सिंगापुर-जापान दौरे से लौटे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, ₹1.5 लाख करोड़ के MoU और ₹2.5 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव

सिंगापुर-जापान दौरे से लौटे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, ₹1.5 लाख करोड़ के MoU और ₹2.5 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव

योगी आदित्यनाथ का दो दिवसीय जापान दौरा समाप्त हो गया है और वह आज लखनऊ लौट आए हैं। मुख्यमंत्री सुबह करीब 4 बजे चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पहुंचे, जहां से वह सीधे अपने सरकारी आवास के लिए रवाना हो गए।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सिंगापुर और जापान के सफल चार दिवसीय विदेश दौरे के बाद लखनऊ लौट आए हैं। यह दौरा राज्य में विदेशी निवेश आकर्षित करने, उन्नत तकनीक लाने और वैश्विक कंपनियों के साथ औद्योगिक साझेदारी मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। मुख्यमंत्री के साथ 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भी इस यात्रा में शामिल था, जिसने कई प्रमुख उद्योग समूहों, विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों के साथ रणनीतिक चर्चा की। यह दौरा उत्तर प्रदेश को भारत के प्रमुख निवेश और औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

₹1.5 लाख करोड़ के MoU और ₹2.5 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव

इस विदेश यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धि सिंगापुर और जापान की कंपनियों के साथ ₹1.5 लाख करोड़ (लगभग 18 अरब अमेरिकी डॉलर) के समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करना रही। इसके अतिरिक्त, कुल ₹2.5 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिससे राज्य में बड़े पैमाने पर औद्योगिक विस्तार की संभावना बढ़ी है।

राज्य सरकार के अनुसार, इन निवेश परियोजनाओं से अगले कुछ वर्षों में लगभग 5 लाख नए रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। यह निवेश इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा, औद्योगिक निर्माण और स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में केंद्रित रहेगा। इन समझौतों से उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ-साथ भारत की वैश्विक विनिर्माण क्षमता भी मजबूत होगी।

सेमीकंडक्टर और ग्रीन हाइड्रोजन पर विशेष ध्यान

दौरे के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ग्रीन एनर्जी और भविष्य की तकनीकों पर विशेष जोर दिया। जापान में यूनिवर्सिटी ऑफ यामानाशी, यामानाशी हाइड्रोजन कंपनी, आईआईटी कानपुर, आईआईटी बीएचयू और हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी के सहयोग से “ग्रीन हाइड्रोजन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस” स्थापित करने की घोषणा की गई।

यह केंद्र स्वच्छ ऊर्जा, हाइड्रोजन ईंधन तकनीक और टिकाऊ औद्योगिक समाधान विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रीन हाइड्रोजन भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा और कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण तकनीक है। इसके अलावा, सेमीकंडक्टर निर्माण इकाइयों की स्थापना पर भी चर्चा हुई, जो भारत को वैश्विक चिप निर्माण आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत स्थिति दिलाने में मदद कर सकती है।

वैश्विक कंपनियों और उद्योग जगत के साथ रणनीतिक बैठकें

मुख्यमंत्री ने अपने दौरे के दौरान कई प्रमुख उद्योग समूहों, निवेशकों और तकनीकी कंपनियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। उन्होंने उत्तर प्रदेश में बेहतर बुनियादी ढांचे, नीतिगत स्थिरता और निवेश-अनुकूल वातावरण को रेखांकित करते हुए कंपनियों को निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने बताया कि राज्य में एक्सप्रेसवे, औद्योगिक कॉरिडोर, लॉजिस्टिक्स पार्क और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं पर तेजी से काम हो रहा है, जिससे निवेशकों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिल रही हैं।

इन बैठकों का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को वैश्विक सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाना और विदेशी कंपनियों को विनिर्माण और अनुसंधान केंद्र स्थापित करने के लिए आकर्षित करना था।

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