पीटर नवारो ने भारत पर यूक्रेन युद्ध को भड़काने का आरोप लगाया। अमेरिकी विशेषज्ञों ने इसे गलत और खतरनाक बताया। भारत ने स्पष्ट किया कि तेल खरीद आर्थिक जरूरत पर आधारित है। द्विपक्षीय संबंधों में तनाव बढ़ा।
US Tariff: व्हाइट हाउस के ट्रेड एडवाइजर पीटर नवारो ने हाल ही में भारत के खिलाफ एक बार फिर तीखी बयानबाजी की है। उन्होंने भारतीय सामानों पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ का बचाव करते हुए कहा कि भारत रूस से तेल खरीदकर यूक्रेन के खिलाफ युद्ध को बढ़ावा दे रहा है। नवारो के अनुसार, यूक्रेन में शांति का रास्ता नई दिल्ली से होकर जाता है और भारत इस दिशा में बाधा बन रहा है।
अमेरिका-भारत संबंध खतरे में
पीटर नवारो के बयान के बाद अमेरिका में ही उनकी आलोचना शुरू हो गई है। एशिया विशेषज्ञ और दो अमेरिकी विदेश मंत्रियों के पूर्व सलाहकार इवान ए. फेगेनबाम ने नवारो को ‘एक बेलगाम तोप’ बताया और कहा कि उनके बयानों से दशकों की मेहनत से बने अमेरिका-भारत संबंध खतरे में पड़ सकते हैं। फेगेनबाम के अनुसार, भारत को यूक्रेन में युद्ध के लिए जिम्मेदार ठहराना पूरी तरह बेतुका है और यह बयान अमेरिका-भारत के द्विपक्षीय संबंधों पर नकारात्मक असर डाल सकता है।
भारत को ‘तेल का फंडिंग सेंटर’ बताना गलत
नवारो ने अपने बयान में दावा किया कि भारत रूस से तेल खरीदकर युद्ध में योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय रिफाइनर कालाबाजारी वाले तेल से मुनाफा कमा रहे हैं और इसका फायदा रूस को हो रहा है जबकि यूक्रेन में लोग मर रहे हैं। नवारो ने इस आधार पर भारतीय सामानों पर 50 प्रतिशत टैरिफ का समर्थन किया। उनके अनुसार, 25 प्रतिशत टैरिफ गलत ट्रेड प्रैक्टिस को रोकने के लिए और बाकी 25 प्रतिशत राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से लगाया गया है।
तेल आयात और निर्यात पर आरोप
नवारो ने भारत के रूसी तेल आयात को लेकर विस्तृत आंकड़े पेश किए। उन्होंने कहा कि 2022 से पहले भारत की हिस्सेदारी 1 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 30 प्रतिशत से अधिक यानी लगभग 15 लाख बैरल प्रतिदिन हो गई है। नवारो ने आरोप लगाया कि भारतीय रिफाइनर हर दिन 10 लाख बैरल से अधिक रिफाइंड उत्पाद का निर्यात कर रहे हैं, जिससे रूस को आर्थिक लाभ मिल रहा है। उनका यह दावा भारत की नीति और व्यापारिक जरूरतों के आधार पर की गई निर्णयों को गलत साबित करने की कोशिश के रूप में देखा गया।
नीति से हटकर बयान
फेगेनबाम ने नवारो के दावों को खारिज करते हुए कहा कि ये बयान इतिहास और वास्तविक नीति के आधार से बिल्कुल अलग हैं। उन्होंने कहा कि भारत को हथियारों का ‘रणनीतिक मुफ़्तखोर’ बताना गलत और भ्रामक है। विशेषज्ञों के अनुसार, नवारो जैसे बयान अमेरिका की नीति बनाने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं और द्विपक्षीय संबंधों में अनावश्यक तनाव पैदा कर सकते हैं।
अमेरिका-भारत साझेदारी को खतरा
फेगेनबाम ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका-भारत संबंधों में इस तरह की बयानबाजी जारी रही, तो यह साझेदारी बिखर सकती है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को इस स्थिति को सुधारने और अधिक उत्पादक रास्ते पर वापस लाने के लिए बदलाव करना पड़ सकता है। उनका कहना है कि द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए इतिहास, संदर्भ और वास्तविक राजनीतिक परिस्थितियों का ध्यान रखना आवश्यक है।