एकता कपूर के ‘हिंदूफोबिया’ से जुड़े बयान पर अभिनेत्री पूनम पांडे ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। पूनम ने कहा कि जब वह मंदिर जाती हैं, तो कुछ लोग उनके कपड़ों और उनकी छवि को देखकर हैरानी जताते हैं।
एंटरटेनमेंट न्यूज़: अभिनेत्री पूनम पांडे ने निर्माता एकता कपूर के ‘हिंदूफोबिया’ से जुड़े बयान और देश में हो रहे प्रदर्शनों पर अपनी राय रखी है। पूनम ने कहा कि किसी व्यक्ति के पहनावे या पेशे के आधार पर उसके धार्मिक विश्वासों को लेकर सवाल नहीं उठाए जाने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर जाना किसी की व्यक्तिगत आस्था का विषय है और इसे उसके काम या सार्वजनिक छवि से जोड़कर नहीं देखना चाहिए।
इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग करने वाले प्रदर्शनकारियों की आलोचना करते हुए कहा कि किसी भी मुद्दे पर विरोध करने से पहले उसके तथ्यों और गंभीरता को समझना जरूरी है।
‘क्या मैं मंदिर नहीं जा सकती?’ पूनम पांडे ने उठाया सवाल
एकता कपूर के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पूनम पांडे ने अपने धार्मिक विश्वासों और मंदिर जाने के अनुभवों के बारे में बात की। उनके मुताबिक, जब वह मंदिर जाती हैं, तो कुछ लोग उनके कपड़ों और सार्वजनिक छवि को देखकर हैरानी जताते हैं। उन्हें इस बात पर सवालों का सामना करना पड़ता है कि उनकी तरह की जीवनशैली वाली अभिनेत्री मंदिर क्यों जाती है।
पूनम ने इस सोच पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी के कपड़ों या पेशे से उसकी आस्था का आकलन नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने अपने बयान में कहा कि वह हिंदू धर्म में विश्वास रखती हैं और उन्हें हनुमान चालीसा भी आती है। अभिनेत्री ने यह संदेश देने की कोशिश की कि किसी व्यक्ति की धार्मिक पहचान और उसका पेशेवर जीवन अलग-अलग पहलू हैं। उनके अनुसार, किसी के काम को उसके धर्म से जोड़कर उसकी आस्था पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
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एकता कपूर ने क्या कहा था?
निर्माता एकता कपूर ने एक पॉडकास्ट में अपने धार्मिक अनुभव साझा किए थे। उन्होंने बताया था कि तिलक लगाने या गले में धार्मिक धागा पहनने पर कुछ लोग उन्हें अजीब नजरों से देखते थे। उनके मुताबिक, धार्मिक प्रतीकों को अपनाने के कारण उन्हें कभी-कभी असहज टिप्पणियों का सामना भी करना पड़ा।एकता ने भारतीय पौराणिक कथाओं और धार्मिक पहचान को लेकर समाज में मौजूद धारणाओं पर सवाल उठाए थे।
इसी संदर्भ में उनके बयान को ‘हिंदूफोबिया’ से जुड़ी बहस के तौर पर देखा गया। पूनम पांडे ने भी इस चर्चा में अपनी बात रखते हुए धार्मिक आस्था को व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जोड़कर देखा।
प्रदर्शनों और प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग पर क्या बोलीं पूनम?
पूनम पांडे ने देश में चल रहे प्रदर्शनों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि किसी भी विरोध प्रदर्शन के पीछे स्पष्ट कारण और ठोस मांग होनी चाहिए। उनके अनुसार, बिना पूरी जानकारी के किसी बड़े राजनीतिक पदाधिकारी के इस्तीफे की मांग करना उचित नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग को लेकर अपनी प्रतिक्रिया में पूनम ने कहा कि प्रधानमंत्री का पद देश की महत्वपूर्ण संवैधानिक जिम्मेदारियों से जुड़ा है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर किसी भी मुद्दे पर सीधे प्रधानमंत्री से इस्तीफा मांगना किस तरह उचित ठहराया जा सकता है।
उनकी टिप्पणी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से जुड़े प्रदर्शनों के संदर्भ में भी सामने आई। पूनम का कहना था कि किसी मुद्दे पर विरोध जताने से पहले लोगों को यह समझना चाहिए कि वे किस बात का विरोध कर रहे हैं और उनकी मांग का आधार क्या है। हालांकि, विरोध प्रदर्शन और इस्तीफे की मांग लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हो सकते हैं। पूनम की टिप्पणी उनके व्यक्तिगत विचारों को दर्शाती है, जबकि किसी भी मांग की वैधता और उसके औचित्य का आकलन संबंधित तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर किया जाना चाहिए।
छात्रों और पुलिसकर्मियों की सुरक्षा पर भी जताई चिंता
प्रदर्शनों के दौरान छात्रों और पुलिसकर्मियों के घायल होने की खबरों पर पूनम ने चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलन में शामिल लोगों के साथ-साथ कानून-व्यवस्था संभालने वाले कर्मियों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है। अभिनेत्री के मुताबिक, समाज में बढ़ती नफरत और एक-दूसरे के प्रति असहिष्णुता चिंता का विषय है। उन्होंने इंसानियत और आपसी सम्मान बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। उनका मानना है कि विरोध या असहमति जताते समय भी लोगों को दूसरों की सुरक्षा और सम्मान का ध्यान रखना चाहिए।











