ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम पहली बार संसद में देंगे जवाब, बढ़ती उधारी लागत ने बढ़ाई चिंता

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम पहली बार हाउस ऑफ कॉमन्स में सांसदों के सवालों का जवाब देंगे। इस बीच 10 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड 5.23% पहुंच गई है।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम पहली बार हाउस ऑफ कॉमन्स में सांसदों के सवालों का सामना करेंगे। उनकी सरकार के सामने सार्वजनिक सेवाओं पर नियंत्रण बढ़ाने और बढ़ती सरकारी उधारी लागत की चुनौती है। 10 साल की गिल्ट यील्ड 5.23% पहुंच गई है।

लंदन: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम मंगलवार को पहली बार हाउस ऑफ कॉमन्स में सांसदों के सवालों का सीधे सामना करेंगे। गर्मियों की संसदीय छुट्टी के बाद सांसदों की वापसी के साथ बर्नहम सरकार के लिए यह एक अहम राजनीतिक क्षण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री के रूप में शुरुआती दौर अपेक्षाकृत शांत रहने के बाद अब उनका संसद में पहला बड़ा सामना विपक्ष और अपनी ही पार्टी के सांसदों के सवालों से होगा।

बर्नहम अपने संबोधन में आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं पर जनता और सरकार का नियंत्रण बढ़ाने की योजना को प्रमुखता दे सकते हैं। सरकार का तर्क है कि महत्वपूर्ण सेवाओं को बेहतर तरीके से संचालित करने के लिए सार्वजनिक हित को प्राथमिकता देना जरूरी है। हालांकि, इसका अर्थ हर सेवा या कंपनी का सीधे सरकारी स्वामित्व में आना नहीं है।

सार्वजनिक सेवाओं पर नियंत्रण बढ़ाने की तैयारी

बर्नहम सरकार के एजेंडे में सार्वजनिक सेवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। उनके मॉडल का एक प्रमुख उदाहरण ग्रेटर मैनचेस्टर की बस व्यवस्था को माना जाता है, जहां सार्वजनिक प्राधिकरण ने बसों का पूरा संचालन अपने हाथ में नहीं लिया था। इसके बजाय समय-सारणी और किराए पर सार्वजनिक नियंत्रण रखा गया और निजी कंपनियों को निर्धारित शुल्क पर सेवाएं संचालित करने के लिए अनुबंध दिए गए।

इस व्यवस्था का उद्देश्य निजी कंपनियों को पूरी तरह हटाना नहीं, बल्कि सार्वजनिक हित के अनुरूप परिवहन व्यवस्था को संचालित करना था। सरकार इसी तरह के मॉडल को अन्य क्षेत्रों में भी लागू करने की संभावनाओं पर विचार कर सकती है।

हालांकि रेल क्षेत्र में स्थिति अलग है। सरकार पहले से ही उन रेल फ्रेंचाइजी को सार्वजनिक स्वामित्व में वापस लाने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है, जिनके मौजूदा अनुबंध समाप्त हो रहे हैं। इससे सार्वजनिक नियंत्रण और पूर्ण राष्ट्रीयकरण के बीच अंतर को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

Thames Water सरकार के लिए बड़ी चुनौती

ब्रिटेन के जल क्षेत्र में Thames Water सरकार के सामने सबसे जटिल मामलों में से एक है। कंपनी की वित्तीय स्थिति और सेवाओं को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। बर्नहम सरकार के सामने यह सवाल है कि क्या कंपनी को अस्थायी रूप से सार्वजनिक नियंत्रण में लिया जाए या कोई अन्य समाधान निकाला जाए।

Thames Water का राष्ट्रीयकरण करना कानूनी और आर्थिक रूप से आसान कदम नहीं होगा। सरकार के भीतर भी यह माना जाता है कि किसी बड़ी निजी कंपनी को सीधे सरकारी स्वामित्व में लेने की प्रक्रिया महंगी और जटिल हो सकती है।

ब्रिटिश स्टील का उदाहरण इस बहस को और महत्वपूर्ण बनाता है। पिछली सरकार के कार्यकाल में कंपनी को सार्वजनिक स्वामित्व में लिया गया था, जिसके लिए सरकार को बड़ी वित्तीय और राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ी थी। इसलिए बर्नहम प्रशासन के लिए राष्ट्रीयकरण को अंतिम विकल्प के तौर पर देखने की संभावना है।

सरकारी उधारी की लागत बढ़ने से बढ़ी चिंता

बर्नहम के संसद में पहुंचने से पहले ही सरकार के सामने आर्थिक मोर्चे पर एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। ब्रिटिश सरकार के लिए 10 साल की उधारी की लागत बढ़कर 5.23 प्रतिशत हो गई है। यह स्तर 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद सबसे ऊंचे स्तरों में शामिल है।

सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़ने का सीधा असर सरकार के कर्ज पर पड़ने वाले ब्याज खर्च पर पड़ता है। जब सरकार को नए कर्ज के लिए अधिक ब्याज देना पड़ता है, तो उसके बजट पर दबाव बढ़ता है और सार्वजनिक सेवाओं या अन्य योजनाओं के लिए उपलब्ध वित्तीय गुंजाइश सीमित हो सकती है।

वित्तीय बाजारों में यह बदलाव केवल ब्रिटेन तक सीमित नहीं है। अमेरिका, जापान और यूरोप के कुछ हिस्सों में भी हाल के दिनों में सरकारी उधारी दरों में तेजी देखी गई है। वैश्विक बाजारों में ब्याज दरों, महंगाई और सरकारी कर्ज को लेकर बढ़ती चिंता इसका एक प्रमुख कारण है।

महंगाई और वैश्विक तनाव का असर

बाजार में हालिया उतार-चढ़ाव के पीछे कई आर्थिक और भू-राजनीतिक कारण बताए जा रहे हैं। ईरान युद्ध से जुड़े आर्थिक जोखिमों के कारण महंगाई को लेकर चिंता बढ़ी है। इसके अलावा बड़ी टेक कंपनियों की लंबी अवधि के वित्तपोषण की मांग भी बॉन्ड बाजार पर दबाव डाल रही है।

सरकारी कर्ज के ऊंचे स्तर को लेकर भी निवेशकों की चिंता बढ़ी हुई है। ऐसे माहौल में ब्रिटेन सरकार के लिए आगामी बजट तैयार करना और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

ब्रिटेन के आधिकारिक बजट निगरानी संस्थान ऑफिस फॉर बजट रिस्पॉन्सिबिलिटी यानी OBR ने मार्च में अपने अनुमान में 10 साल की सरकारी उधारी दर करीब 4.5 प्रतिशत रहने की धारणा रखी थी। मौजूदा 5.23 प्रतिशत की दर उस अनुमान से काफी ऊपर है। इससे सरकार के वित्तीय गणित पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम पहली बार संसद में देंगे जवाब, बढ़ती उधारी लागत ने बढ़ाई चिंता

सरकार ने आर्थिक प्रदर्शन का बचाव किया

वित्त मंत्री जॉन हीली इस बीच अमेरिका में वैश्विक वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक प्रमुखों की बैठक में शामिल हुए। उन्होंने G20 के सामने ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक तस्वीर पेश की।

हीली के अनुसार 2026 में अब तक ब्रिटेन G7 देशों में सबसे तेज आर्थिक वृद्धि दर्ज करने वाला देश रहा है। उन्होंने उत्पादकता में सुधार और सरकारी उधारी को प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज गति से कम किए जाने का भी दावा किया।

हालांकि बाजारों में बढ़ती बॉन्ड यील्ड सरकार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। आर्थिक विकास के सकारात्मक आंकड़ों के बावजूद यदि सरकारी कर्ज की लागत लंबे समय तक ऊंची रहती है तो वित्तीय नीतियों पर दबाव बढ़ सकता है।

जेलों में बढ़ती भीड़ भी सरकार की प्राथमिकता

बर्नहम सरकार को जेल व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है। सरकार जेलों में क्षमता बढ़ाने के लिए खाली कार्यालयों, लॉन्ड्री और स्टोरेज जैसे स्थानों को नए सेल में बदलने की योजना पर काम कर रही है।

लेकिन जेल कर्मचारियों के एक वर्ग ने इस योजना पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मौजूदा जेलों में बड़ी संख्या में ऐसे सेल हैं जिनका इस्तेमाल सुरक्षा संबंधी समस्याओं के कारण नहीं किया जा सकता। ऐसे में नए स्थान बनाने के बजाय पुराने सेल की मरम्मत पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है।

2024 की नेशनल ऑडिट ऑफिस रिपोर्ट के अनुसार ब्रिटेन में जेल की लगभग एक चौथाई क्षमता, यानी करीब 23,000 स्थान, अग्नि सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं करते थे। यह आंकड़ा जेल व्यवस्था की पुरानी बुनियादी समस्याओं को उजागर करता है।

केयर स्टार्मर ने सांसद पद छोड़ने का फैसला किया

इसी बीच बर्नहम के पूर्ववर्ती प्रधानमंत्री केयर स्टार्मर ने भी ब्रिटेन की राजनीति में बड़ा बदलाव किया है। स्टार्मर ने घोषणा की कि वह हॉल्बोर्न एंड सेंट पैनक्रास से सांसद के रूप में इस्तीफा देंगे। वह 2015 से इस लंदन सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।

प्रधानमंत्री पद छोड़ने के बाद शुरुआत में माना जा रहा था कि स्टार्मर सांसद के रूप में अपना कार्यकाल जारी रखेंगे, लेकिन अब उन्होंने अपना फैसला बदल दिया है। स्थानीय मीडिया को दिए बयान में उन्होंने कहा कि सांसद पद छोड़ने से उन्हें अंतरराष्ट्रीय मामलों, रक्षा और सुरक्षा जैसे दूसरे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिलेगा।

स्टार्मर के इस्तीफे के बाद उनकी लंदन सीट पर उपचुनाव होगा। इससे बर्नहम के प्रधानमंत्री बनने के बाद ब्रिटिश राजनीति में एक और महत्वपूर्ण चुनावी मुकाबले की जमीन तैयार हो गई है।

बर्नहम के सामने आर्थिक और राजनीतिक दोनों चुनौतियां

बर्नहम का संसद में पहला बड़ा संबोधन ऐसे समय हो रहा है जब उनकी सरकार को एक साथ कई मोर्चों पर जवाब देना है। सार्वजनिक सेवाओं में सरकारी भूमिका बढ़ाने की योजना, जेलों में भीड़, जल क्षेत्र की समस्याएं और बढ़ती सरकारी उधारी लागत सरकार के सामने प्रमुख मुद्दे हैं।

सार्वजनिक नियंत्रण की नीति को लेकर बर्नहम को यह स्पष्ट करना होगा कि सरकार किन क्षेत्रों में सीधे हस्तक्षेप करेगी और कहां निजी कंपनियों की भूमिका जारी रहेगी। वहीं वित्तीय बाजारों में बढ़ती बॉन्ड यील्ड सरकार के खर्च और भविष्य के बजट पर दबाव डाल सकती है।

संसद में बर्नहम की पहली बड़ी परीक्षा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उनके जवाब आने वाले महीनों की सरकार की प्राथमिकताओं और आर्थिक रणनीति की दिशा का संकेत दे सकते हैं। फिलहाल प्रधानमंत्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वे सार्वजनिक सेवाओं में सुधार के अपने एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए बढ़ते कर्ज और वित्तीय बाजारों की चिंताओं को भी नियंत्रित रखें।

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