त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने कहा कि तकनीकी दिक्कतों के बावजूद सरकारी भर्ती प्रक्रिया जारी रहेगी और उपलब्ध पद भरे जाएंगे। उन्होंने आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में मनमानी बढ़ोतरी रोकने के लिए व्यापारियों और अधिकारियों के साथ समन्वय बढ़ाने की बात कही।
अगरतला: त्रिपुरा के मुख्यमंत्री प्रो. डॉ. माणिक साहा ने रविवार को कहा कि राज्य में सरकारी भर्ती प्रक्रिया किसी भी स्थिति में नहीं रुकेगी। उन्होंने कहा कि तकनीकी दिक्कतें कभी-कभी सामने आ सकती हैं, लेकिन उपलब्ध रिक्त पदों को भरने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में अनुचित बढ़ोतरी रोकने के लिए भी अधिकारियों को बाजार पर निगरानी रखने और व्यापारियों से संवाद करने के निर्देश दिए हैं।
भर्ती प्रक्रिया में तकनीकी अड़चन बनी तो भी नियुक्तियां नहीं रुकेंगी
मुख्यमंत्री माणिक साहा ने पत्रकारों से बातचीत में राज्य में चल रही भर्ती प्रक्रिया को लेकर सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि रोजगार उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है और किसी भी तकनीकी समस्या को नियुक्तियों के रास्ते में स्थायी बाधा नहीं बनने दिया जाएगा।
साहा ने हाल में चयनित ड्राइवरों का उदाहरण देते हुए बताया कि आवश्यक परीक्षाएं पूरी करने के बाद करीब 16 उम्मीदवारों को नियुक्ति की पेशकश की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि जिन विभागों में भर्ती प्रक्रिया लंबित है, वहां उपलब्ध पदों को जल्द भरने की कोशिश की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से जेल विभाग में खाली पदों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि विभाग में जितने पद उपलब्ध हैं, उन्हें भरने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। उनके मुताबिक किसी तकनीकी समस्या के कारण प्रक्रिया में अस्थायी देरी हो सकती है, लेकिन सरकार नियुक्तियों को पूरा करने के लिए हर संभव कदम उठाएगी।
सरकार का फोकस रोजगार के अवसर बढ़ाने पर
त्रिपुरा में सरकारी नौकरियों और खाली पदों को लेकर युवाओं की अपेक्षाओं के बीच मुख्यमंत्री का बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य सरकार का कहना है कि विभिन्न विभागों में उपलब्ध रिक्तियों को भरने से सरकारी सेवाओं की क्षमता बढ़ेगी और युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
साहा ने साफ किया कि भर्ती को लेकर सरकार के सामने कोई नीतिगत रुकावट नहीं है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि तकनीकी परेशानियों को दूर करते हुए नियुक्तियों की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब पूर्वोत्तर राज्यों में सरकारी रोजगार और प्रशासनिक सेवाओं को मजबूत करने की जरूरत पर लगातार चर्चा होती रही है। त्रिपुरा सरकार के लिए लंबित नियुक्तियों को पूरा करना प्रशासनिक व्यवस्था के साथ-साथ युवाओं के रोजगार से भी जुड़ा अहम मुद्दा है।
आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर सरकार की नजर
मुख्यमंत्री माणिक साहा ने महंगाई और जरूरी सामान की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर भी सरकार की कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उन्होंने खाद्य मंत्री से इस विषय पर बातचीत की है और बाजार में कीमतों की स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं।
साहा के मुताबिक सरकार व्यापारियों और बाजार से जुड़े अन्य पक्षों के साथ बातचीत कर रही है, ताकि आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में मनमानी बढ़ोतरी को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि लोगों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ नहीं पड़ना चाहिए।
राज्य सरकार की कोशिश है कि बाजार में मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बना रहे तथा किसी भी स्तर पर जमाखोरी या अनुचित मूल्य वृद्धि की स्थिति पैदा न हो। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि इस मामले में संबंधित विभाग बाजार की स्थिति पर लगातार नजर रखेंगे।
व्यापारियों के साथ संवाद पर जोर
साहा ने कहा कि खाद्य मंत्री ने बाजार से जुड़े लोगों को बुलाकर आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित रखने की दिशा में बातचीत की है। सरकार का मानना है कि बाजार व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के लिए प्रशासन और व्यापारियों के बीच नियमित संवाद जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आवश्यक वस्तुओं की कीमतें ऐसी नहीं बढ़नी चाहिए, जिससे आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़े। सरकार इस मुद्दे पर संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रही है।
महंगाई का असर खासतौर पर मध्यम और निम्न आय वाले परिवारों पर पड़ता है। ऐसे में खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की जरूरत की चीजों की कीमतों पर नियंत्रण राज्य सरकार के लिए अहम चुनौती है।
पूर्वोत्तर राज्यों की आर्थिक चुनौतियों का भी उठा मुद्दा
मुख्यमंत्री ने बातचीत के दौरान पूर्वोत्तर राज्यों की वित्तीय चुनौतियों और केंद्र से अधिक आर्थिक सहयोग की जरूरत का भी उल्लेख किया। उन्होंने अपने शिलॉन्ग दौरे को याद करते हुए बताया कि वहां केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की मौजूदगी में पूर्वोत्तर राज्यों से जुड़े वित्तीय मुद्दों पर चर्चा हुई थी।
साहा ने कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों ने अपनी वित्तीय स्थिति और संसाधनों से जुड़ी समस्याओं को केंद्र के सामने रखा है। उन्होंने लगभग 4,000 करोड़ रुपये के वित्तीय बोझ से जुड़े एक महत्वपूर्ण मुद्दे का भी उल्लेख किया और उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार इस संबंध में राज्यों की चिंताओं पर विचार करेगी।
मुख्यमंत्री के मुताबिक पूर्वोत्तर राज्यों की भौगोलिक परिस्थितियां और विकास संबंधी आवश्यकताएं देश के दूसरे हिस्सों से अलग हैं। ऐसे में बुनियादी ढांचे और विकास परियोजनाओं के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता महत्वपूर्ण है।
पहाड़ी क्षेत्रों से जुड़ी परियोजनाओं के लिए फंड का जिक्र
साहा ने यह भी बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों और कुछ स्टेशनों से संबंधित परियोजनाओं के लिए धन उपलब्ध कराया गया है। हालांकि उन्होंने संकेत दिया कि मौजूदा आवंटन जरूरतों के मुकाबले पर्याप्त नहीं हो सकता है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इन मुद्दों को केंद्र के समक्ष लगातार उठाती रहेगी। त्रिपुरा की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए पहाड़ी और दूरदराज के क्षेत्रों में विकास परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत पड़ती है।
मुख्यमंत्री ने इस संदर्भ में बातचीत के दौरान 'प्राउड ऑफ हिल' नाम से जुड़े एक प्रोजेक्ट का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विकास से संबंधित मामलों में केंद्र के साथ समन्वय जारी रखेगी।
रोजगार, महंगाई और विकास पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री माणिक साहा के रविवार के बयान में त्रिपुरा सरकार की तीन प्रमुख प्राथमिकताएं सामने आईं—सरकारी भर्तियों को आगे बढ़ाना, आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण रखना और विकास परियोजनाओं के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन हासिल करना।
भर्ती के मुद्दे पर सरकार ने स्पष्ट किया है कि तकनीकी समस्याएं नियुक्तियों को स्थायी रूप से प्रभावित नहीं करेंगी। जेल विभाग समेत अन्य विभागों में खाली पदों को भरने की प्रक्रिया जारी रखने का भरोसा दिया गया है।
वहीं, महंगाई के मोर्चे पर सरकार बाजार में व्यापारियों के साथ संवाद और निगरानी के जरिए कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश कर रही है। मुख्यमंत्री ने केंद्र से वित्तीय सहयोग की उम्मीद जताते हुए पूर्वोत्तर राज्यों की विशेष जरूरतों को भी रेखांकित किया।
त्रिपुरा सरकार के सामने आने वाले समय में लंबित भर्तियों को पूरा करने, बाजार में आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित रखने और विकास परियोजनाओं के लिए पर्याप्त धन जुटाने की चुनौती रहेगी। मुख्यमंत्री के ताजा बयान से संकेत मिलता है कि इन तीनों क्षेत्रों को सरकार अपनी प्राथमिकताओं में बनाए रखेगी।








