US Supreme Court के फैसले के बाद Donald Trump ने Global Tariff 10% से बढ़ाकर 15% कर दिया। यह शुल्क 24 फरवरी से 150 दिनों तक लागू रहेगा और भारत समेत सभी देशों के निर्यात पर इसका असर पड़ सकता है।
Trump Tariff: अमेरिका में एक अहम कानूनी फैसले के बाद वैश्विक व्यापार में हलचल मच गई है। डोनाल्ड ट्रंप ने सभी देशों पर लगाए गए 10 प्रतिशत Global Tariff को बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है। यह फैसला अमेरिकी उच्चतम न्यायालय द्वारा उनके पहले के भारी शुल्क को रद्द किए जाने के बाद लिया गया है। नए शुल्क का असर भारत समेत दुनिया के लगभग सभी देशों पर पड़ेगा।
ट्रंप ने घोषणा की कि यह 15 प्रतिशत शुल्क 24 फरवरी से 150 दिनों के लिए प्रभावी रहेगा। इस फैसले को लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजार और व्यापार जगत में चिंता बढ़ गई है।
क्या था सुप्रीम कोर्ट का फैसला
अमेरिकी उच्चतम न्यायालय ने छह-तीन के बहुमत से फैसला सुनाया कि राष्ट्रपति द्वारा आपातकालीन शक्तियों के कानून यानी IEEPA 1977 के तहत लगाए गए आयात शुल्क वैध नहीं थे। अदालत ने कहा कि इस कानून के तहत राष्ट्रपति को आयात पर कर लगाने का अधिकार नहीं है।
इस फैसले के बाद पहले से लागू कई भारी शुल्क आदेश प्रभावहीन हो गए। अदालत के निर्णय ने ट्रंप प्रशासन की व्यापार नीति को बड़ा झटका दिया। हालांकि राष्ट्रपति ने तुरंत जवाबी कार्रवाई करते हुए नया Global Tariff लागू कर दिया।
10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ा Global Tariff
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शुक्रवार को ट्रंप ने सभी देशों पर 10 प्रतिशत का वैश्विक शुल्क लगाया था। लेकिन शनिवार को उन्होंने इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया। सोशल मीडिया पोस्ट में ट्रंप ने अदालत के फैसले को हास्यास्पद और अमेरिका विरोधी बताया।
उन्होंने कहा कि कई देश दशकों से अमेरिका से अनुचित लाभ उठा रहे थे और अब उनकी सरकार इस स्थिति को बदलने के लिए प्रतिबद्ध है। ट्रंप के मुताबिक आने वाले महीनों में नए और कानूनी रूप से स्वीकार्य शुल्क भी तय किए जाएंगे।
भारत सरकार की प्रतिक्रिया
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भारत पर भी इस 15 प्रतिशत Global Tariff का सीधा असर पड़ेगा। वाणिज्य मंत्रालय, भारत सरकार ने बयान जारी कर कहा है कि वह इन घटनाक्रमों और उनके संभावित प्रभावों का अध्ययन कर रहा है। मंत्रालय ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन के हालिया कदमों की जानकारी उनके संज्ञान में है और विस्तृत समीक्षा की जा रही है।
भारत के निर्यातकों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां अमेरिकी बाजार महत्वपूर्ण है। सरकार यह देख रही है कि किस सेक्टर पर कितना प्रभाव पड़ सकता है।
133 अरब डॉलर की वसूली पर सवाल
अमेरिकी सीमा शुल्क एजेंसी के अनुसार दिसंबर तक IEEPA के तहत जारी आदेशों से 133 अरब डॉलर की वसूली की गई थी। अब जब सुप्रीम कोर्ट ने उन आदेशों को अवैध बताया है, तो यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह राशि आयातकों को लौटाई जाएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीकी रूप से रिफंड संभव है, लेकिन आम उपभोक्ताओं तक इसका लाभ पहुंचना मुश्किल होगा। कारण यह है कि कंपनियों ने बढ़े हुए शुल्क का बोझ कीमतें बढ़ाकर ग्राहकों पर डाल दिया था। ऐसे में अगर रिफंड होता भी है, तो कंपनियों को मिलेगा, उपभोक्ताओं को नहीं।
वैश्विक व्यापार पर असर
15 प्रतिशत Global Tariff का असर केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा। इसका सीधा प्रभाव अंतरराष्ट्रीय व्यापार, सप्लाई चेन और कीमतों पर पड़ेगा। कई देश अब अपने निर्यात की रणनीति पर दोबारा विचार कर सकते हैं।
यदि अन्य देश जवाबी शुल्क लगाते हैं तो व्यापार युद्ध की आशंका भी बढ़ सकती है। इससे वैश्विक बाजार में अस्थिरता आ सकती है और निवेशकों का भरोसा प्रभावित हो सकता है।
अमेरिका की ‘America First’ नीति
ट्रंप ने अपने बयान में फिर दोहराया कि उनकी नीति का उद्देश्य अमेरिका को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। उनका कहना है कि नए शुल्क ‘Make America Great Again’ अभियान का हिस्सा हैं। वे मानते हैं कि उच्च आयात शुल्क से घरेलू उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और व्यापार घाटा कम होगा।
हालांकि आलोचकों का तर्क है कि ज्यादा शुल्क से उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ेगा और महंगाई में इजाफा हो सकता है। कंपनियों को भी कच्चे माल और तैयार उत्पादों की लागत अधिक चुकानी पड़ सकती है।










