भारतीय सेना को चेन्नई और गया की ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमियों से 595 नए अधिकारी मिले हैं। इनमें 64 महिलाएं शामिल हैं। लखनऊ के शारदेंदु तिवारी ने अमेजन की ₹46 लाख की नौकरी छोड़ी और सात असफलताओं के बाद आठवीं कोशिश में सफल हुए।
चेन्नई: भारतीय सेना को शनिवार को चेन्नई और बिहार के गया स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA) से 595 नए अधिकारी मिले। दोनों अकादमियों में आयोजित पासिंग आउट परेड के बाद कैडेटों को सेना में अधिकारी के रूप में कमीशन मिला। इनमें कुल 64 महिला अधिकारी शामिल हैं। इन नए अधिकारियों में ऐसे युवा भी हैं, जिन्होंने आकर्षक निजी नौकरियां छोड़कर सैन्य सेवा को अपना करियर चुना। इनमें लखनऊ के 27 वर्षीय शारदेंदु तिवारी और केरल के कालीकट की आथिरा सुरेश की कहानी खास है। शारदेंदु ने अमेजन की ₹46 लाख सालाना पैकेज वाली नौकरी छोड़कर सेना में जाने का फैसला किया, जबकि आथिरा ने इंजीनियरिंग के बाद एक्सॉनमोबिल की नौकरी छोड़ी। दोनों ने अलग-अलग रास्तों से सैन्य सेवा का लक्ष्य हासिल किया।
चेन्नई और गया से 595 नए अधिकारी
भारतीय सेना को चेन्नई और गया की ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमियों से कुल 595 नए अधिकारी मिले। चेन्नई में 342 भारतीय कैडेटों ने सैन्य प्रशिक्षण पूरा किया और अधिकारी के रूप में कमीशन हासिल किया। इनमें 29 महिला कैडेट शामिल हैं।
चेन्नई अकादमी में मित्र देशों के 17 कैडेटों ने भी अपना प्रशिक्षण पूरा किया। इनमें 10 महिला कैडेट शामिल हैं। इस तरह चेन्नई की पासिंग आउट परेड में भारतीय और मित्र देशों के कैडेटों ने सैन्य प्रशिक्षण पूरा करने के बाद नई जिम्मेदारी संभाली।
वहीं, गया स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी में 29वीं पासिंग आउट परेड आयोजित हुई। यहां कुल 253 कैडेट भारतीय सेना में अधिकारी बने। इनमें 218 पुरुष और 35 महिला कैडेट शामिल हैं।
दोनों अकादमियों की परेड में प्रशिक्षण पूरा करने वाले कैडेटों ने सैन्य सेवा के लिए अपनी प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया। इन नए अधिकारियों के लिए यह प्रशिक्षण पूरा करना सैन्य करियर की औपचारिक शुरुआत है।
अमेजन की ₹46 लाख की नौकरी छोड़कर सेना चुनी
लखनऊ के नीलमथा निवासी 27 वर्षीय शारदेंदु तिवारी ने निजी क्षेत्र में एक आकर्षक करियर छोड़कर भारतीय सेना को चुना। शारदेंदु अमेजन में ₹46 लाख के पैकेज पर काम कर रहे थे। इसके बावजूद उन्होंने सैन्य सेवा को अपना लक्ष्य बनाया।
शारदेंदु की यात्रा इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि उन्हें सेना में अधिकारी बनने के लिए कई बार असफलता का सामना करना पड़ा। वह सात बार प्रयास में सफल नहीं हो सके, लेकिन उन्होंने तैयारी और कोशिश जारी रखी। आठवें प्रयास में उन्होंने सफलता हासिल की।
अब उन्होंने गया स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी से प्रशिक्षण पूरा कर लिया है और भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में कमीशन हासिल किया है।
उनकी कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा का उदाहरण है जो निजी क्षेत्र में अच्छे करियर विकल्प उपलब्ध होने के बावजूद देश की सैन्य सेवा को अपना पेशेवर लक्ष्य बनाना चाहते हैं।
सैन्य परिवार से मिली प्रेरणा
शारदेंदु के सेना में जाने के फैसले के पीछे पारिवारिक पृष्ठभूमि की भी भूमिका रही। उनके पिता मानद कैप्टन राजकुमार तिवारी ने आर्मी सर्विस कोर में 36 वर्षों तक सेवा की है।
पिता की लंबी सैन्य सेवा ने शारदेंदु को सेना के जीवन और जिम्मेदारियों से परिचित कराया। हालांकि, सेना में अधिकारी बनने के लिए उन्हें अपने स्तर पर लगातार प्रयास करना पड़ा।
शारदेंदु ने हरियाणा के चंडीमंदिर सेंट्रल स्कूल से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। इसके बाद उन्होंने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज, चंडीगढ़ से इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीई और कंप्यूटर साइंस में एमटेक की पढ़ाई की।
तकनीकी शिक्षा और निजी क्षेत्र में नौकरी के बाद उन्होंने सेना को अपने करियर के रूप में चुना। सात असफल प्रयासों के बावजूद लक्ष्य से पीछे नहीं हटना उनकी यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
सात बार असफल हुए, आठवीं बार मिली कामयाबी
शारदेंदु के लिए सेना में अधिकारी बनना आसान नहीं रहा। उन्हें सात बार असफलता मिली। इसके बावजूद उन्होंने अपना लक्ष्य नहीं बदला और लगातार प्रयास करते रहे।
आठवें प्रयास में सफलता मिलने के बाद उनका सैन्य अधिकारी बनने का सपना पूरा हुआ। उनकी कहानी इस बात को सामने रखती है कि चयन प्रक्रिया में बार-बार असफल होने के बावजूद निरंतर तैयारी और लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता से सफलता हासिल की जा सकती है।
अमेजन की ₹46 लाख की नौकरी छोड़ने का फैसला भी उनके करियर में एक बड़ा बदलाव था। निजी क्षेत्र में आकर्षक पैकेज के बावजूद उन्होंने सैन्य सेवा को प्राथमिकता दी।
आथिरा सुरेश ने भी छोड़ी बड़ी कंपनी की नौकरी
केरल के कालीकट की रहने वाली आथिरा सुरेश की कहानी भी शारदेंदु से अलग होते हुए समान संदेश देती है। उन्होंने आईआईटी-जेईई परीक्षा पास करने के बाद एनआईटी कालीकट से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की।
इंजीनियरिंग के बाद आथिरा ने दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनियों में शामिल एक्सॉनमोबिल में नौकरी की। इसके बावजूद उन्होंने कॉरपोरेट करियर जारी रखने के बजाय भारतीय सेना में जाने का फैसला किया।
उनके पिता नायक सुरेश सिग्नल कोर में सेवा कर चुके हैं। पिता की सैन्य सेवा से प्रेरणा लेकर आथिरा ने सेना को अपने करियर के रूप में चुना।
पहले ही प्रयास में एसएसबी पास किया
आथिरा ने सेना में अधिकारी बनने के लिए अपने पहले ही प्रयास में एसएसबी परीक्षा पास की। इसके बाद उन्होंने गया स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी में सैन्य प्रशिक्षण पूरा किया।
प्रशिक्षण के बाद उन्हें भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में कमीशन मिल गया। उनकी यात्रा में एक ओर उच्च शिक्षा और कॉरपोरेट करियर है, तो दूसरी ओर सैन्य सेवा के प्रति व्यक्तिगत प्रतिबद्धता।
आथिरा ने सेना में शामिल होने के अपने फैसले को किसी वैकल्पिक करियर योजना के रूप में नहीं देखा। उनके अनुसार, आर्मी जॉइन करना उनके लिए ‘बैकअप प्लान’ नहीं था। वह पहले ही सैन्य सेवा को अपने भविष्य के रूप में तय कर चुकी थीं।
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कॉरपोरेट करियर से सैन्य सेवा तक का सफर
शारदेंदु और आथिरा दोनों की कहानियां अलग-अलग शैक्षणिक और पेशेवर पृष्ठभूमि से निकलकर सेना तक पहुंचने की हैं। शारदेंदु ने तकनीकी शिक्षा हासिल करने के बाद अमेजन में नौकरी की, जबकि आथिरा ने एनआईटी कालीकट से इंजीनियरिंग के बाद एक्सॉनमोबिल में काम किया।
दोनों ने निजी क्षेत्र में करियर के विकल्प उपलब्ध होने के बावजूद सैन्य सेवा का रास्ता चुना। शारदेंदु की यात्रा में सात असफल प्रयासों के बाद मिली सफलता खास तौर पर उल्लेखनीय है, जबकि आथिरा ने पहले ही प्रयास में एसएसबी परीक्षा पास कर ली।
64 महिला अधिकारी भी बनीं सेना का हिस्सा
चेन्नई और गया की अकादमियों से प्रशिक्षण पूरा करने वाले 595 नए अधिकारियों में कुल 64 महिलाएं शामिल हैं। चेन्नई से 29 और गया से 35 महिला कैडेट अधिकारी बनीं।
इसके अलावा चेन्नई में मित्र देशों के 17 कैडेटों ने भी प्रशिक्षण पूरा किया, जिनमें 10 महिलाएं थीं। पासिंग आउट परेड के साथ इन कैडेटों ने अपने प्रशिक्षण का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा किया।
595 नए अधिकारियों का सेना में शामिल होना भारतीय सैन्य प्रशिक्षण संस्थानों के लिए भी महत्वपूर्ण अवसर है। इन अधिकारियों में अलग-अलग शैक्षणिक और पेशेवर पृष्ठभूमि से आने वाले युवा शामिल हैं।
नई जिम्मेदारी के साथ सैन्य करियर की शुरुआत
ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी से प्रशिक्षण पूरा करने के बाद कैडेटों का अधिकारी के रूप में कमीशन होना उनके सैन्य करियर की शुरुआत है। शारदेंदु और आथिरा जैसे अधिकारियों की कहानियां यह दिखाती हैं कि सैन्य सेवा चुनने के पीछे व्यक्तिगत प्रेरणा, पारिवारिक पृष्ठभूमि और लंबे समय से तय लक्ष्य जैसे अलग-अलग कारण हो सकते हैं।
शारदेंदु के लिए सात असफलताओं के बाद आठवीं कोशिश में मिली सफलता धैर्य और निरंतर प्रयास की कहानी है। वहीं आथिरा के लिए सेना में जाना पहले से तय करियर निर्णय था, जिसे उन्होंने निजी क्षेत्र की नौकरी के बावजूद आगे बढ़ाया।
दोनों अधिकारियों सहित चेन्नई और गया से कमीशन पाने वाले 595 नए अधिकारी अब भारतीय सेना में अपनी पेशेवर यात्रा की शुरुआत करेंगे।








