उदयपुर में SIR के विरोध में कांग्रेस का मार्च, बैरिकेड पर चढ़े कार्यकर्ता

राजस्थान: उदयपुर में SIR के विरोध में कांग्रेस ने मार्च निकाला। कलेक्ट्रेट के बाहर बैरिकेड पर चढ़ने से पुलिस से धक्का-मुक्की हुई और कुछ बैरिकेड गिर गए।

उदयपुर में SIR के विरोध में कांग्रेस ने विरोध मार्च निकाला। कलेक्ट्रेट के बाहर कुछ कार्यकर्ता बैरिकेड पर चढ़ने लगे, जिसके बाद पुलिस से धक्का-मुक्की हुई और बैरिकेड गिर गए। पुलिस ने भीड़ को पीछे हटाया। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला जलाया।

उदयपुर: राजस्थान के उदयपुर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) के विरोध में गुरुवार को कांग्रेस ने विरोध मार्च निकाला। प्रदर्शन के दौरान कलेक्ट्रेट के बाहर उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब कुछ कांग्रेस कार्यकर्ता पुलिस बैरिकेड पर चढ़ने लगे। पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की हुई और कुछ बैरिकेड नीचे गिर गए।

स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को पीछे हटाने के लिए हल्का बल प्रयोग किया। अधिकारियों और पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को कलेक्ट्रेट परिसर की ओर बढ़ने से रोकने का प्रयास किया। मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया था।

प्रदर्शन का आयोजन इंडिया गठबंधन के आह्वान और राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर किया गया था। मार्च में कांग्रेस के स्थानीय पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, पार्षद और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने SIR को लेकर निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए नारेबाजी की।

कलेक्ट्रेट के बाहर बढ़ा तनाव

कांग्रेस का विरोध मार्च शहर के टाउन हॉल से शुरू हुआ। कार्यकर्ता बापू बाजार और दिल्ली गेट होते हुए कोर्ट चौराहे की ओर बढ़े। इसके बाद प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट के बाहर पहुंचे, जहां पुलिस ने बैरिकेड लगाकर उन्हें आगे जाने से रोक दिया।

प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ता बैरिकेड पर चढ़ने लगे। पुलिस ने उन्हें पीछे हटाने की कोशिश की। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बनी और कुछ बैरिकेड गिर गए।

बैरिकेड गिरने के बाद कुछ अन्य कार्यकर्ताओं के आगे बढ़ने की कोशिश करने पर पुलिस ने भीड़ को पीछे धकेला। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंचे।

पुलिस ने भीड़ को पीछे किया

घटना के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उमेश ओझा, डीएसपी राजेश यादव और तीन से अधिक थानों के थाना प्रभारी मौके पर मौजूद रहे। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को बैरिकेड के पीछे रखने और भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की।

स्थिति को नियंत्रित करने के दौरान पुलिस की ओर से हल्के बल प्रयोग की बात सामने आई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पुलिस का उद्देश्य प्रदर्शनकारियों को कलेक्ट्रेट की ओर आगे बढ़ने से रोकना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना था।

प्रदर्शन के दौरान किसी बड़े नुकसान या गंभीर चोट की आधिकारिक सूचना सामने नहीं आई है। हालांकि, धक्का-मुक्की और बैरिकेड गिरने के कारण कुछ समय के लिए प्रदर्शन स्थल पर तनाव का माहौल रहा।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त का पुतला जलाया

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला भी जलाया। कांग्रेस नेताओं ने SIR की प्रक्रिया के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की।

पुतला दहन के दौरान कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग के खिलाफ नारे लगाए। कांग्रेस का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया से मतदाताओं के अधिकारों और चुनावी व्यवस्था की निष्पक्षता को लेकर सवाल पैदा हो रहे हैं।

हालांकि, SIR को लेकर कांग्रेस की आपत्तियां राजनीतिक दल की स्थिति का हिस्सा हैं। निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया या उसके प्रभाव के संबंध में अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक नियमों, आंकड़ों और आयोग के स्पष्टीकरण के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।

टाउन हॉल से शुरू हुआ विरोध मार्च

कांग्रेस का मार्च उदयपुर के टाउन हॉल से शुरू हुआ। कार्यकर्ताओं ने शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए कलेक्ट्रेट की ओर रुख किया। मार्च के दौरान कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने SIR के खिलाफ नारे लगाए। बापू बाजार और दिल्ली गेट से गुजरते हुए प्रदर्शनकारी कोर्ट चौराहे पहुंचे और इसके बाद कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर प्रदर्शन किया।

शहर कांग्रेस अध्यक्ष फतहसिंह राठौड़ और उदयपुर देहात कांग्रेस के नेताओं के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में पार्टी के विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी शामिल हुए। कांग्रेस ने इस मार्च के जरिए चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर अपना राजनीतिक विरोध दर्ज कराया।

SIR को रद्द करने की मांग

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने SIR को तत्काल समाप्त करने की मांग की। उनका कहना था कि मतदाता सूची से जुड़े किसी भी पुनरीक्षण में मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। कांग्रेस नेताओं ने निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता बनाए रखने पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि चुनावी संस्थाओं में जनता का विश्वास लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।

पार्टी ने संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की रक्षा की मांग भी उठाई। हालांकि, SIR की प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस और निर्वाचन आयोग के बीच राजनीतिक मतभेद हैं। ऐसे में प्रदर्शन के दौरान लगाए गए आरोपों और मांगों को कांग्रेस के राजनीतिक रुख के रूप में देखा जाना चाहिए।

कांग्रेस नेताओं ने उठाया मतदाता अधिकारों का मुद्दा

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची में किसी भी बदलाव का सीधा असर नागरिकों के मतदान के अधिकार पर पड़ सकता है। इसलिए पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों की जांच, आपत्तियों की सुनवाई और नामों को लेकर पारदर्शी प्रक्रिया जरूरी है।

प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि यदि SIR के दौरान किसी मतदाता के नाम को लेकर सवाल उठता है तो उसे उचित प्रक्रिया के तहत अपनी बात रखने का अवसर दिया जाना चाहिए। कांग्रेस ने इसी आधार पर निर्वाचन आयोग से अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है।

बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता हुए शामिल

विरोध मार्च में उदयपुर देहात जिला कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी, ब्लॉक और मंडल अध्यक्ष, अग्रिम संगठनों के प्रतिनिधि, पार्षद, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए।

प्रदर्शनकारियों ने हाथों में पार्टी के झंडे और संदेशों के साथ SIR के खिलाफ नारे लगाए। उन्होंने मतदाता अधिकारों और लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा को लेकर अपनी मांगें सामने रखीं।

स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पार्टी इस मुद्दे को आगे भी उठाती रहेगी और SIR से जुड़े सवालों पर सरकार तथा निर्वाचन आयोग से जवाब मांगती रहेगी।

राजनीतिक विरोध का स्थानीय विस्तार

उदयपुर में हुआ यह प्रदर्शन SIR को लेकर कांग्रेस के व्यापक राजनीतिक अभियान का हिस्सा है। पार्टी देश के अलग-अलग हिस्सों में मतदाता सूची के पुनरीक्षण और निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रख रही है।

उदयपुर में विरोध मार्च के दौरान बैरिकेड पर चढ़ने और पुलिस के साथ धक्का-मुक्की के कारण प्रदर्शन का एक हिस्सा कानून-व्यवस्था से भी जुड़ गया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को कलेक्ट्रेट की ओर आगे बढ़ने से रोकते हुए स्थिति को नियंत्रित किया।

इस तरह की घटनाओं में प्रशासन के सामने एक ओर प्रदर्शन के अधिकार को बनाए रखने और दूसरी ओर सरकारी कार्यालयों की सुरक्षा तथा कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने की चुनौती होती है।

आगे भी जारी रह सकता है विरोध

कांग्रेस नेताओं ने संकेत दिया है कि SIR के खिलाफ उनका विरोध जारी रहेगा। पार्टी की मुख्य मांगों में SIR को वापस लेना, मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा और निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता सुनिश्चित करना शामिल है। अब इस मुद्दे पर निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। SIR की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों के बीच जारी बहस आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है।

उदयपुर की घटना में फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि प्रदर्शन के दौरान कुछ बैरिकेड गिरे और पुलिस ने भीड़ को पीछे हटाया। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई स्थिति के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस अधिकारियों को तैनात किया गया। मामले में किसी गंभीर जनहानि की सूचना सामने नहीं आई है।

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