कौशांबी पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट: बेटे का शव खोज रहा पिता, बोला- सिर्फ पैर मिला 11 शवों का पोस्टमॉर्टम, 9 पुलिसकर्मी सस्पेंड

कौशांबी पटाखा फैक्ट्री विस्फोट में 11 लोगों की मौत हुई। पिता बेटे का शव तलाश रहा है। मुख्य आरोपी नौशाद गिरफ्तार और लापरवाही में पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई।
कौशांबी पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट: बेटे का शव खोज रहा पिता, बोला- सिर्फ पैर मिला 11 शवों का पोस्टमॉर्टम, 9 पुलिसकर्मी सस्पेंड
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उत्तर प्रदेश के कौशांबी में प्रयागराज-कौशांबी सीमा के पास अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट के बाद पूरा इलाका मातम में डूबा है। धमाका इतना तेज था कि फैक्ट्री पूरी तरह जमींदोज हो गई और आसपास के कई मकान भी क्षतिग्रस्त हो गए। हादसे में अब तक 11 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई लोग घायल हैं। मलबा हटाने का काम लगातार जारी है, क्योंकि आशंका है कि कुछ और लोग अब भी मलबे में दबे हो सकते हैं।

हादसे के बाद घटनास्थल पर अपनों की तलाश में पहुंचे परिजनों का दर्द दिल दहला देने वाला है। एक पिता अपने बेटे की तलाश में मलबे के आसपास भटकता रहा। उसने बताया कि उसे अभी तक बेटे का पूरा शव नहीं मिला है, सिर्फ पैर मिला है। परिवार को उम्मीद है कि बचाव दल मलबा हटाकर बेटे के बारे में पूरी जानकारी देगा। हादसे ने कई परिवारों को इस तरह उजाड़ दिया है कि परिजनों को अपने ही लोगों की पहचान करने के लिए शवों के अवशेष तलाशने पड़ रहे हैं।

सोमवार को हुए इस विस्फोट के बाद फैक्ट्री में लगातार धमाके होते रहे। आसपास रहने वाले लोगों के मुताबिक आवाज इतनी तेज थी कि कई किलोमीटर दूर तक धमाके की गूंज सुनाई दी। फैक्ट्री के आसपास मौजूद कुछ मकानों को भी नुकसान पहुंचा। विस्फोट के बाद इलाके में धुएं का गुबार छा गया और लोगों के बीच अफरा-तफरी मच गई। राहत और बचाव टीमों को शुरुआती दौर में लगातार हो रहे धमाकों और आग के कारण मलबे तक पहुंचने में भी परेशानी हुई।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, फायर ब्रिगेड और जिला प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं। एंबुलेंस के जरिए घायलों को अस्पताल भेजा गया। गंभीर रूप से घायल कई लोगों को प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक कुछ घायलों की हालत बेहद गंभीर थी और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया। इलाज के दौरान कुछ घायलों की मौत होने के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 11 तक पहुंची।

हादसे में मारे गए लोगों में बच्चे भी शामिल हैं। रिपोर्टों के अनुसार 11 मृतकों में 8 बच्चे बताए गए हैं। इस वजह से इलाके में गम का माहौल और गहरा गया है। कई परिवारों के एक से ज्यादा सदस्यों की मौत होने की बात भी सामने आई है। एक परिवार के चार बच्चों की मौत ने पूरे गांव को झकझोर दिया है। ऐसे परिवारों के सामने अब अपनों के अंतिम संस्कार से लेकर आगे की जिंदगी तक का संकट खड़ा हो गया है।

मलबे में अभी भी कुछ लोगों के दबे होने की आशंका के कारण राहत और बचाव अभियान जारी है। प्रशासन की टीमें मशीनों की मदद से मलबा हटाकर एक-एक हिस्से की जांच कर रही हैं। मृतकों की पहचान और पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। 11 शवों के पोस्टमॉर्टम की कार्रवाई की जा रही है, ताकि कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव परिजनों को सौंपे जा सकें।

इस बीच हादसे के मुख्य आरोपी और पटाखा फैक्ट्री संचालक नौशाद को पुलिस ने मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के मुताबिक नौशाद घटना के बाद शहर से बाहर भागने की कोशिश कर रहा था। मंगलवार तड़के करीब चार बजे चरवा थाना क्षेत्र के तेरह मील-सैयद सरावां मार्ग पर पुलिस टीम ने उसे घेर लिया। पुलिस का दावा है कि नौशाद ने फायरिंग की, जिसके जवाब में हुई कार्रवाई में उसके पैर में गोली लगी। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर अस्पताल में भर्ती कराया गया।

पुलिस ने इस मामले में फैक्ट्री संचालक नौशाद के अलावा उसके परिवार के अन्य सदस्यों समेत कुल छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। नौशाद की पत्नी और परिवार से जुड़े अन्य लोगों से भी पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि फैक्ट्री में किस तरह पटाखों का निर्माण और विस्फोटक सामग्री का भंडारण किया जा रहा था और लंबे समय तक इस अवैध गतिविधि पर निगरानी क्यों नहीं हो सकी।

हादसे के बाद पुलिस विभाग पर भी गंभीर सवाल उठे हैं। अवैध पटाखा फैक्ट्री के संचालन और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के मामले में पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच शुरू कर दी गई है। लापरवाही के आरोप में इंस्पेक्टर समेत कई पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है। अलग-अलग रिपोर्टों में निलंबित पुलिसकर्मियों की संख्या 7 से 9 तक बताई गई है, जबकि ताजा अपडेट में 9 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की बात सामने आई है।

प्रशासनिक जांच में यह भी देखा जा रहा है कि फैक्ट्री को किस तरह संचालन की अनुमति मिली थी और लाइसेंस या अन्य अनुमति से संबंधित नियमों का पालन किया गया था या नहीं। शुरुआती जानकारी में यह बात सामने आई है कि फैक्ट्री काफी समय से संचालित हो रही थी और उसके लाइसेंस को लेकर भी सवाल हैं। घटना के बाद फैक्ट्री से करीब 400 मीटर दूर स्थित पटाखा गोदाम को भी बुलडोजर से ध्वस्त किए जाने की जानकारी सामने आई है।

यह घटना सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। बताया जा रहा है कि घटनास्थल मनौरी एयरफोर्स स्टेशन के बेहद करीब है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र के आसपास विस्फोटक सामग्री का इस तरह भंडारण और अवैध पटाखा निर्माण होना प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़ा करता है। अब जांच में यह भी देखा जाएगा कि संबंधित विभागों को इस गतिविधि की जानकारी थी या नहीं और यदि थी तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

विस्फोट की वास्तविक वजह अभी आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं हुई है। स्थानीय लोगों की ओर से अलग-अलग बातें सामने आई हैं। कुछ लोगों ने बिजली की लाइन या खंभे से जुड़ी घटना के बाद आग लगने की बात कही है, लेकिन प्रशासनिक जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि विस्फोट की शुरुआत कैसे हुई। जांच टीम फैक्ट्री में रखे पटाखों, बारूद और अन्य सामग्री के साथ-साथ बिजली व्यवस्था और सुरक्षा मानकों की भी जांच कर रही है।

विस्फोट का असर आसपास के इलाके की सामान्य व्यवस्था पर भी पड़ा। धमाके के कारण प्रयागराज-कानपुर रेल मार्ग की ओवरहेड विद्युत लाइन प्रभावित होने की जानकारी सामने आई, जिससे कुछ समय के लिए ट्रेनों का संचालन भी प्रभावित हुआ। रेलवे कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर व्यवस्था को बहाल किया। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि विस्फोट की तीव्रता कितनी ज्यादा रही होगी।

हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को घायलों के समुचित इलाज और प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हादसे पर दुख जताया है। मृतकों के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता देने की घोषणा की गई है।

फिलहाल सबसे बड़ी चिंता उन परिवारों की है जिनके अपने अब भी लापता हैं। मलबे के हर हिस्से को हटाते समय परिजनों की निगाहें बचाव दल पर टिकी रहती हैं। किसी को अपने बेटे की तलाश है तो किसी को भाई, पति या बच्चे की। एक पिता का यह कहना कि बेटे का पूरा शव नहीं मिला, सिर्फ पैर मिला है, हादसे की भयावहता को बयां करता है। राहत और बचाव दल की कोशिश है कि मलबे में अगर कोई और व्यक्ति फंसा है तो उसे जल्द से जल्द बाहर निकाला जा सके और सभी मृतकों की पहचान पूरी कर उनके परिवारों को सौंपा जा सके।

कौशांबी का यह हादसा सिर्फ एक फैक्ट्री में हुए विस्फोट तक सीमित नहीं है। इसने अवैध पटाखा निर्माण, विस्फोटक सामग्री के भंडारण, प्रशासनिक निगरानी और पुलिस की जवाबदेही पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि इतने बड़े पैमाने पर अवैध गतिविधि कैसे चलती रही और हादसे से पहले सुरक्षा एजेंसियों ने क्या कार्रवाई की थी। पुलिस ने मुख्य आरोपी नौशाद को गिरफ्तार कर लिया है और विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई शुरू हो चुकी है। अब जांच की दिशा इस बात पर होगी कि इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन शामिल था और हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों पर कितनी कड़ी कार्रवाई होती है

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