कोलकाता की बंद केमिकल फैक्ट्री में भीषण आग, 10 दमकल गाड़ियों ने संभाला मोर्चा

पश्चिम बंगाल: कोलकाता के चितपुर में बंद केमिकल फैक्ट्री में भीषण आग लग गई। 10 दमकल गाड़ियों ने मोर्चा संभाला। फिलहाल किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

कोलकाता के चितपुर इलाके में रविवार दोपहर बंद केमिकल फैक्ट्री में भीषण आग लग गई। फैक्ट्री में रखे रसायनों के कारण आग तेजी से फैली। 10 दमकल गाड़ियों ने मौके पर पहुंचकर अभियान शुरू किया। फिलहाल किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

कोलकाता: बंगाल की राजधानी कोलकाता के उत्तर हिस्से में रविवार दोपहर एक बंद केमिकल फैक्ट्री में भीषण आग लगने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। चितपुर इलाके में स्थित इस फैक्ट्री में बड़ी मात्रा में रसायन रखे होने के कारण आग तेजी से फैल गई। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की 10 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और युद्धस्तर पर आग बुझाने का अभियान शुरू किया। राहत की बात यह रही कि रिपोर्ट दाखिल होने तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं थी।

दोपहर करीब 12:30 बजे लगी आग

जानकारी के मुताबिक, चितपुर स्थित बंद केमिकल फैक्ट्री में रविवार दोपहर करीब 12:30 बजे अचानक आग लग गई। फैक्ट्री लंबे समय से बंद थी, लेकिन परिसर के भीतर कई तरह के रसायन रखे हुए थे। इन्हीं ज्वलनशील पदार्थों के कारण आग ने तेजी से विकराल रूप ले लिया।

आग की लपटें और धुएं का गुबार देखकर आसपास के लोगों में दहशत फैल गई। स्थानीय लोगों को आशंका थी कि यदि आग पर जल्द काबू नहीं पाया गया तो यह आसपास मौजूद अन्य औद्योगिक इकाइयों तक भी पहुंच सकती है।

घटना की गंभीरता को देखते हुए दमकल विभाग ने तत्काल अभियान शुरू किया। कुल 10 फायर टेंडर घटनास्थल पर पहुंचे और आग को नियंत्रित करने की कोशिश शुरू की।

आसपास की फैक्ट्रियों में भी ज्वलनशील सामान

जिस इलाके में आग लगी, उसके आसपास कई अन्य फैक्ट्रियां भी मौजूद हैं। इन औद्योगिक इकाइयों में भी ज्वलनशील वस्तुओं के रखे होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में आग के फैलने का खतरा लगातार बना हुआ था।

दमकल अधिकारियों की प्राथमिकता आग को बंद फैक्ट्री के परिसर तक सीमित रखना और आसपास की इमारतों तथा फैक्ट्रियों को सुरक्षित रखना था। अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल स्थिति काफी हद तक नियंत्रण में रही और आसपास के इलाकों में आग फैलने से रोकने की कोशिश की गई।

दमकल विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती फैक्ट्री का स्थान और आसपास की भौगोलिक स्थिति थी।

संकरी गलियों ने बढ़ाई मुश्किल

दमकल विभाग के अधिकारियों के अनुसार, फैक्ट्री जिस इलाके में स्थित है, वह काफी भीड़भाड़ वाला है। वहां पहुंचने के रास्ते बेहद संकरे हैं। इस वजह से दमकल की गाड़ियों और उपकरणों को घटनास्थल तक पहुंचाने तथा आग बुझाने में अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ा।

अधिकारियों ने बताया कि उनका मुख्य उद्देश्य आग को फैक्ट्री की सीमा के भीतर रोकना था। इसके साथ ही आसपास मौजूद दूसरी फैक्ट्रियों तक आग पहुंचने से रोकने के लिए भी लगातार प्रयास किए गए।

संकरे रास्तों के कारण आग बुझाने का अभियान आसान नहीं था, लेकिन दमकलकर्मियों ने उपलब्ध संसाधनों के साथ कार्रवाई जारी रखी।

बाहर से पानी पहुंचाकर शुरू किया गया ऑपरेशन

आग बुझाने के शुरुआती चरण में दमकलकर्मियों ने बाहर से पानी की आपूर्ति कराकर होज पाइप के जरिए फैक्ट्री के भीतर पानी पहुंचाया। इस तरीके से आग की लपटों को नियंत्रित करने की कोशिश की गई।

इसके साथ ही फैक्ट्री में रखे रसायनों को हटाने का काम भी शुरू किया गया। दमकलकर्मियों के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण था, क्योंकि परिसर में मौजूद रसायन आग को और भड़का सकते थे।

काफी प्रयास के बाद फायरफाइटर्स आग के स्रोत तक पहुंचने में कामयाब हुए। इसके बाद आग पर सीधे नियंत्रण पाने के प्रयास तेज किए गए।

रसायन को माना जा रहा है आग का संभावित स्रोत

आग कैसे लगी, इसका सटीक कारण अभी स्पष्ट नहीं है। हालांकि, मौके पर मौजूद दमकल विभाग के एक अधिकारी ने शुरुआती आकलन के आधार पर कहा कि फैक्ट्री में रखे अत्यधिक ज्वलनशील रसायन आग लगने की संभावित वजह हो सकते हैं।

फिलहाल इसे अंतिम कारण नहीं माना गया है। आग की वास्तविक वजह का पता जांच के बाद ही चल सकेगा। फैक्ट्री बंद होने के बावजूद वहां रसायनों का भंडारण आग के तेजी से फैलने की एक बड़ी वजह माना जा रहा है।

दमकल विभाग की ओर से आग बुझाने के साथ-साथ फैक्ट्री में मौजूद रसायनों को हटाने पर भी काम किया गया, ताकि स्थिति और गंभीर न हो।

किसी के हताहत होने की सूचना नहीं

हादसे के समय तक किसी व्यक्ति की मौत या घायल होने की सूचना सामने नहीं आई थी। बंद फैक्ट्री होने के कारण वहां कर्मचारियों की मौजूदगी को लेकर भी कोई ऐसी जानकारी नहीं दी गई, जिससे जनहानि की पुष्टि हो।

हालांकि, आग की तीव्रता को देखते हुए आसपास के लोगों में काफी चिंता थी। स्थानीय स्तर पर इस बात का डर बना हुआ था कि आग पास की फैक्ट्रियों और अन्य परिसरों तक फैल सकती है।

दमकल टीमों की कार्रवाई के चलते स्थिति को काफी हद तक नियंत्रण में रखने में सफलता मिली।

आग से आसपास के इलाके में फैली चिंता

चितपुर का यह इलाका औद्योगिक गतिविधियों के साथ-साथ घनी आबादी वाला क्षेत्र भी है। ऐसे में किसी केमिकल फैक्ट्री में आग लगना स्थानीय लोगों के लिए चिंता का विषय बन गया।

फैक्ट्री में रखे रसायनों के कारण आग सामान्य औद्योगिक आग की तुलना में अधिक जोखिम वाली हो सकती थी। इसके अलावा आसपास ज्वलनशील सामान रखने वाली अन्य फैक्ट्रियों की मौजूदगी ने भी खतरा बढ़ा दिया था।

दमकलकर्मियों ने आग को फैलने से रोकने के लिए पहले उसके दायरे को सीमित करने पर ध्यान दिया। इसके बाद आग के मुख्य स्रोत पर कार्रवाई की गई।

पश्चिम बंगाल में हाल में हुए होटल अग्निकांडों की पृष्ठभूमि

यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब पश्चिम बंगाल में हाल ही में दो बड़े होटल अग्निकांडों में कुल 18 लोगों की मौत हुई थी। दोनों घटनाओं में नौ-नौ लोगों की जान गई थी।

पहली घटना बीरभूम जिले के तारापीठ स्थित होटल बिदेशिनी में हुई थी, जिसमें नौ लोगों की मौत हुई। इसके बाद सेंट्रल कोलकाता की मिर्जा गालिब स्ट्रीट स्थित होटल शिखा इन में आग लगी थी। इस घटना में भी नौ लोगों की मौत हुई थी, जिनमें सात बांग्लादेशी नागरिक शामिल थे।

इन घटनाओं के बाद आग से सुरक्षा और आपात स्थिति से निपटने को लेकर चिंता बढ़ी है। चितपुर की बंद केमिकल फैक्ट्री में लगी आग ने भी ज्वलनशील पदार्थों के सुरक्षित भंडारण और औद्योगिक इलाकों में अग्नि सुरक्षा की जरूरत को सामने ला दिया है।

फिलहाल स्थिति नियंत्रण में

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, चितपुर की बंद केमिकल फैक्ट्री में लगी आग पर काबू पाने के लिए दमकल विभाग का अभियान जारी रहा। 10 फायर टेंडरों की मदद से आग को आसपास के इलाकों में फैलने से रोकने की कोशिश की गई।

रिपोर्ट दाखिल होने तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं थी और व्यापक नुकसान की भी पुष्टि नहीं हुई थी। आग लगने के सटीक कारण का पता अभी नहीं चल पाया है।

दमकल विभाग की शुरुआती जांच में फैक्ट्री के भीतर रखे ज्वलनशील रसायनों को आग का संभावित स्रोत माना गया है। हालांकि, आग की वास्तविक वजह और नुकसान का अंतिम आकलन संबंधित जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

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