतिविधियां बढ़ाते हैं, तब सरकार की प्रतिक्रिया कैसी रही, यह जानना जनता का अधिकार है।

उन्होंने कहा कि अगर किसी किताब या दस्तावेज में ऐसे सवाल उठाए जाते हैं, तो उसे दबाने की कोशिश सरकार के चरित्र को उजागर करती है। उनके मुताबिक, यह दिखाता है कि सरकार पारदर्शिता से डरती है।

Epstein Files का मुद्दा भी उठाया

प्रियंका गांधी ने हाल ही में सामने आई Epstein Files का भी जिक्र किया और सरकार के आचरण पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसे संवेदनशील मुद्दे सामने आते हैं, तब भी सरकार की चुप्पी और रवैया सवालों के घेरे में आता है। उनका कहना था कि सरकार हर उस विषय से बचती है, जो असहज सवाल पैदा कर सकता है।

NDA सरकार पर बहस दबाने का आरोप

प्रियंका गांधी ने एनडीए सरकार पर संसद में असहमति और बहस को दबाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र सिर्फ चुनाव जीतने से नहीं चलता, बल्कि संसद में खुली और निष्पक्ष चर्चा से मजबूत होता है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर सरकार के पास जवाब हैं, तो उसे बहस से डरने की जरूरत नहीं होनी चाहिए।

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