तेलंगाना के राजन्ना सिरसिला जिले में दो पत्रकारों से कथित पुलिस मारपीट के मामले में BRS नेता आरएस प्रवीण कुमार ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने FIR दर्ज करने और CID जांच या विशेष जांच दल गठित करने की मांग उठाई।
करीमनगर: तेलंगाना के राजन्ना सिरसिला जिले के गंभीरावपेट मंडल में दो पत्रकारों के साथ कथित पुलिस मारपीट का मामला सामने आया है। भारत राष्ट्र समिति (BRS) के राज्य मुख्य सचिव डॉ. आरएस प्रवीण कुमार ने इस घटना की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि पत्रकारों को गंभीर शारीरिक चोटें आईं, जिनमें एक का हाथ फ्रैक्चर होने की बात भी शामिल है। प्रवीण कुमार ने पुलिस से पत्रकारों की शिकायत पर तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की मांग की है।
सोमवार को करीमनगर में दोनों पत्रकारों से मुलाकात के दौरान BRS नेता ने उनके प्रति एकजुटता व्यक्त की। उन्होंने पूरे मामले की पारदर्शी जांच के लिए आपराधिक जांच विभाग (CID) से जांच कराने या विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का सुझाव दिया। हालांकि, घटना से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस का विस्तृत पक्ष उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है।
पत्रकारों ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप
डॉ. आरएस प्रवीण कुमार के अनुसार, दोनों पत्रकारों ने आरोप लगाया है कि जमीन विवाद से जुड़े मामले में पुलिस के हस्तक्षेप की रिपोर्टिंग करने के बाद उन्हें निशाना बनाया गया। उन्होंने दावा किया कि गंभीरावपेट के सब-इंस्पेक्टर ने पत्रकारों के खिलाफ मामले दर्ज किए और इसके बाद कथित तौर पर उनके साथ गंभीर शारीरिक मारपीट की गई।
BRS नेता ने इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए कहा कि पत्रकारों की शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होना चिंताजनक है। उनके मुताबिक, दोनों पत्रकारों ने करीमनगर पुलिस आयुक्त के समक्ष अपनी शिकायत प्रस्तुत की थी, लेकिन उस शिकायत पर FIR दर्ज नहीं की गई।
उन्होंने अधिकारियों से मांग की कि शिकायत को गंभीरता से लिया जाए और मामले की जांच ऐसी एजेंसी से कराई जाए, जिसकी निष्पक्षता पर सवाल न उठें।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि पुलिस पर लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है। संबंधित पुलिस अधिकारियों का पक्ष और मामले से जुड़े दस्तावेज सामने आने पर घटनाक्रम की अधिक स्पष्ट तस्वीर मिल सकेगी।
हाथ फ्रैक्चर होने का दावा, घर के दरवाजे तोड़ने पर भी सवाल
प्रवीण कुमार ने पत्रकारों को आई चोटों का उल्लेख करते हुए कहा कि कथित मारपीट में उन्हें गंभीर शारीरिक नुकसान पहुंचा। शिकायत से संबंधित विवरण में एक पत्रकार के हाथ में फ्रैक्चर होने की बात कही गई है।
उन्होंने पत्रकारों को गिरफ्तार करने के तरीके पर भी सवाल उठाए। BRS नेता ने आरोप लगाया कि गिरफ्तारी के दौरान उनके घर के दरवाजे तोड़कर प्रवेश किया गया। उन्होंने पूछा कि यदि पुलिस को कानूनी कार्रवाई करनी थी, तो क्या निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया था।
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस की कार्रवाई, इस्तेमाल किए गए बल और संबंधित परिस्थितियों की जांच महत्वपूर्ण मानी जा सकती है। हालांकि, घर के दरवाजे तोड़े जाने और मारपीट के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध विवरण से नहीं होती।
प्रवीण कुमार ने मांग की कि जांच में इन सभी पहलुओं को शामिल किया जाए, ताकि घटना से जुड़े तथ्यों को सामने लाया जा सके और यदि किसी अधिकारी ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई हो।
CID जांच या SIT गठित करने की मांग
मामले में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए BRS नेता ने दो विकल्प सुझाए। उन्होंने कहा कि जांच CID को सौंपी जाए या एक विशेष जांच दल का गठन किया जाए।
उनकी मांग है कि जांच के दौरान पत्रकारों की शिकायत, उन्हें लगी चोटों, गिरफ्तारी की परिस्थितियों और पुलिस अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल की जाए। साथ ही, यदि किसी अधिकारी के खिलाफ आरोप प्रमाणित होते हैं, तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।
CID या SIT से जांच कराने की मांग का उद्देश्य मामले की जांच को पारदर्शी बनाना है। हालांकि, जांच किस एजेंसी को सौंपी जाएगी, इस बारे में उपलब्ध जानकारी में किसी आधिकारिक निर्णय का उल्लेख नहीं है।
प्रवीण कुमार ने अधिकारियों से यह भी आग्रह किया कि पत्रकारों की शिकायत पर बिना देरी FIR दर्ज की जाए। उनके मुताबिक, शिकायतों पर उचित कार्रवाई और स्वतंत्र जांच से मामले की सच्चाई सामने लाने में मदद मिल सकती है।
गिरफ्तारी के दौरान कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी: प्रवीण कुमार
BRS नेता ने पुलिस कार्रवाई के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों और स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी कानून के अनुरूप होनी चाहिए और पुलिस को अपने अधिकारों का इस्तेमाल निर्धारित सीमाओं के भीतर करना चाहिए।
उन्होंने हिरासत में कार्ला राजेश की मौत सहित कथित पुलिस ज्यादतियों से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया। प्रवीण कुमार ने इन घटनाओं के संदर्भ में जवाबदेही सुनिश्चित करने और पुलिस कार्रवाई में कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उनका कहना था कि पुलिस की जिम्मेदारी केवल कानून लागू करना नहीं, बल्कि कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करना भी है। गिरफ्तारी, हिरासत और पूछताछ के दौरान लागू नियमों का पालन नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
हालांकि, कार्ला राजेश की हिरासत में मौत और मौजूदा पत्रकार मामले के बीच किसी सीधे संबंध का दावा उपलब्ध जानकारी से नहीं किया जा सकता। दोनों घटनाओं के तथ्य और परिस्थितियां अलग-अलग जांच का विषय हो सकती हैं।
पत्रकारों की शिकायत पर कार्रवाई क्यों महत्वपूर्ण?
इस मामले ने पुलिस के खिलाफ शिकायत मिलने पर अपनाई जाने वाली प्रक्रिया और पत्रकारों की सुरक्षा से जुड़े सवालों को सामने रखा है। पत्रकार सार्वजनिक महत्व के मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं। ऐसे में जमीन विवाद जैसे मामलों की रिपोर्टिंग के बाद उनके साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोप गंभीरता से जांचे जाने चाहिए।
यदि किसी पत्रकार को लगता है कि उसके साथ गैरकानूनी व्यवहार हुआ है, तो उसकी शिकायत पर उचित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई करना जवाबदेही का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी तरह, पुलिस अधिकारियों पर लगे आरोपों की जांच भी निष्पक्ष होनी चाहिए, ताकि बिना पर्याप्त साक्ष्य किसी को दोषी न ठहराया जाए।
मौजूदा मामले में शिकायत पर FIR दर्ज नहीं होने का आरोप जांच की मांग को और महत्वपूर्ण बनाता है। संबंधित अधिकारियों को शिकायत की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यह बताना चाहिए कि उस पर क्या कार्रवाई की गई है।
आगे की कार्रवाई पर टिकी नजर
करीमनगर में पत्रकारों से मुलाकात के दौरान डॉ. आरएस प्रवीण कुमार के साथ BRS नेता कोंकटी शेखर और उरुमल्ला विश्वम भी मौजूद थे। पार्टी नेताओं ने पत्रकारों के प्रति समर्थन व्यक्त किया और मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।
फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, BRS नेता ने CID जांच या SIT गठन, शिकायत पर FIR दर्ज करने और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। जांच एजेंसी के चयन और पुलिस की ओर से आगे की कार्रवाई को लेकर कोई अंतिम निर्णय उपलब्ध विवरण में नहीं बताया गया है।
इस मामले में अब मुख्य सवाल यह है कि पत्रकारों की शिकायत पर क्या कार्रवाई होती है और कथित मारपीट से जुड़े आरोपों की जांच किस तरह आगे बढ़ती है। निष्पक्ष जांच, साक्ष्यों की समीक्षा और संबंधित पक्षों के बयान सामने आने के बाद ही घटना की वास्तविक परिस्थितियों का स्पष्ट निर्धारण किया जा सकेगा।







