त्रिपुरा सरकार ने सभी सरकारी कार्यालयों में पांच दिन का कार्य सप्ताह लागू कर दिया है। अब शनिवार और रविवार अवकाश रहेगा। साथ ही Group C और D कर्मचारियों के लिए लागू वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था भी समाप्त कर दी गई है।
अगरतला: पूर्वोत्तर भारत के Tripura में सरकारी कर्मचारियों के लिए कार्य व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। राज्य मंत्रिमंडल ने सोमवार को सभी सरकारी कार्यालयों में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने का फैसला लिया। इस निर्णय के साथ ही सरकार ने पहले से लागू वर्क-फ्रॉम-होम व्यवस्था को भी समाप्त कर दिया है।
अब राज्य के सभी सरकारी कार्यालय शनिवार और रविवार को बंद रहेंगे। सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था का उद्देश्य प्रशासनिक कार्यों को अधिक व्यवस्थित बनाना, कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ाना और ईंधन की खपत को नियंत्रित करना है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संरक्षण और सरकारी खर्चों में कटौती को लेकर कई सरकारें नई नीतियां अपना रही हैं।
नई समय-सारणी तत्काल प्रभाव से लागू
राज्य सरकार के अनुसार नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। अब सरकारी कार्यालयों का समय सुबह 9:30 बजे से शाम 6 बजे तक रहेगा।
इससे पहले त्रिपुरा में सरकारी कार्यालय सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक खुलते थे और केवल दूसरे तथा चौथे शनिवार को अवकाश रहता था।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद कर्मचारियों को लगातार दो दिन का साप्ताहिक अवकाश मिलेगा, जबकि कार्य दिवसों में कार्यालय समय बढ़ा दिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कर्मचारियों को बेहतर कार्य-जीवन संतुलन मिल सकता है और प्रशासनिक कार्यों में अधिक निरंतरता आएगी।
वर्क फ्रॉम होम नीति समाप्त
राज्य सरकार ने कोविड काल और बाद में ईंधन बचत के उद्देश्य से लागू की गई वर्क-फ्रॉम-होम व्यवस्था को भी समाप्त कर दिया है।
पहले लागू नीति के तहत ग्रुप सी और ग्रुप डी श्रेणी के 50 प्रतिशत कर्मचारी रोटेशन के आधार पर घर से काम करते थे, जबकि बाकी कर्मचारी कार्यालय आते थे।

त्रिपुरा सरकार के मंत्री Sushanta Chowdhury ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि सरकार ने पूरी व्यवस्था की समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया कि अब सभी कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति कार्यालयों में सुनिश्चित की जाएगी।
सरकार का मानना है कि सामान्य प्रशासनिक स्थिति बहाल होने के बाद कार्यालयों में प्रत्यक्ष कार्य प्रणाली अधिक प्रभावी साबित होगी।
ईंधन संरक्षण को लेकर सरकार गंभीर
त्रिपुरा सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि नई कार्य व्यवस्था केवल प्रशासनिक सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध ईंधन संरक्षण और सरकारी खर्चों में कटौती से भी जुड़ा हुआ है।
सरकार ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता को देखते हुए सरकारी विभागों को ईंधन उपयोग कम करने के निर्देश दिए हैं।
मंत्री सुषांत चौधरी ने कहा कि सरकार ने ऊर्जा बचत को लेकर कई नए कदम उठाने का फैसला किया है ताकि सरकारी खर्चों को नियंत्रित किया जा सके।
अधिकांश सरकारी बैठकें होंगी हाइब्रिड मोड में
नई नीति के तहत राज्य सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि लगभग 75 प्रतिशत सरकारी बैठकें अब हाइब्रिड मोड में आयोजित की जाएंगी।
हाइब्रिड मोड का मतलब है कि कुछ अधिकारी बैठक में शारीरिक रूप से मौजूद रहेंगे, जबकि अन्य अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ सकेंगे।
सरकार का कहना है कि इससे यात्रा की आवश्यकता कम होगी और ईंधन की बचत होगी। साथ ही समय और संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा।
डिजिटल प्रशासन की दिशा में यह कदम राज्य के सरकारी तंत्र को अधिक आधुनिक बनाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।
विभागाध्यक्षों को खर्च कम करने के निर्देश
कैबिनेट बैठक में सभी विभागाध्यक्षों को अपने-अपने विभागों में ईंधन खर्च कम करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
सरकार चाहती है कि अनावश्यक वाहन उपयोग को सीमित किया जाए और सरकारी संसाधनों का अधिक जिम्मेदारी के साथ इस्तेमाल हो।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के कई राज्यों में सरकारी वाहनों और यात्रा खर्चों को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में त्रिपुरा सरकार का यह कदम प्रशासनिक खर्चों को नियंत्रित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इलेक्ट्रिक वाहनों की हायरिंग को नहीं मिलेगा बढ़ावा
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि आधिकारिक उपयोग के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों की हायरिंग को प्रोत्साहित नहीं किया जाएगा।
हालांकि सरकार ने इसके पीछे विस्तृत कारण नहीं बताए, लेकिन माना जा रहा है कि राज्य में आवश्यक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और परिचालन लागत से जुड़े मुद्दों के कारण यह फैसला लिया गया हो सकता है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि पूर्वोत्तर राज्यों में इलेक्ट्रिक वाहन ढांचे का विकास अभी शुरुआती चरण में है, जिसके कारण कई सरकारी विभाग पारंपरिक वाहनों पर निर्भर हैं।
कर्मचारियों और प्रशासन पर क्या होगा असर
नई कार्य व्यवस्था का प्रभाव लाखों सरकारी कर्मचारियों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर पड़ सकता है।
कई कर्मचारी संगठनों का मानना है कि पांच दिवसीय कार्य सप्ताह कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन के लिए बेहतर साबित हो सकता है।
हालांकि कुछ कर्मचारियों ने कार्यालय समय बढ़ने को लेकर चिंता भी जताई है। सुबह 9:30 बजे से शाम 6 बजे तक काम करने से यात्रा और निजी समय पर असर पड़ सकता है।
दूसरी ओर प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार पांच दिन केंद्रित कार्य प्रणाली सरकारी कामकाज को अधिक प्रभावी बना सकती है।
भारत के अन्य राज्यों के लिए भी बन सकता है मॉडल
त्रिपुरा का यह फैसला अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकता है। भारत में कई राज्य पहले से पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू कर चुके हैं, जबकि कुछ राज्यों में अभी भी छह दिन का कार्य ढांचा लागू है।
डिजिटल तकनीक और हाइब्रिड कार्य प्रणाली के बढ़ते उपयोग के बीच प्रशासनिक सुधारों को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में अधिक राज्य कार्यकुशलता और खर्च नियंत्रण को ध्यान में रखते हुए ऐसी नीतियां अपना सकते हैं।










