हैदराबाद के लोक भवन में तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने पत्नी जानकी शुक्ला के साथ बथुकम्मा उत्सव में हिस्सा लिया। करीब 400 महिलाओं ने पारंपरिक गीत, नृत्य और पुष्प पूजा के जरिए राज्य की सांस्कृतिक विरासत का उत्सव मनाया।
हैदराबाद: तेलंगाना की सांस्कृतिक पहचान से जुड़े प्रमुख पुष्प उत्सव बथुकम्मा का आयोजन हैदराबाद स्थित लोक भवन में पारंपरिक उत्साह के साथ किया गया। गुरुवार को आयोजित इस समारोह में तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने अपनी पत्नी जानकी शुक्ला के साथ भाग लिया। इस दौरान दंपती ने देवी गौरी अम्मा की विशेष पूजा-अर्चना की और राज्य के लोगों के लिए शांति, समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य तथा खुशहाली की कामना की। कार्यक्रम में करीब 400 महिलाओं ने हिस्सा लिया। पारंपरिक गीतों, रंग-बिरंगी पुष्प सजावट, लोकनृत्य और धार्मिक अनुष्ठानों के जरिए तेलंगाना की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया गया।
बथुकम्मा तेलंगाना की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने बथुकम्मा को तेलंगाना की परंपराओं, महिलाओं की रचनात्मकता और प्रकृति के प्रति सम्मान को प्रदर्शित करने वाला महत्वपूर्ण त्योहार बताया। उन्होंने कहा कि यह उत्सव लोगों के बीच सामाजिक सद्भाव बढ़ाने के साथ राज्य की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करता है।
बथुकम्मा मुख्य रूप से फूलों से जुड़ा उत्सव है, जिसमें महिलाएं विभिन्न प्रकार के मौसमी फूलों को विशेष आकार में सजाकर पूजा करती हैं। इन पुष्प संरचनाओं को स्थानीय परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तैयार किया जाता है। उत्सव के दौरान महिलाएं एकत्र होकर पारंपरिक गीत गाती हैं, तालियां बजाती हैं और सामूहिक नृत्य करती हैं।
राज्यपाल के अनुसार, इस त्योहार की विशेषता यह है कि इसमें प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने के साथ सामुदायिक भागीदारी और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को भी महत्व दिया जाता है।
देवी गौरी अम्मा की पूजा कर मांगी खुशहाली
लोक भवन में आयोजित समारोह के दौरान शिव प्रताप शुक्ल और उनकी पत्नी जानकी शुक्ला ने देवी गौरी अम्मा की विशेष पूजा की। इस अवसर पर उन्होंने तेलंगाना के नागरिकों की शांति, समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और सामान्य कल्याण के लिए प्रार्थना की।
पूजा के लिए रंग-बिरंगे फूलों से आकर्षक बथुकम्मा सजाए गए थे। इनके आसपास महिलाएं पारंपरिक गीत गाती रहीं और लयबद्ध तालियों के साथ उत्सव में शामिल हुईं। धार्मिक अनुष्ठानों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को पारंपरिक स्वरूप दिया।
बथुकम्मा उत्सव में सामूहिक भागीदारी महत्वपूर्ण मानी जाती है। महिलाएं अपने परिवारों और समुदायों के साथ इसमें हिस्सा लेकर सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाती हैं। लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम ने भी इसी सामुदायिक भावना को प्रदर्शित किया।
फूलों की सजावट से प्रकृति संरक्षण का संदेश
राज्यपाल ने बथुकम्मा की पुष्प संरचनाओं को प्रकृति की सुंदरता और मानव जीवन के बीच संबंध का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि फूलों की विविधता और उन्हें व्यवस्थित ढंग से सजाने की परंपरा पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देती है।
उनके अनुसार, प्रकृति की पूजा केवल धार्मिक गतिविधि तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे पर्यावरण की रक्षा और प्राकृतिक संसाधनों के जिम्मेदार इस्तेमाल से भी जोड़ा जाना चाहिए।
बथुकम्मा जैसे उत्सव स्थानीय फूलों, मौसमी वनस्पतियों और प्रकृति से जुड़े सांस्कृतिक ज्ञान को महत्व देते हैं। इस तरह की परंपराएं लोगों को अपने आसपास के प्राकृतिक वातावरण के प्रति जागरूक करने का अवसर भी प्रदान करती हैं।
राज्यपाल ने नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों में सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि त्योहार की भावना लोगों को प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण सुरक्षित रखने के लिए प्रेरित करेगी।
महिला सशक्तिकरण और सांस्कृतिक विरासत पर जोर
शिव प्रताप शुक्ल ने बथुकम्मा को महिलाओं की रचनात्मकता, आत्मसम्मान और सामाजिक विकास में उनकी सक्रिय भागीदारी से जुड़ा उत्सव बताया। उन्होंने कहा कि महिलाएं पारंपरिक लोकगीतों, कला रूपों और सांस्कृतिक रीति-रिवाजों को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
उनके मुताबिक, इन परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि सांस्कृतिक विरासत समय के साथ कमजोर न पड़े। उन्होंने महिलाओं के योगदान की सराहना करते हुए सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी को प्रोत्साहित करने की बात कही।
बथुकम्मा जैसे आयोजनों में महिलाएं केवल दर्शक नहीं होतीं, बल्कि पूरे उत्सव की प्रमुख सहभागी होती हैं। फूलों की सजावट तैयार करने से लेकर पारंपरिक गीतों और नृत्यों के आयोजन तक उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रहती है।
ऐसे कार्यक्रम स्थानीय समुदायों को अपनी सांस्कृतिक पहचान से जुड़ने का अवसर देते हैं। साथ ही, नई पीढ़ी को परंपरागत कला और लोक-संगीत से परिचित कराने में भी मदद करते हैं।
करीब 400 महिलाओं ने लिया उत्सव में हिस्सा
लोक भवन में आयोजित बथुकम्मा समारोह में लगभग 400 महिलाओं ने भाग लिया। इनमें तेलंगाना संस्कृति सारथि से जुड़े सांस्कृतिक कलाकार, महिला कर्मचारी और उनके परिवार शामिल थे।
कार्यक्रम स्थल पर फूलों से सजी बथुकम्मा संरचनाओं के आसपास महिलाएं एकत्र हुईं। उन्होंने पारंपरिक गीत गाए, तालियां बजाईं और सामूहिक नृत्य किया। रंग-बिरंगी सजावट और रोशनी ने समारोह के माहौल को और आकर्षक बना दिया।
कार्यक्रम में तेलंगाना की लोक संस्कृति से जुड़ी प्रस्तुतियां भी हुईं। इनमें कोलाटम नृत्य विशेष आकर्षण रहा। इस पारंपरिक नृत्य में प्रतिभागी लय और ताल के साथ समूह में प्रस्तुति देते हैं।
धार्मिक पूजा, लोकगीत और सामूहिक नृत्य के संयोजन ने कार्यक्रम को सांस्कृतिक उत्सव का रूप दिया। आयोजन में विभिन्न पृष्ठभूमियों की महिलाओं की भागीदारी ने सामुदायिक एकजुटता को भी प्रदर्शित किया।
जानकी शुक्ला ने महिलाओं के साथ किया पुष्प विसर्जन
समारोह के अंतिम चरण में राज्यपाल की पत्नी जानकी शुक्ला ने महिला कर्मचारियों के साथ लोक भवन परिसर में स्थित तालाब में बथुकम्मा का विसर्जन किया।
बथुकम्मा उत्सव के दौरान पुष्प संरचनाओं के साथ किए जाने वाले पारंपरिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व है। विसर्जन इस उत्सव के धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।
लोक भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में पूजा और सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ उत्सव की परंपराओं का पालन किया गया। इस दौरान महिलाओं ने सामूहिक रूप से भाग लिया और कार्यक्रम का समापन पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ।
सामाजिक सद्भाव और तेलंगाना के विकास की अपील
राज्यपाल ने नागरिकों से तेलंगाना की प्रगति में योगदान देने की अपील की। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
उन्होंने उम्मीद जताई कि बथुकम्मा का उत्सव लोगों के बीच स्नेह और एकता के संबंधों को मजबूत करेगा। उनके संदेश में सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने के साथ सामाजिक विकास में नागरिकों की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया गया।
बथुकम्मा जैसे त्योहार धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक पहचान के साथ सामुदायिक मेल-जोल को बढ़ावा देते हैं। ऐसे आयोजन विभिन्न पीढ़ियों के लोगों को एक साथ लाते हैं और पारंपरिक ज्ञान को साझा करने का अवसर देते हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों की भी रही मौजूदगी
लोक भवन में आयोजित समारोह में कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए। इनमें संयुक्त सचिव के. शशि किरण कोमांडुर, उप सचिव जी. पल्लवी और प्रेस सचिव एम. दशरथ सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
अधिकारियों, सांस्कृतिक कलाकारों और महिला कर्मचारियों की भागीदारी ने कार्यक्रम को संस्थागत और सांस्कृतिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण बनाया।
बथुकम्मा उत्सव का व्यापक महत्व
तेलंगाना का बथुकम्मा उत्सव फूलों, लोक-संगीत, सामुदायिक भागीदारी और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है। लोक भवन में आयोजित समारोह ने इन पहलुओं को सामने लाते हुए महिला सशक्तिकरण, सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि परंपराओं को जीवित रखना केवल अतीत को याद करना नहीं है, बल्कि उन्हें वर्तमान सामाजिक जरूरतों से जोड़ना भी है।









