ट्रंप प्रशासन ने विदेश नीति में बड़ा कदम उठाते हुए 29 देशों से अमेरिकी राजदूतों को वापस बुलाया। यह कदम 'अमेरिका फर्स्ट' प्राथमिकताओं के अनुरूप है। प्रभावित देशों में अफ्रीका, एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व शामिल हैं।
World News: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विदेश नीति में बड़ा कदम उठाते हुए 29 देशों से अपने राजदूतों को वापस बुला लिया है। ये राजदूत बाइडन प्रशासन के दौरान नियुक्त किए गए थे और अब ट्रंप प्रशासन ने उन्हें जनवरी में पद से हटाने का फैसला किया है। प्रशासन का कहना है कि यह कदम अमेरिका की विदेश नीति को फिर से ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' प्राथमिकताओं के अनुसार ढालने के लिए उठाया गया है। प्रभावित देशों में अफ्रीका, एशिया, यूरोप, मध्य पूर्व और पश्चिमी गोलार्ध के देश शामिल हैं।
राजदूतों की नियुक्ति
विदेश विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कम से कम 29 देशों में तैनात अमेरिकी राजदूतों को पिछले सप्ताह नोटिस भेजा गया कि उनकी सेवाएं जनवरी में समाप्त होंगी। यह नोटिस बुधवार से वाशिंगटन के अधिकारियों के जरिए भेजना शुरू किया गया। अमेरिकी राजदूत राष्ट्रपति की इच्छा के अनुसार कार्य करते हैं और आमतौर पर तीन से चार साल तक अपने पद पर बने रहते हैं।
इन राजदूतों की ज्वाइनिंग बाइडन के कार्यकाल के दौरान हुई थी। हालांकि, वापस बुलाए जाने के बाद भी इन राजदूतों की विदेश सेवा की नौकरियां समाप्त नहीं होंगी। वे चाहें तो वाशिंगटन लौटकर अन्य कार्यभार संभाल सकते हैं या अन्य पदों पर तैनात हो सकते हैं।

ट्रंप प्रशासन का उद्देश्य
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि विदेश नीति को अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार ढालने के लिए यह जरूरी है कि राजदूत और अन्य वरिष्ठ दूतावास कर्मी पूरी तरह से 'अमेरिका फर्स्ट' नीति का समर्थन करें। प्रशासन का मानना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका की नीतियों में स्पष्टता और सामंजस्य बना रहेगा। इस कदम से यह संकेत मिलता है कि ट्रंप विदेश नीति में सक्रिय बदलाव लाना चाहते हैं।
कौन-कौन से देश होंगे प्रभावित
अफ्रीका के सबसे अधिक 13 देशों में अमेरिकी राजदूतों को वापस बुलाया जा रहा है। इसमें बुरुंडी, कैमरून, केप वर्डे, गैबॉन, आइवरी कोस्ट, मेडागास्कर, मॉरीशस, नाइजर, नाइजीरिया, रवांडा, सेनेगल, सोमालिया और युगांडा शामिल हैं।
एशिया में छह देशों- फिजी, लाओस, मार्शल आइलैंड्स, पापुआ न्यू गिनी, फिलीपींस और वियतनाम में तैनात राजदूतों की नियुक्ति बदल दी गई है। यूरोप में आर्मेनिया, नॉर्थ मैसेडोनिया, मोंटेनेग्रो और स्लोवाकिया के राजदूत भी सूची में शामिल हैं।
मध्य पूर्व के देशों में अल्जीरिया और मिस्र के राजदूत, दक्षिण और मध्य एशिया में नेपाल और श्रीलंका के राजदूत, और पश्चिमी गोलार्ध में ग्वाटेमाला और सूरीनाम के राजदूतों को भी वापस बुलाया जा रहा है। विदेश विभाग ने कुल प्रभावित राजनयिकों की संख्या और पूरी सूची नहीं बताई है और इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताया है।









