उत्तराखंड में पुरुष मृत्यु दर अधिक, स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में हर 10 में 6 मौत पुरुषों की सामने आईं

उत्तराखंड में हर 10 में से करीब 6 मौतें पुरुषों की हो रही हैं। 58 हजार में 36 हजार पुरुष शामिल हैं। विशेषज्ञ इसे जोखिम भरी जीवनशैली और तनाव से जोड़ते हैं।

उत्तराखंड में जन्म-मृत्यु आंकड़ों के अनुसार हर 10 में से लगभग 6 मौतें पुरुषों की हो रही हैं। एक वर्ष में 58 हजार मौतों में 36 हजार से अधिक पुरुष शामिल हैं, जो जीवनशैली और जोखिम भरे व्यवहार की ओर संकेत करता है।

उत्तराखंड मृत्यु आंकड़े रिपोर्ट में देहरादून के स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े चौंकाने वाला ट्रेंड दिखाते हैं, जहां हर वर्ष कुल लगभग 58,465 मौतों में 36,232 पुरुष और 22,233 महिलाएं शामिल हैं। यानी महिलाओं की तुलना में पुरुषों की मृत्यु दर काफी अधिक है। विशेषज्ञ इसे जोखिम भरी जीवनशैली, तनाव, काम का दबाव और समय पर इलाज न कराने जैसी वजहों से जोड़ रहे हैं, जिससे यह असंतुलन हर आयु वर्ग में दिखाई देता है।

उत्तराखंड में मौतों के आंकड़ों का असंतुलन: पुरुषों की अधिक मृत्यु का सच

देहरादून से सामने आए जन्म-मृत्यु के आंकड़े एक गंभीर और चौंकाने वाली तस्वीर पेश करते हैं। राज्य में हर साल औसतन 58 हजार से अधिक मौतें दर्ज की जाती हैं, जिनमें लगभग 36 हजार पुरुष और करीब 22 हजार महिलाएं शामिल हैं। यानी प्रत्येक दस मौतों में लगभग छह पुरुषों की जान जा रही है, जो एक स्पष्ट असंतुलन को दर्शाता है।

यह अंतर केवल किसी एक उम्र या क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन के हर चरण में देखने को मिलता है। आंकड़े बताते हैं कि पुरुषों की मृत्यु दर लगभग हर आयु वर्ग में महिलाओं से अधिक है, जिससे यह सवाल उठता है कि इसके पीछे सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य से जुड़े कौन-कौन से कारण जिम्मेदार हैं।

हर उम्र में बढ़ता अंतर: जीवन के हर पड़ाव पर असमानता

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 15 से 24 वर्ष की उम्र में ही पुरुषों की मौतें महिलाओं से लगभग दोगुनी हैं। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, यह अंतर और भी स्पष्ट होता जाता है। 25 से 34 वर्ष में यह अंतर करीब 2.4 गुना तक पहुंच जाता है, जबकि 35 से 44 वर्ष के बीच यह लगभग तीन गुना तक दर्ज किया गया है।

45 से 54 वर्ष की आयु में भी पुरुषों की मृत्यु दर महिलाओं से लगभग 2.1 गुना अधिक पाई गई है। 55 से 64 वर्ष में यह अंतर फिर से दोगुना हो जाता है। यहां तक कि 70 वर्ष से अधिक उम्र में भी पुरुषों की मृत्यु संख्या महिलाओं से अधिक बनी रहती है, जो इस प्रवृत्ति की निरंतरता को दर्शाता है।

जीवनशैली और जोखिम भरे व्यवहार पर विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि इस असंतुलन के पीछे कई सामाजिक और व्यवहारिक कारण जिम्मेदार हैं। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एनएस बिष्ट के अनुसार, पुरुषों में जोखिम भरी जीवनशैली, अधिक तनाव, काम का दबाव और स्वास्थ्य को नजरअंदाज करने की प्रवृत्ति प्रमुख कारण हैं। समय पर इलाज न लेना और छोटी स्वास्थ्य समस्याओं को गंभीरता से न लेना भी स्थिति को और खराब करता है।

आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि गांव से लेकर शहर तक यह पैटर्न लगभग समान है। कुल 58,465 मौतों में 36,232 पुरुषों और 22,233 महिलाओं की मृत्यु दर्ज की गई है, जिसमें लगभग 14 हजार का अंतर सामने आता है। सबसे अधिक मौतें 70 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में दर्ज की गई हैं, जो बताता है कि वृद्धावस्था में भी यह असमानता बनी रहती है।

यह पूरी स्थिति केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि सामाजिक व्यवहार, स्वास्थ्य जागरूकता और जीवनशैली से जुड़ा एक गंभीर संकेत है, जिस पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

 

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