संभल शाही जामा मस्जिद में रमजान के दौरान लाउडस्पीकर लगाने की मांग, जफर अली ने डीएम को लिखा पत्र

संभल की शाही जामा मस्जिद में रमजान के दौरान लाउडस्पीकर लगाने की मांग उठी। जफर अली ने इस संबंध में डीएम को पत्र लिखा। मस्जिद का ऐतिहासिक विवाद

संभल के ऐतिहासिक शाही जामा मस्जिद में रमजान के पवित्र महीने में लाउडस्पीकर लगाने की मांग सामने आई है। मस्जिद की इंतजामिया कमिटी ने जिला प्रशासन से अनुमति मांगी है, ताकि इबादत और नमाज के दौरान इमाम की आवाज हर नमाजी तक स्पष्ट रूप से पहुंच सके।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के संभल स्थित शाही जामा मस्जिद में रमजान के पवित्र महीने के दौरान लाउडस्पीकर लगाने की अनुमति मांगे जाने की बात सामने आई है, जिसके तहत मस्जिद इंतजामिया कमिटी ने इबादत को अधिक सुचारू और प्रभावी बनाने के लिए जिला प्रशासन को पत्र लिखा है, लेकिन अब तक जिलाधिकारी की ओर से इस मांग पर कोई मंजूरी नहीं दी गई है।

डीएम से पत्र लिखकर की मांग

शाही जामा मस्जिद के सदर जफर अली ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर रमजान महीने में लाउडस्पीकर की सुविधा देने का अनुरोध किया। जफर अली के मुताबिक, रमजान इस साल 18 फरवरी से शुरू हो रहा है और इस दौरान लाउडस्पीकर के बिना इमाम की तकरीर, दुआ और जरूरी हिदायतें सभी नमाजियों तक सही समय पर नहीं पहुंच पाएंगी। उन्होंने यह भी कहा कि लाउडस्पीकर की मांग पूरी तरह से सरकारी नियमों और दिशा-निर्देशों के अनुरूप है और इसमें किसी प्रकार का नियम उल्लंघन नहीं किया जाएगा।

हालांकि, अब तक जिलाधिकारी ने शाही जामा मस्जिद में लाउडस्पीकर लगाने की अनुमति नहीं दी है, जिससे मस्जिद कमिटी और स्थानीय मुस्लिम समुदाय में असंतोष व्याप्त है।

संभल शाही जामा मस्जिद में रमजान के दौरान लाउडस्पीकर लगाने की मांग, जफर अली ने डीएम को लिखा पत्र

मस्जिद का ऐतिहासिक विवाद

संभल शाही जामा मस्जिद को लेकर विवाद लंबे समय से जारी है। इतिहासकारों के अनुसार, यह मस्जिद मुगल सम्राट बाबर के शासनकाल में मीर बेग द्वारा बनवाई गई थी। वहीं, हिंदू वर्ग का दावा है कि मस्जिद के निर्माण से पहले यह स्थल एक मंदिर था। वर्तमान में इस मस्जिद पर आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) का नियंत्रण है, लेकिन यहां इबादत नियमित रूप से जारी है।

नवंबर 2024 में एएसआई द्वारा मस्जिद क्षेत्र का सर्वे किया गया था, जिसके दौरान हिंसा भड़क उठी थी। पुलिस और प्रशासन पर पत्थरबाजी और गोलीबारी हुई थी, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी और लगभग तीन दर्जन लोग घायल हुए थे। इस घटना में जफर अली को नामजद करते हुए गिरफ्तार किया गया और जेल भेजा गया था।

जफर अली ने बताया कि रमजान के दौरान लाउडस्पीकर के बिना नमाजियों तक इमाम की आवाज और जरूरी जानकारी सही समय पर नहीं पहुंचती। इससे इबादत में बाधा आती है और नमाजियों की एकाग्रता प्रभावित होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह मांग धर्मिक और सामाजिक दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है।

मस्जिद कमिटी का कहना है कि लाउडस्पीकर की सुविधा होने से इबादत की सुविधा और प्रभावशीलता बढ़ेगी और रमजान के माह के दौरान नमाजियों की सुरक्षा और व्यवस्था को भी बेहतर बनाया जा सकेगा।

Leave a comment