India-China Relations: भारत-चीन के रिश्तों पर जयशंकर का बड़ा बयान, सीमा पर शांति को बताया सामान्य संबंधों की शर्त

India-China Relations: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत-चीन संबंधों पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सामान्य रिश्तों के लिए सीमा पर शांति

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत-चीन संबंधों को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि दोनों देशों के रिश्तों को सामान्य बनाने के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीमा पर किसी भी तरह की गड़बड़ी के गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

India China Relations: भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना जरूरी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यह स्पष्ट करते हुए कहा है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में किसी भी तरह की अशांति का असर दोनों देशों के व्यापक रिश्तों पर पड़ता है। उनके मुताबिक, वर्ष 2024 के बाद से सीमा पर स्थिति में सुधार के साथ भारत-चीन संबंध भी सामान्य होने की दिशा में आगे बढ़े हैं। हालांकि, रिश्तों को पूरी तरह मजबूत बनाने के लिए सीमा से जुड़े मुद्दों का शांतिपूर्ण समाधान अहम बना हुआ है।

भारत-चीन संबंधों में सीमा विवाद क्यों है अहम?

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक इंटरव्यू में कहा कि भारत और चीन के बीच सीमा का प्रश्न कई दशकों पुराना है। दोनों देशों के बीच पूरी तरह निर्धारित सीमा को लेकर मतभेद रहे हैं, लेकिन लंबे समय तक सीमा पर अपेक्षाकृत शांति बनी रही थी। जयशंकर के अनुसार, वर्ष 1975 से 2020 के बीच सीमा पर ऐसी घटनाओं में जान जाने का सिलसिला नहीं देखा गया, जैसा 2020 में सामने आया। यह अवधि भारत-चीन संबंधों के इतिहास में महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इस दौरान दोनों देशों ने व्यापार, कूटनीति और अन्य क्षेत्रों में अपने संबंधों को आगे बढ़ाया।

विदेश मंत्री का कहना था कि सीमा पर शांति बनाए रखना केवल सैन्य स्तर का मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध दोनों देशों के राजनीतिक और कूटनीतिक रिश्तों से भी है।

2020 में गलवान संघर्ष के बाद बदले हालात

India-China Relations: भारत-चीन के रिश्तों पर जयशंकर का बड़ा बयान, सीमा पर शांति को बताया सामान्य संबंधों की शर्त

भारत और चीन के संबंधों में वर्ष 2020 एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ। उस साल पूर्वी लद्दाख में सीमा को लेकर तनाव बढ़ा और गलवान घाटी में भारतीय तथा चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई। इस घटना में दोनों पक्षों के सैनिकों की जान गई, जिसके बाद द्विपक्षीय संबंधों पर गहरा असर पड़ा। जयशंकर ने याद दिलाया कि यह घटनाक्रम उस समय सामने आया, जब दुनिया कोविड-19 महामारी और उससे जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रही थी। सीमा पर तनाव बढ़ने के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत का लंबा दौर चला।

इस संकट ने स्पष्ट कर दिया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति भंग होने की स्थिति में सामान्य द्विपक्षीय गतिविधियों को जारी रखना मुश्किल हो सकता है। इसके बाद सीमा पर तनाव कम करने और सैनिकों की तैनाती से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए कई दौर की वार्ताएं हुईं।

2024 के बाद संबंधों में सुधार के संकेत

विदेश मंत्री के अनुसार, वर्ष 2024 के बाद भारत और चीन के संबंधों में सुधार की दिशा में प्रगति हुई है। सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिति बेहतर होने से दोनों देशों के बीच व्यापक संबंधों को आगे बढ़ाने की संभावनाएं भी बढ़ी हैं। हालांकि, सीमा पर तनाव कम होने का अर्थ यह नहीं है कि दोनों देशों के सभी मतभेद समाप्त हो गए हैं। भारत का रुख है कि सामान्य संबंधों के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता आवश्यक है। इस दृष्टिकोण के तहत सीमा से जुड़े विवादों का समाधान और दोनों पक्षों के बीच भरोसा कायम करना महत्वपूर्ण बना हुआ है।

जयशंकर ने जोर दिया कि यदि दोनों देश अपने संबंधों को सामान्य स्तर पर ले जाना चाहते हैं, तो सीमावर्ती इलाकों में स्थिर परिस्थितियां बनाए रखना जरूरी होगा। सीमा पर किसी भी तरह की गड़बड़ी का असर व्यापार, संवाद और दूसरे क्षेत्रों में सहयोग पर पड़ सकता है।

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