UAE के फुजैराह ऑयल पोर्ट पर हुए हमले में 3 भारतीय घायल हो गए। भारत ने घटना पर कड़ी नाराजगी जताते हुए हिंसा रोकने और कूटनीति के जरिए समाधान निकालने की अपील की। PM मोदी ने नागरिकों और जरूरी ढांचे पर हमलों को अस्वीकार्य बताया।
ईरान/अमेरिका/यूएई: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के फुजैराह ऑयल पोर्ट पर हुए हमले के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और गहरा गया है। इस हमले में तीन भारतीय नागरिकों के घायल होने के बाद भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। नई दिल्ली ने साफ शब्दों में कहा है कि आम नागरिकों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना स्वीकार नहीं किया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी घटना पर चिंता जताते हुए कहा कि निर्दोष लोगों पर हमले किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराए जा सकते। भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने की अपील की है।
फुजैराह ऑयल पोर्ट पर हमला, कई मिसाइल और ड्रोन दागे गए
UAE सरकार के अनुसार, फुजैराह स्थित पेट्रोलियम और ऑयल टर्मिनल क्षेत्र को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए। अधिकारियों का दावा है कि हमले के दौरान 12 बैलिस्टिक मिसाइल, 3 क्रूज मिसाइल और 4 ड्रोन को इंटरसेप्ट किया गया।
हालांकि कुछ ड्रोन और हमलावर उपकरण इंडस्ट्रियल क्षेत्र तक पहुंचने में सफल रहे, जिसके कारण आग लग गई और कई कर्मचारी घायल हो गए। इन्हीं घायलों में तीन भारतीय नागरिक भी शामिल हैं।
हमले के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और कई तेल प्रतिष्ठानों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
भारत ने कहा- नागरिकों को निशाना बनाना अस्वीकार्य
भारत सरकार ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव से आम लोगों की जिंदगी खतरे में पड़ रही है।
भारत ने सभी देशों और पक्षों से तुरंत हिंसा रोकने, तनाव कम करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने का आग्रह किया। भारतीय पक्ष ने यह भी दोहराया कि पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है।

पीएम मोदी ने जताई चिंता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि महत्वपूर्ण नागरिक ढांचे और निर्दोष लोगों को निशाना बनाना गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि भारत क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और सुरक्षित समुद्री मार्गों के पक्ष में खड़ा है। पीएम मोदी ने घायल भारतीयों के जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की।
होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ा संकट
इस हमले के बाद दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक लाइनों में से एक होर्मुज स्ट्रेट फिर से वैश्विक चिंता का केंद्र बन गया है।
होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया के बड़े हिस्से में तेल और गैस की सप्लाई होती है। भारत सहित एशिया के कई देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस मार्ग पर निर्भर हैं।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की निर्बाध आवाजाही बनाए रखने पर जोर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस समुद्री मार्ग में बाधा आती है तो वैश्विक तेल कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है।
अमेरिका ने शुरू किया ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’
बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने “प्रोजेक्ट फ्रीडम” नामक सैन्य और सुरक्षा पहल शुरू की है। इसका उद्देश्य होर्मुज क्षेत्र में फंसे विदेशी जहाजों को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराना बताया जा रहा है।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह अभियान समुद्री व्यापार को सुरक्षित रखने और जहाजों को हमलों से बचाने के लिए शुरू किया गया है।
हालांकि ईरान ने इस पहल की आलोचना करते हुए इसे उकसावे वाली कार्रवाई बताया है।
ईरान ने अमेरिका पर लगाए आरोप
ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद गालीबाफ ने अमेरिका पर क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी कदमों के कारण होर्मुज क्षेत्र में हालात और बिगड़ रहे हैं।
ईरानी नेताओं का कहना है कि अमेरिका की सैन्य मौजूदगी क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बन रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दबाव बढ़ा तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
हालांकि UAE पर हुए हमले को लेकर ईरान ने सीधे तौर पर कोई जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की है।
दक्षिण कोरियाई जहाज पर हमले का दावा
इसी बीच होर्मुज स्ट्रेट में दक्षिण कोरिया के एक जहाज पर भी हमले की खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, जहाज में आग लग गई, हालांकि किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि इस घटना के पीछे ईरान समर्थित तत्व हो सकते हैं। दक्षिण कोरिया ने भी क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति पर चिंता जताई है।
दक्षिण कोरिया कर सकता है अमेरिकी मिशन में शामिल होने पर विचार
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति कार्यालय ने संकेत दिए हैं कि वह “प्रोजेक्ट फ्रीडम” में शामिल होने की संभावना पर विचार कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि और देश इस मिशन में शामिल होते हैं, तो पश्चिम एशिया में सैन्य गतिविधियां और तेज हो सकती हैं।
भारतीयों की सुरक्षा पर फोकस
पश्चिम एशिया में लाखों भारतीय काम करते हैं और बड़ी संख्या में भारतीय जहाजरानी, ऊर्जा और निर्माण क्षेत्रों में कार्यरत हैं। ऐसे में क्षेत्रीय तनाव भारत के लिए मानवीय और आर्थिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।
भारत सरकार ने कहा है कि वह UAE और अन्य खाड़ी देशों के साथ लगातार संपर्क में है। जरूरत पड़ने पर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त कदम भी उठाए जा सकते हैं।
तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
विशेषज्ञों के अनुसार, फुजैराह हमला केवल एक सुरक्षा घटना नहीं है, बल्कि इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।
फुजैराह दुनिया के प्रमुख तेल निर्यात केंद्रों में शामिल है। यहां किसी भी प्रकार का व्यवधान अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों को प्रभावित कर सकता है। पहले ही वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
ऊर्जा विश्लेषकों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक जारी रहा, तो इसका असर वैश्विक व्यापार, शिपिंग और ईंधन कीमतों पर पड़ सकता है।
क्षेत्र में बढ़ रही सुरक्षा चिंता
हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में ड्रोन, मिसाइल और समुद्री हमलों की घटनाओं में वृद्धि हुई है। इससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ी है। संयुक्त राष्ट्र सहित कई वैश्विक संगठनों ने सभी पक्षों से संयम बरतने और संघर्ष से बचने की अपील की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान हालात में किसी भी बड़ी सैन्य कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है।
कूटनीति ही समाधान: भारत
भारत ने स्पष्ट किया है that संवाद और कूटनीति ही इस संकट का स्थायी समाधान हो सकते हैं। नई दिल्ली का कहना है कि हिंसा और जवाबी कार्रवाई से हालात और खराब होंगे।
भारत ने क्षेत्रीय शांति, सुरक्षित व्यापारिक मार्ग और नागरिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए सभी देशों से जिम्मेदारीपूर्ण रवैया अपनाने की अपील की है।









