ट्रेन कैंसिल होने पर दोबारा टिकट लेना पड़ा, रेलवे ने काटे ₹2,110, उपभोक्ता आयोग ने ब्याज समेत रिफंड का दिया आदेश

ट्रेन कैंसिल होने पर दूसरी टिकट लेने वाले यात्री के ₹2,110 काटे गए। उपभोक्ता आयोग ने रेलवे-IRCTC को 7% ब्याज और ₹20 हजार क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया।

भोपाल के यात्री को ट्रेन कैंसिल होने का मैसेज मिलने के बाद दूसरी टिकट बुक करनी पड़ी। बाद में पहली ट्रेन बहाल होने पर रेलवे ने ₹2,110 काट लिए। उपभोक्ता आयोग ने ब्याज और क्षतिपूर्ति समेत राशि लौटाने का आदेश दिया।

भोपाल: ट्रेन कैंसिल होने की सूचना मिलने के बाद वैकल्पिक टिकट लेना एक यात्री को भारी पड़ा, लेकिन अब उपभोक्ता आयोग ने रेलवे की रिफंड प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। भोपाल जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने रेलवे और IRCTC को यात्री की काटी गई ₹2,110 राशि 7% ब्याज के साथ लौटाने का आदेश दिया है। आयोग ने ₹15 हजार क्षतिपूर्ति और ₹5 हजार वाद-व्यय भी देने को कहा है।

कैंसिलेशन का मैसेज मिला तो बुक कर ली दूसरी ट्रेन

मामला भोपाल के यात्री भवानी शंकर उर्फ बीएस ठाकुर से जुड़ा है। वह परिवार के साथ आगरा गए थे और भोपाल लौटने के लिए उन्होंने 24 सितंबर 2023 की निजामुद्दीन-रानी कमलापति शान-ए-भोपाल सुपरफास्ट एक्सप्रेस में कन्फर्म टिकट बुक कराया था। इस टिकट की कुल कीमत ₹4,160 थी।

ट्रेन कैंसिल होने पर दोबारा टिकट लेना पड़ा, रेलवे ने काटे ₹2,110, उपभोक्ता आयोग ने ब्याज समेत रिफंड का दिया आदेश

यात्रा से पहले 9 सितंबर को उन्हें रेलवे की ओर से ट्रेन कैंसिल होने का मैसेज मिला। परिवार के साथ वापस लौटना जरूरी था, इसलिए उन्होंने रेलवे की ओर से किसी अन्य व्यवस्था का इंतजार नहीं किया। अगले ही दिन 10 सितंबर को परिवार के सदस्यों के लिए केरला एक्सप्रेस में नई टिकट बुक कर ली।

यात्री को उम्मीद थी कि रेलवे की ओर से ट्रेन रद्द किए जाने के कारण पहली टिकट की पूरी राशि वापस मिल जाएगी। लेकिन बाद में इस मामले में रिफंड को लेकर विवाद खड़ा हो गया।

बाद में ट्रेन बहाल हुई, लेकिन यात्री को नहीं मिली जानकारी

मामले के अनुसार 11 सितंबर 2023 को रेलवे ने पहली ट्रेन का संचालन दोबारा बहाल कर दिया। यात्री की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता ललित कुमार गुप्ता के मुताबिक, यात्री को ट्रेन कैंसिल होने की जानकारी तो मिली थी, लेकिन ट्रेन दोबारा चलाए जाने की सूचना नहीं दी गई।

उस समय तक यात्री वैकल्पिक यात्रा के लिए दूसरी ट्रेन का टिकट बुक कर चुका था। उसके पास रेलवे की ओर से ट्रेन कैंसिल होने का संदेश था और उसी के आधार पर उसने अपनी यात्रा की व्यवस्था की थी।

पहली टिकट का पूरा रिफंड नहीं मिलने पर यात्री ने DRM कार्यालय और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की। काफी समय बाद उसे ₹4,160 में से केवल ₹2,050 वापस किए गए। इस तरह ₹2,110 की राशि काट ली गई।

रेलवे ने कहा- ट्रेन दोबारा चल रही थी, इसलिए काटा चार्ज

रिफंड में कटौती को लेकर रेलवे की ओर से तर्क दिया गया कि बाद में ट्रेन का संचालन बहाल हो चुका था। यात्री ने इसके बाद टिकट कैंसिल कराया, इसलिए रेलवे के नियमों के अनुसार कैंसिलेशन चार्ज काटकर बाकी राशि लौटाई गई।

IRCTC की ओर से भी ऑनलाइन टिकट बुकिंग और कैंसिलेशन की प्रक्रिया अपने प्लेटफॉर्म के जरिए होने की बात कही गई। रिफंड के लिए TDR प्रक्रिया का भी उल्लेख किया गया।

हालांकि, उपभोक्ता आयोग ने पूरे घटनाक्रम को अलग नजरिए से देखा। आयोग ने माना कि यात्री ने अपनी इच्छा से पहली ट्रेन कैंसिल नहीं की थी। उसने रेलवे की ओर से ट्रेन निरस्त होने की सूचना मिलने के बाद मजबूरी में वैकल्पिक ट्रेन का टिकट कराया था।

आयोग ने माना- यात्री की गलती नहीं थी

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग, भोपाल बेंच-2 ने 6 अगस्त 2026 को मामले में फैसला सुनाया। आयोग ने माना कि यात्री को रेलवे की ओर से ट्रेन कैंसिल होने की जानकारी दी गई थी और उसने उसी सूचना के आधार पर दूसरी ट्रेन का टिकट कराया था।

आयोग के अनुसार, बाद में पहली ट्रेन के संचालन को बहाल करने का हवाला देकर टिकट की राशि में कटौती करना और पूरी रकम वापस नहीं करना सेवा में कमी के दायरे में आता है। इसी आधार पर रेलवे और IRCTC को यात्री को शेष राशि लौटाने का आदेश दिया गया।

फैसले के मुताबिक, ₹2,110 की शेष टिकट राशि 7% सालाना ब्याज के साथ लौटानी होगी। इसके अलावा यात्री को मानसिक, शारीरिक और आर्थिक क्षति के लिए ₹15 हजार और मुकदमे के खर्च के रूप में ₹5 हजार देने होंगे। यदि निर्धारित दो महीने की अवधि में भुगतान नहीं किया जाता है तो देय राशि पर 9% सालाना ब्याज देना होगा।

‘कैंसिल’ के बाद ‘रीस्टोर’ होने पर नियम का सवाल

यात्री की ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ता ललित कुमार गुप्ता ने कहा कि मामला केवल ₹2,110 के रिफंड तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक, यह रेलवे की कैंसिलेशन प्रक्रिया में मौजूद एक महत्वपूर्ण अस्पष्टता को सामने लाता है।

उनका कहना है कि रेलवे ने पहले ट्रेन कैंसिल होने की सूचना दी और यात्री ने उसी आधार पर दूसरी ट्रेन का टिकट बुक कर लिया। इसके बाद पहली ट्रेन को बहाल किया गया, लेकिन यात्री को इसकी प्रभावी जानकारी नहीं मिली। ऐसे में उसके पास दो टिकट हो गए और बाद में रिफंड के समय कैंसिलेशन चार्ज काट लिया गया।

गुप्ता के मुताबिक, रेलवे की नीति में ट्रेन कैंसिल होने की स्थिति को लेकर नियम स्पष्ट हैं, लेकिन कैंसिलेशन के बाद उसी ट्रेन को दोबारा बहाल करने की स्थिति में यात्री के अधिकार और रिफंड प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता नहीं है।

17 मार्च 2024 को उपभोक्ता आयोग पहुंचा मामला

लगातार शिकायतों के बावजूद समाधान नहीं मिलने के बाद बीएस ठाकुर ने 17 मार्च 2024 को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग, भोपाल बेंच-2 में प्रकरण क्रमांक 147/2024 दर्ज कराया।

सुनवाई के बाद आयोग ने रेलवे और IRCTC को सेवा में कमी के लिए जिम्मेदार माना। 6 अगस्त 2026 के फैसले में दोनों को अलग-अलग या संयुक्त रूप से ₹2,110 की शेष टिकट राशि, 7% ब्याज, ₹15 हजार क्षतिपूर्ति और ₹5 हजार वाद-व्यय का भुगतान करने का आदेश दिया गया।

यह फैसला उन यात्रियों के लिए भी महत्वपूर्ण है जिन्हें ट्रेन कैंसिल होने का संदेश मिलने के बाद वैकल्पिक यात्रा की व्यवस्था करनी पड़ती है। खास तौर पर ट्रेन बाद में बहाल होने की स्थिति में टिकट और रिफंड से जुड़े नियमों की स्पष्ट जानकारी यात्री के लिए बेहद जरूरी हो जाती है।

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