उत्तर प्रदेश सरकार UPTEN नेटवर्क के तहत इमरजेंसी स्वास्थ्य सेवाओं को एकीकृत करने की तैयारी कर रही है। 173 नए केंद्र, 1,200 ALS एंबुलेंस और AI तकनीक की मदद से मरीजों को तेजी से उपचार देने का लक्ष्य है।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं और गंभीर मेडिकल इमरजेंसी के दौरान समय पर इलाज उपलब्ध कराने के लिए UPTEN नेटवर्क विकसित किया जा रहा है। इसके तहत ट्रॉमा, बर्न, कार्डियक और स्ट्रोक जैसी आपात सेवाओं को एक सिस्टम से जोड़ा जाएगा। सरकार शुरुआती 48 घंटे का इमरजेंसी इलाज मुफ्त रखने के साथ AI आधारित ट्रायेज और डिजिटल अलर्ट सिस्टम के जरिए गोल्डन ऑवर में मरीजों तक तेजी से जीवनरक्षक उपचार पहुंचाने की तैयारी कर रही है।
UPTEN नेटवर्क से जुड़ेगी इमरजेंसी स्वास्थ्य व्यवस्था
उत्तर प्रदेश सरकार राज्य में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए उत्तर प्रदेश ट्रॉमा एंड इमरजेंसी नेटवर्क यानी UPTEN तैयार कर रही है। इसका उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं और गंभीर मेडिकल इमरजेंसी के मामलों में मरीजों को कम से कम समय में उचित इलाज उपलब्ध कराना है।
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इस व्यवस्था के तहत ट्रॉमा, बर्न, कार्डियक और स्ट्रोक जैसी अलग-अलग आपात सेवाओं को एकीकृत प्रणाली से जोड़ा जाएगा। सरकार का फोकस खास तौर पर गोल्डन ऑवर यानी इमरजेंसी के शुरुआती 60 मिनट में मरीज को जरूरी जीवनरक्षक उपचार उपलब्ध कराने पर है।
173 नए इमरजेंसी केंद्र होंगे तैयार
मरीजों को उनके नजदीक बेहतर आपात सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश में 173 एकीकृत ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन यूनिट विकसित की जाएंगी। इनमें 11 लेवल-1 एपेक्स हब, 36 लेवल-2 रीजनल सेंटर और 126 लेवल-3 जिला स्तरीय इकाइयां शामिल होंगी।
स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित घोष के अनुसार, इस नेटवर्क का लक्ष्य हर साल 10 से 12 हजार लोगों की जान बचाना है। इसके साथ ही दुर्घटनाओं और गंभीर बीमारियों के कारण होने वाली स्थायी विकलांगता के मामलों को भी कम करने का प्रयास किया जाएगा।
1,200 ALS एंबुलेंस में ही शुरू होगा इलाज
नई व्यवस्था में 1,200 एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट यानी ALS एंबुलेंस को UPTEN नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इन एंबुलेंस में मरीज को अस्पताल पहुंचाने के दौरान ही जरूरी आपात उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी।
प्रदेश के 18 मंडलीय कमांड सेंटर एंबुलेंस, अस्पतालों में उपलब्ध बेड और विशेषज्ञ डॉक्टरों के बीच वास्तविक समय में समन्वय करेंगे। इससे गंभीर मरीज के अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसके इलाज की तैयारी की जा सकेगी।
AI से कम होगा इमरजेंसी रिस्पॉन्स टाइम
आपातकालीन सेवाओं में प्रतिक्रिया समय कम करने के लिए डिजिटल अलर्ट सिस्टम और AI आधारित ट्रायेज तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके जरिए इमरजेंसी रिस्पॉन्स टाइम को 30 से 50 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य रखा गया है।
AI सिस्टम मरीज की स्थिति का आकलन करने में मदद करेगा और यह तय करने में सहायता करेगा कि मरीज को किस विभाग या विशेषज्ञ के पास भेजा जाना चाहिए। इससे अस्पताल पहुंचने के बाद सही उपचार शुरू करने में लगने वाला समय कम किया जा सकेगा।
48 घंटे तक मुफ्त मिलेगा इमरजेंसी इलाज
सरकार की योजना के तहत किसी भी आपात स्थिति में आर्थिक परेशानी के कारण इलाज में देरी न हो, इसके लिए शुरुआती 48 घंटे का इमरजेंसी इलाज मुफ्त रखा जाएगा। इसका उद्देश्य दुर्घटना या गंभीर बीमारी की स्थिति में मरीज को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।
इसके अलावा तीन स्तरों पर फर्स्ट रिस्पॉन्डर नेटवर्क तैयार किया जाएगा। इसमें पुलिस, फायर सर्विस और हाईवे पेट्रोल के साथ आम नागरिकों को भी शुरुआती आपात सहायता देने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए एम्स की तर्ज पर अलग कैडर और वेतनमान की व्यवस्था लागू करने की भी योजना है। इससे उत्तर प्रदेश में आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाने की कोशिश की जाएगी।









