वाराणसी में गंगा चेतावनी बिंदु के पार पहुंची: 1574 लोगों ने छोड़े घर, अगस्त में 35 साल बाद रिकॉर्ड बारिश

: वाराणसी में गंगा चेतावनी बिंदु पार कर गई है। बाढ़ से 1574 लोगों ने घर छोड़े, 12 मोहल्लों में पानी पहुंचा। अगस्त में 35 साल बाद रिकॉर्ड बारिश हुई।
वाराणसी में गंगा चेतावनी बिंदु के पार पहुंची: 1574 लोगों ने छोड़े घर, अगस्त में 35 साल बाद रिकॉर्ड बारिश
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वाराणसी। गंगा और वरुणा नदी के बढ़ते जलस्तर ने वाराणसी में बाढ़ की चिंता बढ़ा दी है। लगातार बारिश और नदियों में उफान के चलते वरुणा किनारे बसे इलाकों में पानी पहुंच गया है। 1574 लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है। करीब 12 मोहल्ले बाढ़ के पानी की चपेट में हैं। कई परिवार राहत शिविरों में शरण ले चुके हैं, जबकि कुछ प्रभावित लोग रिश्तेदारों के घर या किराए के मकानों में चले गए हैं।

गंगा का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है। मंगलवार सुबह 8 बजे गंगा का जलस्तर 70.27 मीटर दर्ज किया गया, जो चेतावनी बिंदु को पार कर गया। इससे गंगा और वरुणा के किनारे बसे निचले इलाकों में खतरा बढ़ गया है। रात के समय गंगा करीब दो सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रही थी। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम जारी है।

बाढ़ के कारण वरुणा किनारे के 12 मोहल्लों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। कई जगहों पर लोगों के घरों और गलियों में पानी पहुंच गया। एहतियात के तौर पर कुछ प्रभावित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति भी बंद की गई है। राहत शिविरों में 150 से ज्यादा परिवारों के ठहरने की व्यवस्था की गई है। वहां प्रभावित लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है और बच्चों व बुजुर्गों की जरूरतों का भी ध्यान रखा जा रहा है।

गंगा का पानी बढ़ने से शहर के घाटों और आसपास के रास्तों पर भी असर पड़ा है। नगवां से अस्सी घाट और जगन्नाथ मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते पर बाढ़ का पानी पहुंचने से सामान्य आवागमन बाधित हो गया है। नगवां नाले के रास्ते पानी रामेश्वर मठ के पास तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है।

बाढ़ का असर वाराणसी के अंतिम संस्कार स्थलों पर भी पड़ा है। मणिकर्णिका घाट की गली में पानी भरने के बाद वहां नाव चलानी पड़ रही है। घाट तक पहुंचने के लिए लोगों को पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। हरिश्चंद्र घाट पर भी बढ़ते जलस्तर के कारण शवदाह स्थल को बार-बार बदलना पड़ रहा है। इससे अंतिम संस्कार के लिए आने वाले परिवारों की परेशानी बढ़ गई है।

वाराणसी में इस बार अगस्त का महीना बारिश के लिहाज से भी असाधारण रहा। मौसम संबंधी आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 में 448 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य बारिश करीब 245.1 मिलीमीटर होती है। यानी अगस्त में सामान्य से करीब 82 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई। यह अगस्त में करीब 35 साल बाद सबसे ज्यादा बारिश बताई जा रही है। हालांकि 1991 में अगस्त के दौरान 570.9 मिलीमीटर बारिश का रिकॉर्ड दर्ज हुआ था, जो अब भी ऐतिहासिक रिकॉर्ड है।

इस साल अगस्त की बारिश पिछले वर्ष की तुलना में भी अधिक रही। अगस्त 2025 में वाराणसी में करीब 412.1 मिलीमीटर बारिश हुई थी, जबकि इस साल आंकड़ा 448 मिलीमीटर तक पहुंच गया। इससे पहले 2024 में अगस्त की बारिश करीब 253.7 मिलीमीटर थी। यानी पिछले कुछ वर्षों के मुकाबले इस बार मानसून के अंतिम चरण में बारिश काफी ज्यादा हुई है।

पूरे मानसून सीजन पर नजर डालें तो 1 जून से 31 अगस्त के बीच वाराणसी में 633.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। इस अवधि में सामान्य बारिश करीब 615 मिलीमीटर मानी जाती है। यानी सीजन की कुल बारिश सामान्य से लगभग 3 प्रतिशत अधिक है। खास बात यह है कि जुलाई में बारिश कम रहने के बाद अगस्त में हुई लगातार बारिश ने पूरे सीजन के आंकड़े को ऊपर पहुंचा दिया।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस बार बंगाल की खाड़ी में बार-बार बने निम्न दबाव क्षेत्रों और उत्तर प्रदेश के उत्तरी हिस्से में मानसून द्रोणिका के बने रहने से बारिश की गतिविधियां मजबूत हुईं। इसी वजह से अगस्त में लंबे समय तक बारिश का दौर बना रहा और नदियों के जलस्तर पर भी इसका असर पड़ा।

मौसम विभाग ने भी वाराणसी में बारिश को लेकर सतर्कता बरतने की जरूरत बताई है। उपलब्ध पूर्वानुमान में 31 अगस्त और 1 सितंबर को भारी बारिश की चेतावनी दी गई थी। इसके बाद भी बादल छाए रहने और बारिश या गरज-चमक की संभावना जताई गई है। ऐसे में नदी और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए अगले कुछ दिन महत्वपूर्ण हैं।

लगातार बढ़ते जलस्तर के बीच प्रशासन की चुनौती प्रभावित परिवारों को सुरक्षित रखने के साथ-साथ जलभराव वाले इलाकों में आवागमन और बिजली व्यवस्था को नियंत्रित करना है। जिन इलाकों में पानी तेजी से बढ़ रहा है, वहां लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कार्रवाई की जा रही है। राहत शिविरों में रह रहे परिवारों के लिए भोजन और आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था भी की जा रही है।

गंगा के बढ़ते जलस्तर ने घाटों पर आने-जाने वाले लोगों की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं। प्रशासन और स्थानीय स्तर पर लोगों से नदी के किनारे जाने से बचने और जलभराव वाले रास्तों पर सावधानी बरतने की अपील की जा रही है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों को बाढ़ प्रभावित इलाकों से दूर रखने की जरूरत है।

फिलहाल वाराणसी में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रयागराज और मिर्जापुर में गंगा की बढ़ोतरी की रफ्तार कम होने से वाराणसी में भी आने वाले समय में जलस्तर की वृद्धि कुछ धीमी पड़ने की उम्मीद जताई गई है। हालांकि जब तक जलस्तर स्थिर होकर नीचे नहीं आता, तब तक निचले इलाकों में खतरा बना रहेगा।

इस बार अगस्त में हुई रिकॉर्ड बारिश ने जहां किसानों और जलस्रोतों के लिए पानी की कमी की चिंता कम की है, वहीं लगातार बारिश और नदियों के उफान ने वाराणसी जैसे नदी किनारे बसे शहर में बाढ़ का खतरा बढ़ा दिया है। 1574 लोगों का घर छोड़ना, 12 मोहल्लों में पानी पहुंचना और गंगा का चेतावनी बिंदु पार करना इस समय शहर में बाढ़ की गंभीरता को साफ तौर पर दिखाता है। आने वाले दिनों में बारिश और गंगा के जलस्तर में होने वाला बदलाव स्थिति की दिशा तय करेगा।

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