केरल विधानसभा चुनाव से पहले सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक विवाद का कारण बन गया है। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं।
कोट्टायम: केरल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले प्रसिद्ध हिंदू तीर्थस्थल Sabarimala Temple को लेकर एक बार फिर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। महिलाओं के प्रवेश से जुड़े मुद्दे पर राज्य की सत्तारूढ़ सरकार और विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है, जिससे यह मामला चुनावी राजनीति का अहम विषय बनता जा रहा है।
इस विवाद की जड़ में वर्ष 2018 का वह ऐतिहासिक फैसला है, जिसमें Supreme Court of India ने सभी आयु वर्ग की महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी थी। इस फैसले के बाद से ही यह मुद्दा धार्मिक आस्था, परंपरा और संवैधानिक अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर राष्ट्रीय बहस का विषय बना हुआ है।
मंत्री ने भाजपा को ठहराया जिम्मेदार
केरल सरकार के देवस्वम मंत्री V. N. Vasavan ने कहा कि 2018 में आया सुप्रीम कोर्ट का फैसला भाजपा से जुड़े वकीलों की याचिका के आधार पर आया था, इसलिए उस निर्णय के लिए भारतीय जनता पार्टी को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का वर्तमान रुख वही है जो 2007 में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दाखिल किए गए हलफनामे में था।
उस समय सरकार ने कहा था कि इस मुद्दे का फैसला धार्मिक परंपराओं और अनुष्ठानों के विशेषज्ञों की राय के आधार पर होना चाहिए। मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करती है और अदालत के समक्ष अपना पक्ष स्पष्ट करने के लिए नया हलफनामा दाखिल करेगी।
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चुनाव से पहले तेज हुई राजनीतिक बयानबाजी
सबरीमाला मुद्दा केरल की राजनीति में लंबे समय से संवेदनशील विषय रहा है, और चुनाव के करीब आते ही यह फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि सत्तारूढ़ गठबंधन अपने पुराने रुख से पीछे हट रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि वह हमेशा से एक ही नीति पर कायम है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता M. A. Baby ने कहा कि 2018 में राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन किया था और वह सरकार का व्यक्तिगत निर्णय नहीं था।
उन्होंने कहा कि उस समय किसी भी राजनीतिक दल ने अदालत के फैसले का खुलकर विरोध नहीं किया था, लेकिन बाद में कुछ दलों ने राजनीतिक कारणों से अपना रुख बदल लिया।
भाजपा ने सरकार से मांगी माफी
वहीं, भाजपा के राज्य महासचिव M. T. Ramesh ने आरोप लगाया कि केरल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल नए हलफनामे के जरिए अपनी गलती स्वीकार की है। उन्होंने कहा कि सरकार को अयप्पा भक्तों से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि 2018 में राज्य सरकार ने महिलाओं के प्रवेश का समर्थन किया था, तो अब उसका रुख क्यों बदल रहा है। भाजपा का कहना है कि सरकार चुनाव के कारण अपनी स्थिति बदल रही है।
सबरीमाला मामले में सुप्रीम कोर्ट की बड़ी पीठ इस मुद्दे की फिर से समीक्षा कर रही है। अदालत यह तय करेगी कि धार्मिक परंपराओं, समानता के अधिकार और संवैधानिक मूल्यों के बीच संतुलन किस तरह बनाया जाए। यह मामला केवल केरल तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत में धर्म और कानून के संबंधों पर चल रही व्यापक बहस का हिस्सा बन चुका है।









