अमेरिका के साथ महीनों से जारी संघर्ष के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अब युद्ध खत्म करने की इच्छा जताई है। शुक्रवार को डॉक्टरों के साथ एक बैठक में उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में ईरान ताकत और सम्मान की स्थिति में है, इसलिए अब युद्ध को समाप्त करना बेहतर होगा।
World News: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी सैन्य तनाव और संघर्ष के बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के एक बयान ने युद्ध समाप्त होने की संभावनाओं को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। पेजेश्कियन ने संकेत दिया है कि मौजूदा परिस्थितियों में संघर्ष को समाप्त करना ईरान के हित में हो सकता है। हालांकि, दोनों देशों के बीच औपचारिक कूटनीतिक बातचीत अभी तक पूरी तरह बहाल नहीं हुई है और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव भी बना हुआ है।
शुक्रवार को डॉक्टरों के एक समूह के साथ बैठक में ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि उनका देश वर्तमान समय में ताकत और सम्मान की स्थिति में खड़ा है। उनके अनुसार, ऐसी स्थिति में युद्ध को समाप्त करने पर विचार करना बेहतर विकल्प हो सकता है। उनके इस बयान को अमेरिका और ईरान के बीच भविष्य में बातचीत का रास्ता खुलने के संभावित संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
पेजेश्कियन ने ईरान की स्थिति को बताया मजबूत
राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने दावा किया कि दुनिया ईरान की स्थिति और उसके संघर्ष को अलग नजरिए से देख रही है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका की सैन्य कार्रवाई को लेकर आलोचना हुई है और ईरान की ओर से इसे स्कूलों, अस्पतालों तथा महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमलों से जोड़कर सवाल उठाए गए हैं।
पेजेश्कियन के मुताबिक, ईरान इस समय दबाव में झुकने के बजाय मजबूती से खड़ा है। उन्होंने कहा कि युद्ध समाप्त करने की इच्छा को कमजोरी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह मौजूदा परिस्थितियों में राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए लिया गया संभावित निर्णय हो सकता है। हालांकि, ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में विदेश और सुरक्षा नीति से जुड़े प्रमुख फैसलों में सर्वोच्च नेतृत्व की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में राष्ट्रपति के बयान के बाद भी युद्ध या शांति को लेकर अंतिम दिशा देश के शीर्ष राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व की रणनीति पर निर्भर करेगी।
अमेरिका के साथ समझौता ज्ञापन का किया बचाव

ईरानी राष्ट्रपति ने जून में अमेरिका के साथ हुए समझौता ज्ञापन का भी बचाव किया। इस समझौते को लेकर ईरान के भीतर राजनीतिक मतभेद सामने आए थे और कुछ कट्टरपंथी नेताओं ने सरकार पर अमेरिका के सामने जरूरत से ज्यादा रियायतें देने का आरोप लगाया था। पेजेश्कियन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि समझौते में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिसे ईरान का आत्मसमर्पण कहा जा सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि दस्तावेज में शामिल प्रतिबद्धताएं दूसरे पक्ष की जिम्मेदारियों से भी जुड़ी हैं।
उनके बयान से यह साफ है कि ईरानी सरकार किसी संभावित समझौते को देश की संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों के दायरे में पेश करना चाहती है। यही वजह है कि तेहरान एक तरफ बातचीत और युद्ध समाप्त करने की बात कर रहा है, जबकि दूसरी ओर अपनी सैन्य तैयारियों को लेकर भी सख्त संदेश दे रहा है।
ईरानी सेना ने दी कड़े जवाब की चेतावनी
समझौता ज्ञापन की अवधि समाप्त होने के कुछ दिनों बाद ईरान के सैन्य नेतृत्व ने किसी भी नए खतरे का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार रहने का दावा किया है। ईरानी मीडिया के अनुसार, सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही ने कहा कि ईरान की थल सेना, नौसेना, वायु सेना, वायु रक्षा और साइबर क्षमताएं सतर्क और तैयार हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि देश के खिलाफ कोई नया सैन्य खतरा पैदा होता है तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। इस बयान से स्पष्ट है कि शांति की संभावनाओं पर चर्चा के बावजूद ईरान अपनी सुरक्षा तैयारियों में कोई ढील देने के मूड में नहीं है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर बना हुआ है तनाव
अमेरिका-ईरान तनाव का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य भी बना हुआ है। यह दुनिया के सबसे अहम समुद्री ऊर्जा मार्गों में शामिल है और यहां किसी भी तरह की रुकावट वैश्विक तेल आपूर्ति तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकती है। इसी बीच ओमान और ईरान के विदेश मंत्रियों के बीच फोन पर बातचीत हुई। ओमान की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, दोनों नेताओं ने वार्ता और संवाद दोबारा शुरू करने के लिए आवश्यक परिस्थितियां तैयार करने के तरीकों पर चर्चा की। बातचीत में होर्मुज क्षेत्र में नौवहन से जुड़े हालात भी शामिल रहे।
रिपोर्टों के मुताबिक, तेहरान ने जलडमरूमध्य के कुछ हिस्सों में अब भी प्रतिबंध लगाए हुए हैं, जबकि अमेरिका क्षेत्र में अपनी नौसैनिक गतिविधियां जारी रखे हुए है। ऊर्जा आपूर्ति और तेल टैंकरों की आवाजाही को लेकर स्थिति अंतरराष्ट्रीय बाजारों की चिंता बढ़ा रही है।











