ट्रंप प्रशासन ने नया आदेश जारी कर Fact-Checking, Content Moderation, Trust & Safety और Compliance से जुड़े प्रोफेशनल्स को वीज़ा देने पर रोक लगा दी है। यह बदलाव H-1B सहित कई वीज़ा कैटेगरी को प्रभावित करेगा और भारतीय टेक वर्कर्स की चिंता बढ़ा रहा है।
H-1B Rule: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump की नीतियों में बदलाव का असर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय पेशेवरों पर दिखाई दे रहा है। पुतिन की भारत यात्रा के तुरंत बाद ट्रंप प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लेते हुए अमेरिकी दूतावास को निर्देश भेजा है कि वे फैक्ट-चेकिंग, कंटेंट मॉडरेशन, ट्रस्ट एंड सेफ्टी और कंप्लायंस से जुड़े काम करने वाले लोगों को वीज़ा न दें।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार यह नया आदेश खासतौर पर टेक्नोलॉजी सेक्टर में काम करने वाले विदेशी वर्कर्स, विशेषकर भारतीय आवेदकों को सीधा प्रभावित करेगा। इस फैसले को ट्रंप प्रशासन Free Speech की रक्षा बताकर पेश कर रहा है, लेकिन इससे हजारों प्रोफेशनल्स के वीज़ा आवेदन पर अनिश्चिता बढ़ गई है।
फैक्ट-चेकिंग और कंटेंट मॉडरेशन करने वालों पर रोक
विदेश विभाग के एक मेमो के आधार पर यह स्पष्ट किया गया है कि जो भी प्रोफेशनल फैक्ट-चेकिंग, कंटेंट मॉडरेशन, कंप्लायंस या ऑनलाइन सेफ्टी से जुड़ी भूमिकाओं में शामिल रहे हैं, वे अब अमेरिकी वीज़ा पाने के लिए योग्य नहीं माने जाएंगे।
रिपोर्ट्स के मुताबिक कांसुलर अधिकारियों को साफ निर्देश दिया गया है कि वे ऐसे किसी भी आवेदक को वीज़ा जारी न करें जिसे सोशल मीडिया पर सेंसरशिप को लागू करने या उसका समर्थन करने वाला समझा जाए। यह पॉलिसी केवल टेक्नोलॉजी सेक्टर ही नहीं बल्कि मीडिया, डिजिटल सेफ्टी और मॉडरेशन उद्योग में काम करने वाले हजारों लोगों को प्रभावित कर सकती है।
भारतीय आवेदकों के लिए बढ़ी चिंता
![]()
भारत उन देशों में से है जहां से टेक इंडस्ट्री के लिए सबसे अधिक पेशेवर H-1B वीज़ा के लिए आवेदन करते हैं। अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियों में काम करने का सपना देखने वाले कई भारतीय अब इस नए नियम से प्रभावित हो सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि कई भारतीय पेशेवर Content Moderation, Trust & Safety, Policy Compliance और Misinformation Management जैसी भूमिकाओं में काम करते हैं, जिन पर अब सीधा प्रतिबंध लग सकता है।
H-1B वीज़ा पर खास फोकस
भले ही यह निर्देश सभी तरह के वीज़ा कैटेगरी पर लागू होता है, लेकिन मेमो का मुख्य फोकस H-1B वीज़ा पर है। H-1B वीज़ा आमतौर पर highly skilled foreign workers को दिया जाता है, विशेषकर IT और टेक सेक्टर में। इस वीज़ा के लिए हर साल बड़ी संख्या में भारतीय आवेदन करते हैं। नए नियम के बाद जिन लोगों की प्रोफेशनल हिस्ट्री में Content Moderation या Trust & Safety से जुड़े रोल दिखाई देंगे, उनके आवेदन रद्द होने की संभावना बढ़ सकती है। इसका सीधा असर उन उम्मीदवारों पर पड़ेगा जो Google, Meta, Twitter, LinkedIn जैसी कंपनियों में इन भूमिकाओं में काम कर चुके हैं या कर रहे हैं।
सोशल मीडिया और प्रोफेशनल हिस्ट्री की जांच
नए नियम के तहत वीज़ा ऑफिसर आवेदकों की Professional History, LinkedIn Profile और Social Media Accounts की जांच करेंगे। यदि किसी पद पर उन्होंने misinformation control, harmful content removal, user safety, policy compliance या moderation से जुड़े काम किए हैं तो उनके वीज़ा को अस्वीकार किया जा सकता है।
यह बात भी नोट की गई है कि यह पॉलिसी उन प्रोफेशनल्स को भी प्रभावित कर रही है जो ऑनलाइन चाइल्ड सेक्सुअल अब्यूज मटेरियल, हेट स्पीच, यहूदी विरोधी कंटेंट या अन्य हानिकारक कंटेंट से निपटने का काम करते हैं। यानी कि न केवल राजनीतिक फैक्ट-चेकिंग बल्कि किसी भी तरह की डिजिटल सेफ्टी से संबंधित भूमिका इस नए नियम के दायरे में आ सकती है।
फ्री स्पीच के नाम पर ट्रंप प्रशासन का तर्क
ट्रंप प्रशासन इसे Free Speech की रक्षा के लिए उठाया गया कदम बता रहा है। ट्रंप ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर सेंसरशिप के मुद्दे को गंभीरता से देखने की जरूरत है। 6 जनवरी 2021 के कैपिटल दंगे के बाद जब उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स पर बैन लगाया गया था, उसी घटना का हवाला देते हुए प्रशासन ने कहा कि प्लेटफॉर्म्स पर होने वाली सेंसरशिप गलत है और इससे जनता की आवाज दबती है।








