भारतीय महिला हॉकी टीम की अनुभवी गोलकीपर सविता पूनिया चाहती हैं कि अगर कभी उनकी जिंदगी पर बायोपिक बनती है, तो उसमें अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा उनका किरदार निभाएं। सविता का मानना है कि प्रियंका इस भूमिका को बखूबी निभा सकती हैं।
एंटरटेनमेंट न्यूज़: भारतीय महिला हॉकी टीम की अनुभवी गोलकीपर सविता पूनिया ने अपनी जिंदगी पर फिल्म बनने की संभावना को लेकर दिलचस्प बात कही है। अगर कभी उनकी जिंदगी पर बायोपिक बनाई जाती है, तो वह चाहेंगी कि बॉलीवुड अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा उनका किरदार निभाएं। सविता के मुताबिक, प्रियंका का अभिनय और उनका व्यक्तिगत सफर उन्हें प्रेरित करता है। उन्होंने यह बात समाचार एजेंसी पीटीआई-भाषा को दिए एक इंटरव्यू में कही।
सविता ने अपने खेल करियर, बचपन के संघर्ष और महिला खिलाड़ियों को पेश आने वाली चुनौतियों पर भी विचार साझा किए। उनकी कहानी खेल के प्रति समर्पण, पारिवारिक जिम्मेदारियों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने के लंबे सफर को दर्शाती है।
प्रियंका चोपड़ा क्यों हैं सविता पूनिया की पहली पसंद?
सविता पूनिया ने बताया कि उन्होंने पहले कभी गंभीरता से नहीं सोचा था कि उनकी जिंदगी पर फिल्म बन सकती है। हालांकि, अगर ऐसा होता है, तो वह प्रियंका चोपड़ा को अपने किरदार में देखना पसंद करेंगी। उनका मानना है कि अभिनेत्री इस भूमिका को अच्छी तरह निभा सकती हैं। प्रियंका चोपड़ा इससे पहले फिल्म मैरी कॉम में भारतीय मुक्केबाज एमसी मैरी कॉम का किरदार निभा चुकी हैं।
यह फिल्म एक खिलाड़ी के संघर्ष, मेहनत और उपलब्धियों को बड़े पर्दे पर पेश करने के लिए जानी जाती है। ऐसे में सविता की पसंद के पीछे प्रियंका का खेल आधारित फिल्म में काम करने का अनुभव भी एक वजह हो सकता है। हालांकि, फिलहाल सविता पूनिया की बायोपिक बनने या प्रियंका चोपड़ा के इसमें काम करने को लेकर किसी आधिकारिक फिल्म परियोजना की जानकारी नहीं है। यह सविता की व्यक्तिगत पसंद है, जिसे उन्होंने इंटरव्यू के दौरान जाहिर किया।
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बचपन से उठाईं जिम्मेदारियां, आसान नहीं रहा सफर
सविता की जिंदगी में बचपन से ही जिम्मेदारियां रही हैं। उन्होंने बताया कि उनकी मां की तबीयत ठीक नहीं रहने के कारण उन्हें पांचवीं कक्षा से ही घर के कामकाज और जिम्मेदारियों में हाथ बंटाना पड़ा। पढ़ाई के साथ इन जिम्मेदारियों को निभाना उनके लिए जीवन का अहम अनुभव रहा। सविता ने यह भी बताया कि उन्हें सजने-संवरने की तुलना में किताबें पढ़ना और संगीत सुनना ज्यादा पसंद था। उनका व्यक्तित्व खेल के मैदान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पढ़ने और शांत माहौल में समय बिताने में भी उनकी रुचि रही है।
उन्होंने अपनी दिनचर्या के बारे में बताते हुए कहा कि वह सुबह की शुरुआत हनुमान चालीसा पढ़कर करती हैं। फिल्मों में उनकी दिलचस्पी भी बहुत अधिक नहीं रही है। सविता के अनुसार, उन्होंने अब तक केवल आठ से नौ फिल्में देखी हैं और आखिरी बार दीपिका पादुकोण की फिल्म छपाक देखी थी।
महिला खिलाड़ियों की चुनौतियों पर खुलकर बोलीं सविता
दो दशक से अधिक समय से हॉकी खेल रहीं सविता पूनिया का मानना है कि महिला खिलाड़ियों को खेल के दौरान कुछ ऐसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिन पर पहले खुलकर चर्चा नहीं होती थी। इनमें मासिक धर्म के दौरान अभ्यास और मैच खेलना भी शामिल है। उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों की शारीरिक जरूरतों को समझना और उनके अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है। मासिक धर्म के दौरान हर खिलाड़ी का अनुभव अलग हो सकता है, इसलिए प्रशिक्षण, पोषण और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखकर व्यवस्था करना महत्वपूर्ण है।
सविता के मुताबिक, नए कोचिंग स्टाफ के आने के बाद इन विषयों पर बातचीत करना पहले की तुलना में आसान हुआ है। खिलाड़ियों की जरूरतों के अनुरूप डाइट और व्यायाम पर भी ध्यान दिया जा रहा है। उनके विचार में, महिला खिलाड़ियों को अपनी परेशानियां बिना झिझक साझा करने का अवसर मिलना चाहिए, ताकि उनके स्वास्थ्य और प्रदर्शन दोनों का बेहतर ख्याल रखा जा सके।









