UP Politics: अखिलेश यादव और CJP की 90 मिनट की बैठक से बढ़ी सियासी हलचल, युवाओं के मुद्दों पर रणनीति के संकेत

UP Politics: अखिलेश यादव और CJP के बीच 90 मिनट की बैठक से उत्तर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। युवाओं के मुद्दों पर चर्चा और आगामी रणनीति के संकेतों ने बढ़ाई

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी (SP) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गुरुवार को लखनऊ में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका के साथ करीब 90 मिनट तक बंद कमरे में बैठक की।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी (SP) और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बीच हुई एक अहम बैठक ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गुरुवार को लखनऊ में CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका और उनके प्रतिनिधिमंडल से करीब 90 मिनट तक बंद कमरे में बातचीत की। हालांकि, दोनों पक्षों की ओर से अभी तक किसी औपचारिक चुनावी गठबंधन या सीट बंटवारे की घोषणा नहीं की गई है।

यह बैठक समाजवादी पार्टी मुख्यालय के पास स्थित जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट कार्यालय में हुई। आशुतोष रांका के साथ CJP के सात अन्य सदस्य भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे। बैठक समाप्त होने के बाद दोनों पक्षों ने मीडिया से कोई विस्तृत बातचीत नहीं की और न ही संयुक्त बयान जारी किया। इसके बावजूद, SP जैसी स्थापित क्षेत्रीय पार्टी और युवाओं से जुड़े एक उभरते राजनीतिक मंच के बीच इस संवाद को चुनावी रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

शिक्षा, बेरोजगारी और पेपर लीक पर हुई चर्चा

सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, बैठक का मुख्य फोकस युवाओं, छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों से जुड़े मुद्दों पर रहा। इनमें पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था प्रमुख विषय बताए गए। राष्ट्रीय स्तर पर NEET जैसी परीक्षाओं और विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर युवाओं में चिंता का मुद्दा भी बातचीत में शामिल रहा। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति और स्कूलों के बंद होने से जुड़े सवालों पर भी चर्चा हुई।

समाजवादी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने बैठक की पुष्टि करते हुए कहा कि लखनऊ में बातचीत हुई थी। उन्होंने संकेत दिया कि अखिलेश यादव पहले से ही युवाओं, छात्रों और सरकारी शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों को राजनीतिक रूप से उठाते रहे हैं।

SP और CJP के बीच पहले भी दिखी है नजदीकी

UP Politics: अखिलेश यादव और CJP की 90 मिनट की बैठक से बढ़ी सियासी हलचल, युवाओं के मुद्दों पर रणनीति के संकेत

अखिलेश यादव और CJP के प्रतिनिधियों की यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब दोनों पक्षों के बीच पिछले कुछ समय से सार्वजनिक स्तर पर संवाद देखने को मिला है। CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका युवा और शिक्षा से जुड़े अभियानों के कारण चर्चा में रहे हैं। वह IIT कानपुर और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (LSE) से पढ़ाई कर चुके हैं। बताया गया है कि उन्होंने युवाओं और छात्रों से जुड़े आंदोलनों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कॉर्पोरेट क्षेत्र की नौकरी छोड़ी।

नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर राष्ट्रीय परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ CJP के लंबे विरोध प्रदर्शन के दौरान समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव और आजमगढ़ के सांसद धर्मेंद्र यादव भी धरना स्थल पर पहुंचे थे। इसी तरह राजस्थान में CJP के 'स्कूल ठीक करो' अभियान के दौरान आशुतोष रांका पर हुए हमले की अखिलेश यादव ने सार्वजनिक रूप से निंदा की थी।

बैठक के क्या हैं राजनीतिक मायने?

राजनीतिक दृष्टि से इस मुलाकात को कई स्तरों पर देखा जा रहा है। सबसे अहम पहलू युवा और पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं तक पहुंच का है। SP यदि शिक्षा, रोजगार और परीक्षा पारदर्शिता जैसे मुद्दों को प्रमुखता देती है, तो वह अपने पारंपरिक सामाजिक आधार से आगे शिक्षित युवाओं और शहरी मतदाताओं को भी जोड़ने की कोशिश कर सकती है।

दूसरा महत्वपूर्ण पहलू शिक्षा व्यवस्था का है। CJP का 'स्कूल ठीक करो' अभियान और SP की ओर से सरकारी स्कूलों की स्थिति पर उठाए जाने वाले सवाल भविष्य में साझा राजनीतिक अभियान का आधार बन सकते हैं। इसके अलावा, यह संवाद समाजवादी पार्टी की PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक केंद्रित राजनीतिक रणनीति के साथ नए सामाजिक समूहों को जोड़ने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा सकता है।

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