भारतीय टेक्नोलॉजी और ऑटोमोटिव सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में एक युग का अंत हो गया है। डॉ. एस. बी. (रवि) पंडित का 8 मई 2026 को पुणे में निधन हो गया। एक चार्टर्ड अकाउंटेंट से ग्लोबल टेक्नोलॉजी लीडर बनने तक उनका सफर भारत के स्टार्टअप और टेक इतिहास की सबसे प्रेरणादायक कहानियों में से एक माना जाता है।
बिजनेस न्यूज़: S.B. (Ravi) Pandit का 8 मई 2026 की सुबह Pune में निधन हो गया, जिससे भारतीय ऑटोमोटिव और मोबिलिटी सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग क्षेत्र में एक युग का अंत माना जा रहा है। KPIT Technologies के को-फाउंडर और चेयरमैन रहे पंडित ने अपने करियर की शुरुआत एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में की थी, लेकिन अपनी दूरदृष्टि और तकनीकी समझ के दम पर उन्होंने एक छोटे स्टार्टअप को वैश्विक स्तर की टेक्नोलॉजी कंपनी में बदल दिया।
उनके नेतृत्व में KPIT ने ऑटोमोटिव सॉफ्टवेयर, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ऑटोनॉमस ड्राइविंग और क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बड़ी पहचान बनाई, जिसका उपयोग आज दुनिया भर की लाखों गाड़ियों में किया जा रहा है। उनका सफर इस बात का उदाहरण माना जाता है कि कैसे विज़न, मेहनत और नवाचार के दम पर एक साधारण शुरुआत को वैश्विक सफलता में बदला जा सकता है।
साधारण शुरुआत से वैश्विक पहचान तक का सफर
पुणे के एक साधारण मराठी परिवार में जन्मे रवि पंडित की शुरुआती शिक्षा एक मराठी मीडियम स्कूल में हुई। उन्होंने कॉमर्स में मास्टर्स किया और आगे चलकर चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) बने। 1976 में उन्होंने अपने पिता की फर्म ‘किर्तने एंड पंडित’ से अपने करियर की शुरुआत की। बाद में उनकी महत्वाकांक्षा उन्हें अमेरिका ले गई, जहां उन्होंने प्रतिष्ठित MIT Sloan School of Management से मैनेजमेंट की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कंपनी ग्रांट थॉर्नटन से जुड़कर वैश्विक बिजनेस अनुभव हासिल किया।
KPIT की नींव: एक छोटे कमरे से शुरू हुआ सपना
1990 में रवि पंडित ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर पुणे में KPIT Technologies की नींव रखी। शुरुआत एक छोटे से कमरे से हुई थी, जहां सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ा विजन तैयार किया गया। कंपनी ने शुरुआती दौर में अपने पुराने नेटवर्क के भरोसे ग्राहक जुटाए और धीरे-धीरे ऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की इंजीनियरिंग समस्याओं पर फोकस करना शुरू किया।
रवि पंडित की दूरदृष्टि ने KPIT को पारंपरिक IT कंपनी से आगे बढ़ाकर एक स्पेशलाइज्ड ऑटोमोटिव सॉफ्टवेयर कंपनी बना दिया। आज KPIT का सॉफ्टवेयर दुनिया की लाखों कारों में इस्तेमाल हो रहा है, जिनमें इलेक्ट्रिक और ऑटोनॉमस व्हीकल्स शामिल हैं। BMW, Mercedes-Benz, Honda और Ford जैसी ग्लोबल कंपनियां इसके क्लाइंट्स में शामिल हैं। कंपनी 15 से अधिक देशों में काम कर रही है और हजारों इंजीनियर इसे नई तकनीक के केंद्र के रूप में विकसित कर रहे हैं।

बड़े बदलाव और रणनीतिक विकास
2002 में कंपनी ने कमिंस इन्फोटेक के साथ रणनीतिक विलय किया, जिससे इसका नाम KPIT Cummins Infosystems हो गया। इससे कंपनी को ग्लोबल स्केल पर पहचान मिली और ऑटोमोटिव इंजीनियरिंग में इसकी पकड़ मजबूत हुई। 2018-19 के बाद कंपनी ने बड़ा बदलाव करते हुए खुद को सॉफ्टवेयर-डिफाइंड व्हीकल्स (SDV) और क्लीन मोबिलिटी पर केंद्रित कर लिया।
रवि पंडित सिर्फ एक बिजनेस लीडर नहीं थे, बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय विकास में भी सक्रिय रहे। वे ग्रीन हाइड्रोजन मिशन से जुड़े प्रमुख निजी क्षेत्र के सदस्यों में से एक थे। उन्होंने पुणे में कई पर्यावरणीय और शहरी विकास परियोजनाओं को भी समर्थन दिया। उन्होंने वैज्ञानिक आर.ए. माशेलकर के साथ “Leapfrogging to Pole-Vaulting” नामक किताब भी लिखी, जिसे काफी सराहना मिली।
कंपनी का वित्तीय विकास
KPIT टेक्नोलॉजीज का मार्केट कैप आज लगभग 20,000 करोड़ रुपये से अधिक है। कंपनी ने हाल के वर्षों में राजस्व में लगातार वृद्धि दर्ज की है, हालांकि मुनाफे में कुछ उतार-चढ़ाव देखने को मिले। इसके बावजूद कंपनी का फोकस लगातार भविष्य की तकनीकों जैसे इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, AI आधारित ऑटोमोटिव सिस्टम और स्मार्ट मोबिलिटी पर बना हुआ है।
रवि पंडित का सबसे बड़ा योगदान यह माना जाता है कि उन्होंने भारत को ऑटोमोटिव सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग के वैश्विक मानचित्र पर स्थापित किया। उनकी सोच ने यह साबित किया कि एक CA भी टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में विश्वस्तरीय कंपनी खड़ी कर सकता है।










