केंद्रीय कैबिनेट ने 62 साल पुराने आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) में सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की हिस्सेदारी बेचने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस सौदे के तहत दोनों मिलकर बैंक की 60.72% हिस्सेदारी कनाडाई कंपनी फेयरफैक्स की इकाई को बेचेंगे।
IDBI Bank Privatization: केंद्र सरकार ने IDBI बैंक में अपनी और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की हिस्सेदारी बेचने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस सौदे के तहत बैंक की 60.72% हिस्सेदारी करीब 52,878 करोड़ रुपये में बेचने की योजना है। कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स से जुड़ी इस डील को पूरा होने पर मोदी सरकार के कार्यकाल के बड़े विनिवेश सौदों में गिना जाएगा।
पिछले एक दशक में केंद्र सरकार ने विमानन, ऊर्जा, वित्त और बुनियादी ढांचे सहित कई क्षेत्रों में सरकारी कंपनियों की हिस्सेदारी बेची है या उनका स्वामित्व दूसरी सरकारी कंपनियों को सौंपा है।
IDBI बैंक से पहले कौन-कौन सी बड़ी कंपनियां बिकीं?
सरकार के विनिवेश कार्यक्रम में एयर इंडिया और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) जैसे बड़े नाम शामिल हैं। वर्ष 2017-18 में ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) ने HPCL में सरकार की 51.11% हिस्सेदारी 36,915 करोड़ रुपये में खरीदी थी। वहीं, वित्त वर्ष 2021-22 में एयर इंडिया का स्वामित्व टाटा समूह की टैलेस प्राइवेट लिमिटेड को 18,000 करोड़ रुपये के सौदे के तहत सौंपा गया।
एयर इंडिया के मामले में टाटा समूह ने 2,700 करोड़ रुपये नकद दिए, जबकि 15,300 करोड़ रुपये का कर्ज अपने ऊपर लिया। इसके अलावा, सरकार ने बिजली, बंदरगाह, निर्माण और वित्तीय सेवाओं से जुड़ी कंपनियों में भी हिस्सेदारी का हस्तांतरण किया।
मोदी सरकार के कार्यकाल के 13 बड़े विनिवेश सौदे
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उपलब्ध विवरण के मुताबिक, इन सौदों में अलग-अलग तरह के लेनदेन शामिल हैं। कुछ में निजी कंपनियों ने सरकारी परिसंपत्तियां खरीदीं, जबकि कुछ का स्वामित्व एक सरकारी कंपनी से दूसरी सरकारी कंपनी को स्थानांतरित हुआ। IDBI बैंक: प्रस्तावित सौदे में सरकार और LIC की कुल 60.72% हिस्सेदारी 52,878 करोड़ रुपये में बेचने की योजना है। इसे वित्त वर्ष 2026-27 से जोड़ा गया है।
- इंडियन मेडिसिन्स फार्मास्युटिकल कॉर्पोरेशन: कंपनी को 119 करोड़ रुपये में बेचने का उल्लेख है।
- फेरो स्क्रैप निगम लिमिटेड: MSTC की इस सहायक कंपनी को जापान की कोनोइके ट्रांसपोर्ट ने 320 करोड़ रुपये में खरीदा।
- नीलांचल इस्पात निगम लिमिटेड: टाटा स्टील लॉन्ग प्रोडक्ट्स ने कंपनी को 12,100 करोड़ रुपये में अधिग्रहित किया।
- एयर इंडिया: टाटा समूह की टैलेस प्राइवेट लिमिटेड ने एयर इंडिया और संबंधित कारोबार के लिए 18,000 करोड़ रुपये का सौदा किया।
- THDC इंडिया लिमिटेड: NTPC ने कंपनी को 7,500 करोड़ रुपये में खरीदा।
- NEEPCO: नॉर्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन का अधिग्रहण NTPC ने 4,000 करोड़ रुपये में किया।
- कामराजर पोर्ट लिमिटेड: चेन्नई पोर्ट ट्रस्ट ने इसे 2,383 करोड़ रुपये में खरीदा।
- REC: पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (PFC) ने रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉर्पोरेशन में सरकार की 52.63% हिस्सेदारी 14,500 करोड़ रुपये में खरीदी।
- HSCC इंडिया लिमिटेड: NBCC ने कंपनी का अधिग्रहण 285 करोड़ रुपये में किया।
- NPCC: नेशनल प्रोजेक्ट्स कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन को WAPCOS ने 80 करोड़ रुपये में खरीदा।
- ड्रेजिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया: कई बंदरगाहों के एक कंसोर्टियम ने कंपनी में सरकारी हिस्सेदारी 1,049 करोड़ रुपये में खरीदी।
- HPCL: ONGC ने कंपनी में सरकार की 51.11% हिस्सेदारी 36,915 करोड़ रुपये में खरीदी।
इन आंकड़ों में निजीकरण, रणनीतिक बिक्री और सरकारी कंपनियों के बीच हिस्सेदारी हस्तांतरण जैसे अलग-अलग प्रकार के सौदे शामिल हैं। इसलिए सभी लेनदेन को समान अर्थ में निजीकरण या सरकारी खजाने की कमाई मानना उचित नहीं होगा।
कौन हैं IDBI बैंक के संभावित नए मालिक प्रेम वत्सा?
फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को भारतीय मूल के कनाडाई कारोबारी प्रेम वत्सा का समर्थन हासिल है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वत्सा का जन्म हैदराबाद में हुआ था। उन्होंने IIT मद्रास से केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और बाद में कनाडा जाकर यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ओंटारियो से MBA किया।उन्होंने 1985 में टोरंटो में फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की स्थापना की।
कंपनी का कारोबार निवेश और वित्तीय सेवाओं से जुड़ा है। IDBI बैंक में हिस्सेदारी का प्रस्तावित अधिग्रहण पूरा होने पर भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में फेयरफैक्स की भूमिका और महत्वपूर्ण हो सकती है।









