यूक्रेन के लगातार ड्रोन हमलों के बाद रूस ने एजोव सागर के प्रमुख समुद्री मार्गों पर जहाजों की आवाजाही रोक दी है। इस घटनाक्रम से तेल, गेहूं और अन्य वस्तुओं के निर्यात पर असर पड़ने की आशंका है, जबकि वैश्विक व्यापार और खाद्य बाजारों की चिंता भी बढ़ गई है।
रूस/यूक्रेन वॉर: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध अब केवल जमीनी मोर्चों तक सीमित नहीं रहा है। हाल के दिनों में यूक्रेन द्वारा किए गए लगातार ड्रोन हमलों ने रूस के लिए एक नई समुद्री चुनौती खड़ी कर दी है। एजोव सागर में बढ़ती असुरक्षा के कारण रूस को अपने दो प्रमुख समुद्री मार्गों पर जहाजों की आवाजाही अस्थायी रूप से रोकनी पड़ी है। इससे न केवल रूस के तेल और कृषि उत्पादों के निर्यात पर असर पड़ने की आशंका है, बल्कि वैश्विक खाद्य आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर भी इसका प्रभाव महसूस किया जा सकता है।
यूक्रेन का दावा है कि पिछले नौ दिनों के दौरान उसने एजोव सागर में रूस से जुड़े 116 जहाजों को निशाना बनाया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन लगातार बढ़ते हमलों ने इस रणनीतिक समुद्री क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बना दिया है।
एजोव सागर क्यों बना संघर्ष का नया केंद्र?
एजोव सागर रूस और यूक्रेन के बीच स्थित एक महत्वपूर्ण अंदरूनी समुद्री क्षेत्र है, जो केर्च जलडमरूमध्य (Kerch Strait) के माध्यम से ब्लैक सी से जुड़ता है। यह क्षेत्र रूस के लिए रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
दक्षिणी रूस से निकलने वाला तेल, गेहूं, सूरजमुखी का तेल, इस्पात और अन्य औद्योगिक उत्पाद इसी समुद्री मार्ग के जरिए वैश्विक बाजारों तक पहुंचते हैं। इसके अलावा यह समुद्री क्षेत्र रूस की सैन्य रसद और नौसैनिक गतिविधियों के लिए भी अहम भूमिका निभाता है।
ड्रोन हमलों से समुद्री यातायात प्रभावित
यूक्रेन की ड्रोन इकाइयों ने हाल के महीनों में समुद्री अभियानों की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की है। पहले जहां हमले मुख्य रूप से युद्धपोतों और तेल टैंकरों तक सीमित थे, वहीं अब व्यापारिक जहाज भी निशाने पर आने लगे हैं। लगातार बढ़ते जोखिम के बीच रूस ने डॉन-एजोव चैनल और केर्च जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही रोक दी है। दोनों समुद्री मार्ग एजोव सागर को रूस की आंतरिक नदियों और ब्लैक सी से जोड़ते हैं। सैटेलाइट तस्वीरों और जहाजों की ट्रैकिंग से जुड़े विभिन्न स्रोतों के अनुसार, इन मार्गों के दोनों ओर बड़ी संख्या में जहाज रुके हुए हैं और सुरक्षित रास्ता मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
व्यापार और निर्यात पर पड़ सकता है व्यापक असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संकट लंबे समय तक जारी रहता है तो रूस के समुद्री व्यापार पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। रूस विश्व का सबसे बड़ा गेहूं निर्यातक देशों में शामिल है और वैश्विक गेहूं आपूर्ति में उसकी महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है।
रिपोर्टों के अनुसार रूस के कुल गेहूं निर्यात का लगभग एक-चौथाई हिस्सा एजोव सागर के रास्ते भेजा जाता है। यदि यह मार्ग बाधित रहता है तो वैश्विक खाद्य आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
तेल और कृषि उत्पादों पर भी असर की आशंका
एजोव सागर केवल गेहूं के लिए ही नहीं बल्कि तेल, सूरजमुखी तेल, इस्पात और अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात का भी महत्वपूर्ण केंद्र है। कई ऐसे कृषि उत्पाद हैं जिन पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंध लागू नहीं हैं, लेकिन समुद्री परिवहन बाधित होने से उनका निर्यात भी प्रभावित हो सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि जहाजों की आवाजाही सामान्य नहीं हुई तो रूस को अरबों डॉलर के निर्यात नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

क्या यह रूस के लिए नया 'होर्मुज जैसा संकट' है?
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का कहना है कि एजोव सागर में बढ़ता संकट रणनीतिक दृष्टि से उस स्थिति की याद दिलाता है, जब किसी महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर तनाव वैश्विक व्यापार को प्रभावित करता है।
हालांकि एजोव सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य की भौगोलिक और आर्थिक परिस्थितियां अलग हैं, लेकिन दोनों मामलों में एक समानता यह है कि समुद्री मार्गों में असुरक्षा बढ़ने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा बाजार प्रभावित हो सकते हैं।
यूक्रेन की रणनीति क्या है?
सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यूक्रेन का उद्देश्य रूस की समुद्री आपूर्ति क्षमता को कमजोर करना और क्रीमिया से जुड़े रसद नेटवर्क पर दबाव बनाना है।अमेरिका स्थित इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर (ISW) का आकलन है कि इन हमलों का मकसद रूस की सैन्य सप्लाई लाइन को बाधित करना तथा समुद्री मार्गों के माध्यम से होने वाले तेल और अनाज के निर्यात को प्रभावित करना है। यदि यह रणनीति सफल रहती है तो रूस को अपने समुद्री परिवहन नेटवर्क में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं।
रूस के सामने क्या विकल्प हैं?
रूसी अधिकारियों का कहना है कि देश के पास ब्लैक सी के अन्य बंदरगाहों से निर्यात जारी रखने का विकल्प मौजूद है। हालांकि समुद्री व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि व्यस्त निर्यात सीजन के दौरान अन्य बंदरगाहों की क्षमता इतनी नहीं है कि वे एजोव सागर के पूरे व्यापारिक भार को संभाल सकें। ऐसी स्थिति में निर्यात की गति धीमी पड़ सकती है और परिवहन लागत भी बढ़ सकती है।
वैश्विक बाजारों में बढ़ी चिंता
एजोव सागर में तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं के वायदा भाव (फ्यूचर्स) में बढ़ोतरी देखी गई है। व्यापारिक संस्थान और निवेशक इस स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। यदि समुद्री मार्ग लंबे समय तक बाधित रहते हैं तो खाद्य कीमतों, समुद्री बीमा प्रीमियम और वैश्विक शिपिंग लागत में और वृद्धि हो सकती है।
आगे क्या?
यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध अब समुद्री क्षेत्र में भी निर्णायक मोड़ लेता दिखाई दे रहा है। एजोव सागर में बढ़ते हमले केवल दोनों देशों के बीच सैन्य संघर्ष तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका प्रभाव वैश्विक व्यापार, खाद्य सुरक्षा और समुद्री परिवहन पर भी पड़ सकता है।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रूस अपने वैकल्पिक समुद्री मार्गों का कितना प्रभावी उपयोग कर पाता है और क्या दोनों देशों के बीच बढ़ते समुद्री तनाव को कम करने के लिए कोई कूटनीतिक प्रयास सामने आते हैं। फिलहाल एजोव सागर वैश्विक रणनीतिक और आर्थिक चिंताओं का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है।








