कैंची धाम के जाम से कौसानी का पर्यटन कारोबार प्रभावित, होटल बुकिंग रद्द कर लौट रहे पर्यटक

कैंची धाम में भीषण जाम का असर कौसानी के पर्यटन कारोबार पर पड़ा है। पर्यटक होटल बुकिंग रद्द कर लौट रहे हैं, जिससे होटल और स्थानीय कारोबारियों की चिंता बढ़ी।
कैंची धाम के जाम से कौसानी का पर्यटन कारोबार प्रभावित, होटल बुकिंग रद्द कर लौट रहे पर्यटक
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उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में कैंची धाम के आसपास लग रहे भीषण जाम का असर अब दूर-दराज के पर्यटन स्थलों के कारोबार पर भी दिखाई देने लगा है। कैंची धाम में उमड़ रही श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भारी भीड़ के कारण भवाली-अल्मोड़ा मार्ग समेत आसपास के प्रमुख रास्तों पर यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। हालात ऐसे बन रहे हैं कि कैंची धाम जाने वाले पर्यटकों के साथ-साथ कौसानी, बागेश्वर, अल्मोड़ा और अन्य पर्यटन स्थलों की ओर जाने वाले यात्रियों को भी घंटों जाम में फंसना पड़ रहा है। इसका सीधा असर कौसानी के होटल, होमस्टे, टैक्सी और अन्य पर्यटन कारोबार पर पड़ रहा है।

कौसानी उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है और हिमालय की मनोरम चोटियों के दृश्य के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। उत्तराखंड पर्यटन विभाग के अनुसार यहां से त्रिशूल, नंदा देवी और पंचाचूली जैसी हिमालयी चोटियों का शानदार नजारा दिखाई देता है। ऐसे में यहां आने वाले पर्यटक सामान्य तौर पर एक या दो दिन ठहरकर आसपास के क्षेत्रों का भ्रमण करते हैं। लेकिन मौजूदा समय में कैंची धाम क्षेत्र में यातायात की खराब स्थिति ने पर्यटकों की पूरी यात्रा योजना को प्रभावित करना शुरू कर दिया है।

पर्यटन कारोबारियों के अनुसार कई पर्यटक कैंची धाम होते हुए कौसानी पहुंचने की योजना बनाते हैं। इसके लिए वे पहले से होटल और होमस्टे की बुकिंग करा लेते हैं। लेकिन रास्ते में लंबा जाम मिलने और कई घंटे तक यातायात में फंसे रहने की आशंका के कारण कुछ पर्यटक अपनी यात्रा आगे बढ़ाने के बजाय वापस लौटने का फैसला कर रहे हैं। कई मामलों में पर्यटकों की ओर से होटल बुकिंग रद्द कराए जाने की बात सामने आ रही है। इसका असर होटल कारोबारियों की एडवांस बुकिंग और आने वाले दिनों की संभावित आमदनी पर पड़ रहा है।

कैंची धाम में पिछले दिनों अचानक बढ़ी भीड़ ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है। हालिया वीकेंड में बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचे थे। प्रशासन के अनुसार एक दिन में श्रद्धालुओं की संख्या करीब 40 हजार तक पहुंचने की जानकारी सामने आई, जबकि सामान्य वीकेंड पर भी 20 से 25 हजार श्रद्धालुओं के पहुंचने की बात कही जा रही है। इससे भवाली-अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों का दबाव काफी बढ़ गया और यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई।

जाम का असर सिर्फ कैंची धाम तक सीमित नहीं है। कुमाऊं के प्रमुख पर्यटन मार्गों पर इसका दबाव दिखाई दे रहा है। लंबे समय तक वाहनों के फंसे रहने के कारण पर्यटकों की यात्रा का समय कई गुना बढ़ रहा है। हालात इतने खराब होने की रिपोर्ट सामने आई कि कुछ श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपने वाहनों से उतरकर पैदल आगे बढ़ना पड़ा। भवाली, भीमताल और कैंची क्षेत्र के आसपास कई किलोमीटर तक वाहनों की कतारें देखी गईं।

इस स्थिति का सबसे बड़ा नुकसान उन पर्यटन स्थलों को हो रहा है, जहां पर्यटक कैंची धाम दर्शन के बाद जाने की योजना बनाते हैं। कौसानी भी उन्हीं प्रमुख स्थलों में शामिल है। यदि पर्यटकों को यह डर रहे कि कैंची धाम से कौसानी पहुंचने में कई घंटे लग सकते हैं या वापसी के दौरान फिर जाम में फंसना पड़ सकता है, तो वे यात्रा को छोटा कर रहे हैं। इससे पहले जहां पर्यटक कैंची धाम के साथ कौसानी, अल्मोड़ा, बागेश्वर, मुक्तेश्वर और दूसरे स्थलों का कार्यक्रम बनाते थे, अब कई लोग केवल एक जगह जाकर वापस लौटने को प्राथमिकता दे रहे हैं।

इससे होटल और होमस्टे कारोबारियों की परेशानी बढ़ गई है। होटल संचालकों का कहना है कि पर्यटन सीजन में एडवांस बुकिंग उनके कारोबार की सबसे बड़ी ताकत होती है। पर्यटक यदि बुकिंग कराने के बाद यात्रा रद्द करते हैं तो कमरों की उपलब्धता तो बढ़ जाती है, लेकिन आखिरी समय पर खाली हुए कमरे दोबारा भरना मुश्किल होता है। खासकर परिवार और दूसरे शहरों से आने वाले पर्यटक सड़क की स्थिति को देखते हुए अपना पूरा यात्रा कार्यक्रम बदल देते हैं।

कैंची धाम में बढ़ती भीड़ के कारण अब प्रशासन भी यातायात और भीड़ नियंत्रण को लेकर गंभीर कदम उठाने की तैयारी में है। मंडलायुक्त दीपक रावत की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में कैंची धाम में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या को नियंत्रित करने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण व्यवस्था लागू करने की तैयारी पर चर्चा हुई है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत प्रतिदिन करीब 20 से 25 हजार श्रद्धालुओं को संभालने की क्षमता के हिसाब से व्यवस्था बनाने पर सहमति बनी है।

प्रशासन अब श्रद्धालुओं की संख्या को आसपास उपलब्ध ठहरने की क्षमता से भी जोड़ने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से पहले से यह जानकारी जुटाने की योजना है कि किसी दिन कैंची धाम में कितने लोग पहुंचेंगे और आसपास के क्षेत्रों में उनके ठहरने के लिए कितनी व्यवस्था उपलब्ध है। नैनीताल, भीमताल और मुक्तेश्वर क्षेत्र में उपलब्ध होटल-होमस्टे क्षमता का भी आकलन किया जा रहा है। इससे भीड़, यातायात और सुरक्षा व्यवस्था को पहले से तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

इसके साथ ही कैंची धाम में प्रवेश और निकासी के लिए अलग-अलग व्यवस्था बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं। वर्तमान में एक ही मुख्य गेट से प्रवेश और निकासी होने के कारण भीड़ का दबाव बढ़ जाता है। प्रशासन का मानना है कि अलग-अलग रास्ते होने से भीड़ को नियंत्रित करने और यातायात को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी। वीकेंड और विशेष अवसरों से पहले पुलिस, प्रशासन, परिवहन विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों को मिलकर यातायात, पार्किंग और शटल सेवा की योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

कौसानी जैसे पर्यटन स्थलों के लिए यह समस्या इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां का कारोबार मुख्य रूप से बाहर से आने वाले पर्यटकों पर निर्भर करता है। होटल, होमस्टे, टैक्सी, रेस्टोरेंट, स्थानीय दुकानें और पर्यटन से जुड़े छोटे कारोबारी पर्यटकों की संख्या पर सीधे निर्भर रहते हैं। यदि पर्यटक यात्रा को छोटा करते हैं या बुकिंग रद्द करके वापस लौटते हैं तो इसका असर केवल होटल मालिक तक सीमित नहीं रहता, बल्कि स्थानीय स्तर पर जुड़े कई परिवारों की आमदनी प्रभावित होती है।

कैंची धाम की बढ़ती लोकप्रियता ने कुमाऊं के पर्यटन को लंबे समय तक फायदा पहुंचाया है। वर्ष 2025 में पर्यटन विभाग से जुड़े एक अध्ययन में भी सामने आया था कि कैंची धाम आने वाले श्रद्धालुओं में बड़ी संख्या उत्तराखंड के बाहर से आने वालों की है और काफी लोग आसपास के पर्यटन स्थलों का भी भ्रमण करते हैं। हालांकि हालिया समय में बढ़ती भीड़ और जाम की समस्या इस पर्यटन प्रवाह को प्रभावित करने लगी है।

पहले कैंची धाम आने वाले पर्यटक दर्शन के बाद नैनीताल, भीमताल, मुक्तेश्वर, कौसानी और अल्मोड़ा जैसे स्थलों की ओर निकल जाते थे। इससे पूरे कुमाऊं क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियां बढ़ती थीं। अब यदि यातायात जाम के कारण पर्यटक बीच रास्ते से लौटने लगते हैं या यात्रा कार्यक्रम छोटा कर देते हैं, तो इसका प्रभाव व्यापक स्तर पर दिखाई देगा। यही वजह है कि स्थानीय पर्यटन कारोबारी चाहते हैं कि कैंची धाम क्षेत्र में भीड़ नियंत्रण के साथ-साथ वैकल्पिक मार्ग, पार्किंग और शटल परिवहन की व्यवस्था जल्द मजबूत की जाए।

प्रशासन की ओर से कैंची धाम बाईपास के काम में तेजी लाने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके अलावा भीमताल, विकास भवन, भवाली और मस्जिद तिराहे जैसे स्थानों से शटल सेवा संचालित करने पर भी विचार किया गया है। इससे निजी वाहनों का दबाव कम करने और कैंची धाम की ओर जाने वाले श्रद्धालुओं को नियंत्रित तरीके से पहुंचाने में मदद मिल सकती है।

फिलहाल कौसानी के पर्यटन कारोबारी इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि आने वाले दिनों में कैंची धाम क्षेत्र की यातायात व्यवस्था कितनी सुधरती है। यदि जाम की समस्या लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका असर आने वाले पर्यटन सीजन की बुकिंग पर भी पड़ सकता है। वहीं यदि प्रशासन भीड़ को नियंत्रित करने, पार्किंग व्यवस्था सुधारने, शटल सेवा बढ़ाने और वैकल्पिक मार्ग विकसित करने में सफल रहता है तो पर्यटकों का भरोसा फिर से मजबूत हो सकता है।

कुल मिलाकर कैंची धाम में बढ़ती आस्था और पर्यटकों की संख्या जहां उत्तराखंड के पर्यटन के लिए सकारात्मक संकेत है, वहीं इसके साथ पैदा हो रही यातायात समस्या अब चुनौती बनती जा रही है। कौसानी जैसे दूर के पर्यटन स्थलों तक इसका असर पहुंचना बताता है कि भीड़ प्रबंधन केवल एक धार्मिक स्थल की व्यवस्था का विषय नहीं रह गया है, बल्कि पूरे कुमाऊं के पर्यटन कारोबार और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जुड़ा मामला बन चुका है। अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को संभालते हुए उन पर्यटकों की यात्रा भी सुगम रखी जाए, जो कैंची धाम के साथ कौसानी और दूसरे पर्यटन स्थलों का भ्रमण करने उत्तराखंड पहुंच रहे हैं।

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