देहरादून। उत्तराखंड में मानसून की बारिश एक बार फिर आफत बन गई है। प्रदेश के कई जिलों में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण भूस्खलन, सड़क धंसने, मकान में मलबा घुसने और नदी-नालों के उफान पर आने की घटनाएं सामने आ रही हैं। अलग-अलग हादसों में अब तक 8 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। नैनीताल में बारिश के दौरान चलती कार के ऊपर बोल्डर गिरने से हादसा हुआ, जबकि अल्मोड़ा में भारी मलबा एक मकान में घुस गया, जिससे एक ही परिवार के तीन लोगों की जान चली गई। हालात को देखते हुए प्रशासन ने कई जिलों में स्कूलों को बंद रखने का फैसला लिया है।
भारी बारिश का सबसे ज्यादा असर पर्वतीय क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है। पहाड़ों पर लगातार बारिश के कारण सड़कें संवेदनशील हो गई हैं और जगह-जगह भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। कई मार्गों पर मलबा और बड़े-बड़े पत्थर गिरने से यातायात प्रभावित हुआ है। प्रशासन और लोक निर्माण विभाग की टीमें लगातार सड़कों को खोलने में जुटी हैं, लेकिन बारिश के बीच बार-बार भूस्खलन होने से परेशानी बढ़ रही है।
नैनीताल में बारिश के दौरान एक चलती कार के ऊपर बोल्डर गिरने की घटना ने लोगों को झकझोर दिया। पहाड़ी मार्ग पर अचानक ऊपर से भारी पत्थर गिरने के कारण कार उसकी चपेट में आ गई। हादसे के बाद आसपास मौजूद लोगों ने राहत और बचाव की कोशिश शुरू की। लगातार बारिश और संवेदनशील पहाड़ी ढलानों के कारण ऐसे रास्तों पर सफर करना बेहद जोखिम भरा बना हुआ है।
अल्मोड़ा जिले में बारिश से सबसे दर्दनाक हादसा सामने आया। हवालबाग क्षेत्र के ओडयूड़ा गांव में मंगलवार तड़के भारी मलबा एक मकान की दीवार तोड़ते हुए घर के अंदर घुस गया। जिस समय यह हादसा हुआ, परिवार के लोग घर के भीतर सो रहे थे। मलबे की चपेट में आने से एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत हो गई। राहत और बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर मलबा हटाया और शवों को बाहर निकाला।
हादसे की सूचना मिलने के बाद SDRF, पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमें मौके पर पहुंचीं। बताया गया कि घटनास्थल तक पहुंचने में भी टीमों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। पहाड़ी रास्तों पर मलबा और खराब मौसम के बीच बचाव अभियान चलाया गया। घटना के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है और आसपास के लोग भी भारी बारिश को लेकर चिंतित हैं।
देहरादून में भी लगातार बारिश से हालात बिगड़े हैं। सोमवार शाम और रात हुई तेज बारिश के बाद कई इलाकों में जलभराव हो गया। कुछ स्थानों पर पानी घुटनों तक पहुंच गया। रिस्पना नदी और बरसाती नालों का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क किया गया। प्रशासन की टीमें संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी कर रही हैं।
मसूरी-देहरादून मार्ग पर भी बारिश और भूस्खलन का असर देखने को मिला। सड़क पर मलबा और बोल्डर आने से यातायात बाधित हुआ। लोक निर्माण विभाग की टीम ने कई घंटे की मशक्कत के बाद रास्ता खोलने की कोशिश की, लेकिन लगातार बारिश के कारण नए स्थानों पर भूस्खलन होने का खतरा बना हुआ है। पहाड़ी मार्गों पर सफर करने वालों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई है।
मौसम विभाग ने प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। देहरादून और टिहरी में भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। वहीं पौड़ी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, नैनीताल और हरिद्वार समेत कई जिलों में भारी बारिश और आकाशीय बिजली की संभावना जताई गई है।
लगातार बारिश को देखते हुए प्रशासन ने स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए भी एहतियाती कदम उठाए हैं। देहरादून में 1 सितंबर को कक्षा 1 से 12 तक के स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित किया गया है। अलग-अलग जिलों में स्थानीय मौसम और आपदा की स्थिति के आधार पर स्कूल बंद करने के आदेश जारी किए गए हैं।
बारिश के कारण राज्य में कई संपर्क मार्ग भी प्रभावित हुए हैं। पहाड़ी इलाकों में सड़क पर मलबा आने के अलावा सड़क धंसने और बोल्डर गिरने की घटनाएं सामने आ रही हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों का संपर्क प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने संवेदनशील मार्गों पर मशीनरी तैनात कर रखी है, ताकि रास्ते बंद होने की स्थिति में जल्द से जल्द यातायात बहाल किया जा सके।
आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा गया है। नदी-नालों के आसपास रहने वाले लोगों को जलस्तर बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है। लोगों से कहा गया है कि वे बारिश के दौरान नदियों, बरसाती गदेरों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों के पास जाने से बचें।
मौसम की स्थिति को देखते हुए पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा करने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए भी सावधानी बेहद जरूरी है। कई बार पहाड़ों पर ऊपर से अचानक बोल्डर और मलबा गिरने लगता है, जिसका पहले से अनुमान लगाना मुश्किल होता है। ऐसे में प्रशासन की ओर से जारी यातायात और मौसम संबंधी निर्देशों का पालन करना जरूरी है।
अल्मोड़ा में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत और अन्य इलाकों में हुए हादसों के बाद प्रशासन ने राहत एवं बचाव व्यवस्था को और मजबूत किया है। जिन क्षेत्रों में लगातार बारिश हो रही है, वहां आपदा प्रबंधन टीमें स्थिति पर नजर रख रही हैं। जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी भी की जा रही है।
उत्तराखंड में सितंबर की शुरुआत ही भारी बारिश के साथ हुई है। मौसम विभाग के अलर्ट और लगातार सामने आ रही आपदा की घटनाओं ने चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती संवेदनशील पहाड़ी इलाकों में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, सड़क संपर्क बनाए रखना और भूस्खलन की घटनाओं के बाद राहत कार्य तेजी से पूरा करना है।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि मौसम खराब होने पर अनावश्यक यात्रा न करें। विशेष रूप से पहाड़ी सड़कों, नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में जाने से बचें। किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन और आपदा नियंत्रण कक्ष को सूचना देने की सलाह दी गई है।











