UNGA अध्यक्ष Annalena Baerbock ने ट्रंप के ‘Peace Board’ पर उठाए सवाल, अंतरराष्ट्रीय कानून और बहुपक्षवाद पर दिया जोर

UNGA अध्यक्ष एनालेना बेयरबॉक ने Donald Trump के ‘Peace Board’ प्रस्ताव पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून और बहुपक्षवाद की अहमियत पर जोर देते हुए

संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष एनालेना बेयरबॉक ने मंगलवार को बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक व्यवस्था पर दबाव के बीच संयुक्त राष्ट्र चार्टर के प्रति नए सिरे से प्रतिबद्धता की अपील की।

नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष Annalena Baerbock ने वैश्विक व्यवस्था पर बढ़ते दबाव के बीच अंतरराष्ट्रीय कानून और बहुपक्षवाद की रक्षा की जरूरत पर जोर दिया है। भारत दौरे के दौरान उन्होंने अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा प्रस्तावित ‘पीस बोर्ड’ (Board of Peace) पर भी गंभीर सवाल उठाए।

दिल्ली में भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar के साथ बैठक के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में बेयरबॉक ने कहा कि वैश्विक शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।

ट्रंप के ‘पीस बोर्ड’ पर उठे सवाल

Donald Trump ने जनवरी में एक प्रस्तावित “पीस बोर्ड” की घोषणा की थी, जिसका उद्देश्य वैश्विक शांति प्रयासों, खासकर गाजा जैसे संघर्ष क्षेत्रों, की निगरानी करना था। इस पहल के तहत स्थायी सदस्यों से भारी आर्थिक योगदान (लगभग एक अरब डॉलर) की मांग की गई थी। Annalena Baerbock ने इस मॉडल पर चिंता जताते हुए कहा कि यदि वैश्विक शांति तंत्र सदस्यता शुल्क पर आधारित होगा, तो यह समानता और न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी व्यवस्था दुनिया के सभी देशों के लिए निष्पक्ष शांति सुनिश्चित नहीं कर सकती।

बेयरबॉक ने कहा कि United Nations को वैश्विक शांति और सुरक्षा बनाए रखने की जिम्मेदारी इसलिए दी गई है क्योंकि यह एक समावेशी मंच है, जहां सभी देशों की भागीदारी सुनिश्चित होती है। उन्होंने कहा, “कोई भी देश, चाहे वह कितना ही शक्तिशाली क्यों न हो, आज की जटिल वैश्विक चुनौतियों का अकेले सामना नहीं कर सकता। उनके अनुसार, संयुक्त राष्ट्र के तीन प्रमुख स्तंभ—शांति और सुरक्षा, विकास और मानवाधिकार—वर्तमान समय में गंभीर दबाव का सामना कर रहे हैं।

बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव पर चिंता

Annalena Baerbock ने कहा कि दुनिया तेजी से बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य से गुजर रही है, जहां संघर्ष, विभाजन और अस्थिरता बढ़ रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन, वैश्विक महामारी, Russia-Ukraine War और रणनीतिक क्षेत्रों जैसे होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित संकट जैसे मुद्दे वैश्विक सहयोग की मांग करते हैं।

उनका मानना है कि इन चुनौतियों का समाधान केवल सहयोग और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से ही संभव है। बेयरबॉक ने चेतावनी दी कि वर्तमान समय में बहुपक्षवाद और अंतरराष्ट्रीय कानून गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि देशों ने साझा नियमों और सिद्धांतों का पालन नहीं किया, तो वैश्विक व्यवस्था कमजोर हो सकती है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को फिर से मजबूत करें।

भारत के साथ रणनीतिक चर्चा

भारत दौरे के दौरान Annalena Baerbock और S. Jaishankar के बीच कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। इनमें सतत विकास, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और संयुक्त राष्ट्र सुधार जैसे विषय शामिल थे। S. Jaishankar ने इस बैठक के बाद कहा कि आज की वैश्विक वास्तविकताओं, विशेष रूप से “ग्लोबल साउथ” के दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार जरूरी है।

Leave a comment