राजस्थान में CB-NAAT किट की भारी कमी से टीबी जांच प्रभावित है। जयपुर के SMS मेडिकल कॉलेज सहित कई सरकारी अस्पतालों में महीनों से जांच बंद है, जिससे मरीजों को इलाज में देरी और निजी लैब का सहारा लेना पड़ रहा है।
Rajasthan: राजस्थान सरकार द्वारा प्रदेश को टीबी-मुक्त बनाने के लिए चलाया जा रहा अभियान इस समय गंभीर संकट से गुजर रहा है। टीबी की सबसे जरूरी और भरोसेमंद जांच मानी जाने वाली सीबी-नॉट (CB-NAAT) जांच के बिना ही स्वास्थ्य तंत्र काम कर रहा है। किट की भारी कमी के चलते राज्य की लगभग सभी ग्राम पंचायतों में टीबी-मुक्त अभियान की रफ्तार थम गई है।
सबसे चौंकाने वाली स्थिति राजधानी जयपुर की है, जहां प्रदेश का सबसे बड़ा सवाई मानसिंह (SMS) मेडिकल कॉलेज पिछले करीब तीन महीनों से इस जांच को पूरी तरह बंद रखे हुए है। ऐसे में टीबी के लक्षण वाले मरीजों को समय पर जांच और इलाज नहीं मिल पा रहा है।
खांसी के मरीज भटकने को मजबूर
SMS मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों- जैसे सवाई मानसिंह हॉस्पिटल, जे.के. लोन, सैटेलाइट बनीपार्क, कांवटिया, गणगौरी, सांगानेरी गेट महिला चिकित्सालय और जनाना हॉस्पिटल- में रोज बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं।
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डॉक्टरों के अनुसार, लंबे समय से खांसी, बुखार और कमजोरी से परेशान मरीजों के लिए CB-NAAT जांच बेहद जरूरी होती है, ताकि टीबी की समय पर पुष्टि हो सके। डॉक्टर यह जांच लिख तो रहे हैं, लेकिन जब मरीज सैंपल लेकर लैब में पहुंचते हैं, तो उन्हें किट उपलब्ध न होने की वजह से वापस लौटना पड़ता है।
इस कारण मरीजों को दो-तीन दिन तक अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ते हैं और आखिरकार उन्हें मजबूरी में निजी लैब से महंगी जांच करानी पड़ रही है। इससे न सिर्फ इलाज में देरी हो रही है, बल्कि आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है।
जिला और उप-जिला अस्पतालों में भी यही हाल
स्थिति केवल SMS मेडिकल कॉलेज तक सीमित नहीं है। जयपुर जिले के आसपास के सरकारी अस्पतालों- जिला अस्पताल, उप-जिला अस्पताल और सैटेलाइट हॉस्पिटल, में भी पिछले करीब एक महीने से CB-NAAT जांच बंद है।
ग्रामीण और कस्बाई इलाकों से आने वाले मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं, क्योंकि उनके पास निजी जांच का विकल्प भी सीमित होता है। इससे टीबी के नए मामलों की पहचान और इलाज में गंभीर बाधा आ रही है।
टेंडर अटका
स्टेट टीबी नोडल ऑफिसर डॉ. पुरुषोत्तम सोनी ने बताया कि लंबे समय से CB-NAAT किट की सप्लाई नहीं हो पा रही है। इस संबंध में दिल्ली और राजस्थान मेडिकल सर्विस कॉरपोरेशन लिमिटेड (RMSCL) को डिमांड भेजी गई है, लेकिन दोनों जगह टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण सप्लाई अटकी हुई है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में हर महीने करीब 40 हजार या उससे ज्यादा CB-NAAT जांचें की जाती थीं। पिछले दो-तीन महीनों से ये जांचें लगभग पूरी तरह बंद हैं, जिससे टीबी नियंत्रण कार्यक्रम पर सीधा असर पड़ रहा है।








