संसद में टकराव, राहुल गांधी के मुद्दे पर भिड़े नड्डा और खरगे

राज्यसभा में जेपी नड्डा और मल्लिकार्जुन खरगे आमने-सामने आए। राहुल गांधी, संसद की कार्यवाही और Trade Deal को लेकर सत्ता पक्ष-विपक्ष में तीखी बहस हुई।

मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में जेपी नड्डा और मल्लिकार्जुन खरगे के बीच तीखी बहस हुई। राहुल गांधी, संसद की कार्यवाही और Trade Deal को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने सामने नजर आए।

New Delhi: संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में आज उस समय माहौल गरमा गया, जब सदन के नेता और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा तथा विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के बीच तीखी बहस देखने को मिली। कार्यवाही शुरू होते ही दोनों नेताओं के बीच शब्दों की तल्खी साफ नजर आई। यह बहस केवल नियमों और कार्यवाही तक सीमित नहीं रही, बल्कि सीधे तौर पर कांग्रेस नेतृत्व और विपक्ष की भूमिका पर केंद्रित हो गई।

राहुल गांधी पर बिना नाम लिए सीधा हमला

जेपी नड्डा ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का नाम लिए बिना उन्हें “अबोध बालक” करार दिया। उन्होंने मल्लिकार्जुन खरगे से आग्रह किया कि वह अपनी पार्टी को ऐसे व्यक्ति का बंधक न बनने दें। नड्डा ने कहा कि खरगे वरिष्ठ नेता हैं और उन्हें पार्टी के भीतर यह समझाना चाहिए कि लोकतंत्र में कैसे काम किया जाता है।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि अबोधता और अहंकार का मिश्रण बेहद खतरनाक होता है। कांग्रेस को इस मानसिकता से बाहर निकलना चाहिए और संसद की गरिमा बनाए रखनी चाहिए।

कांग्रेस नेतृत्व पर तीखी टिप्पणी

जेपी नड्डा ने अपने संबोधन में कहा कि कांग्रेस पार्टी को एक व्यक्ति केंद्रित राजनीति से बाहर आना होगा। उन्होंने कहा कि पार्टी को यह सोचना चाहिए कि बार बार संसद की कार्यवाही बाधित करने से देश और लोकतंत्र को क्या संदेश जाता है। नड्डा का कहना था कि चर्चा और संवाद से ही समाधान निकलता है, न कि हंगामे से।

मोदी सरकार हर मुद्दे पर चर्चा को तैयार

नड्डा ने साफ शब्दों में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार हर विषय पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि लोकसभा में प्रधानमंत्री खुद जवाब देने के लिए तैयार बैठे रहे, लेकिन विपक्ष ने सदन को चलने नहीं दिया।

राज्यसभा के संदर्भ में उन्होंने कहा कि विपक्ष ने भारत अमेरिका Trade Deal को लेकर बयान की मांग की थी। सरकार ने इस मांग को स्वीकार किया और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने सदन में बयान दिया।

ट्रेड डील पर सरकार का रुख

संसद में टकराव, राहुल गांधी के मुद्दे पर भिड़े नड्डा और खरगे

जेपी नड्डा ने बताया कि पीयूष गोयल के बयान के बाद विपक्ष ने Trade Deal का पूरा विवरण तुरंत साझा करने की मांग की। इस पर सरकार ने स्पष्ट किया कि जैसे ही बातचीत का पूरा ब्योरा तैयार होगा, उसे सदन और देश के सामने रखा जाएगा। नड्डा ने कहा कि सरकार किसी भी विषय पर पारदर्शिता से पीछे नहीं हट रही है।

विपक्ष पर कार्यवाही बाधित करने का आरोप

नड्डा ने आरोप लगाया कि विपक्ष बार बार संसद की कार्यवाही बाधित कर रहा है। उन्होंने कहा कि चर्चा से बचना और केवल हंगामा करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है। संसद जनता की आवाज है और इसे चलने देना सभी की जिम्मेदारी है।

किरेन रिजिजू का विपक्ष पर पलटवार

इससे पहले संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह आरोप पूरी तरह गलत है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने नहीं दिया गया। रिजिजू के मुताबिक राहुल गांधी को निर्धारित समय से 20 मिनट ज्यादा समय दिया गया था।

उन्होंने कहा कि इसके बावजूद राहुल गांधी बार बार स्पीकर की रूलिंग का उल्लंघन करते रहे। स्पीकर द्वारा मना करने के बाद भी वह उन्हीं मुद्दों पर बोलते रहे, जिनकी अनुमति नहीं थी। यही वजह रही कि कार्यवाही प्रभावित हुई।

लोकतांत्रिक नियमों की अनदेखी का आरोप

किरण रिजिजू ने कहा कि संसद में बोलने की आजादी सभी को है, लेकिन नियमों के भीतर रहकर। अगर कोई सदस्य बार बार नियम तोड़ेगा तो स्पीकर को कार्रवाई करनी ही पड़ेगी। इसे लोकतंत्र का गला घोंटना कहना पूरी तरह गलत है।

खरगे का सत्ता पक्ष पर पलटवार

जेपी नड्डा और किरेन रिजिजू के आरोपों के बाद विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने भी जोरदार जवाब दिया। खरगे ने कहा कि संसद लोकसभा और राज्यसभा दोनों से मिलकर बनती है। अगर एक सदन में नेता प्रतिपक्ष को बोलने नहीं दिया जाएगा, तो इसका असर दूसरे सदन में भी दिखाई देगा।

सत्ता पक्ष पर अहंकार का आरोप

खरगे ने कहा कि सत्ता पक्ष अहंकार में डूबा हुआ है और वह लोकतंत्र को कुचलना चाहता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। उनका कहना था कि संसद में सवाल पूछना और सरकार से जवाब मांगना विपक्ष का अधिकार है।

खरगे ने यह भी कहा कि अगर विपक्ष को अपनी बात रखने का मौका नहीं मिलेगा, तो संसद की गरिमा कैसे बचेगी। उन्होंने सत्ता पक्ष से आग्रह किया कि वह संवाद का रास्ता अपनाए और विपक्ष की आवाज सुने।

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