विधानसभा चुनावों में लगातार जीत से मजबूत हुआ NDA, राष्ट्रपति चुनाव 2027 में बढ़ सकती है बढ़त

हालिया विधानसभा चुनावों में लगातार जीत के बाद NDA की राजनीतिक स्थिति और मजबूत हो गई है। इसका असर राष्ट्रपति चुनाव 2027 में भी देखने को मिल सकता है, जहां गठबंधन

लोकसभा चुनाव 2024 में सीटों में कमी के बावजूद Bharatiya Janata Party के नेतृत्व वाले एनडीए को विधानसभा चुनावों में लगातार मिल रही सफलताओं से बड़ी राजनीतिक मजबूती मिलती दिख रही है।

नई दिल्ली: भारत की राष्ट्रीय राजनीति में 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद बदले समीकरण अब धीरे-धीरे नई दिशा लेते दिखाई दे रहे हैं। लोकसभा में सीटों की संख्या घटने के बावजूद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनावों में लगातार मजबूत प्रदर्शन कर अपनी राजनीतिक स्थिति को फिर से सुदृढ़ किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसका सीधा असर अगले राष्ट्रपति चुनाव पर पड़ सकता है।

हाल के विधानसभा चुनावों में एनडीए की सफलता ने न केवल राज्य स्तर पर उसकी पकड़ मजबूत की है, बल्कि राष्ट्रपति चुनाव के निर्वाचक मंडल में भी उसकी स्थिति को पहले से अधिक प्रभावशाली बना दिया है।

राष्ट्रपति चुनाव में कैसे बनता है निर्वाचक मंडल?

भारत में राष्ट्रपति का चुनाव सीधे जनता द्वारा नहीं किया जाता। इसके लिए एक विशेष निर्वाचक मंडल (Electoral College) बनाया जाता है। इस मंडल में संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य और सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के निर्वाचित विधायक शामिल होते हैं। मनोनीत सांसद इस प्रक्रिया का हिस्सा नहीं होते।

राष्ट्रपति चुनाव में सांसदों और विधायकों के वोट का मूल्य अलग-अलग होता है। जहां हर सांसद के वोट का मूल्य समान रहता है, वहीं विधायकों के वोट का मूल्य संबंधित राज्य की जनसंख्या के आधार पर तय किया जाता है। यह गणना 1971 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार की जाती है।

उत्तर प्रदेश की भूमिका सबसे अहम

राष्ट्रपति चुनाव में सबसे ज्यादा प्रभाव उत्तर प्रदेश का माना जाता है। यहां एक विधायक के वोट का मूल्य 208 है, जो देश में सबसे अधिक है। तुलना करें तो सिक्किम के एक विधायक के वोट का मूल्य केवल 7 है। इसी वजह से उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्यों की विधानसभा संरचना राष्ट्रपति चुनाव में बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। राजनीतिक दलों के लिए इन राज्यों में मजबूत उपस्थिति रणनीतिक लाभ देती है।

2024 के लोकसभा चुनाव में Bharatiya Janata Party की सीटें 303 से घटकर 240 रह गई थीं। इसके चलते पार्टी को सरकार बनाने के लिए सहयोगी दलों जैसे Telugu Desam Party और Janata Dal (United) पर निर्भर रहना पड़ा। उस समय विपक्षी दलों ने दावा किया था कि बीजेपी की राजनीतिक बढ़त कमजोर पड़ रही है और गठबंधन सरकार लंबे समय तक स्थिर नहीं रह पाएगी। हालांकि बाद के विधानसभा चुनावों में एनडीए के प्रदर्शन ने इन दावों को काफी हद तक चुनौती दी है।

महाराष्ट्र, बिहार और बंगाल में NDA का बढ़ता प्रभाव

हालिया विधानसभा चुनावों में एनडीए ने कई महत्वपूर्ण राज्यों में मजबूत पकड़ बनाई है। महाराष्ट्र में 288 सदस्यीय विधानसभा में गठबंधन की ताकत बढ़कर 237 तक पहुंच गई है। वहीं बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा में एनडीए का आंकड़ा 202 तक पहुंच चुका है। पश्चिम बंगाल में भी बीजेपी और उसके सहयोगियों की स्थिति पहले की तुलना में काफी मजबूत हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इन राज्यों में बढ़ती विधानसभा ताकत राष्ट्रपति चुनाव में निर्णायक साबित हो सकती है।

हरियाणा विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी ने मजबूत प्रदर्शन कर राजनीतिक संदेश दिया कि पार्टी अब भी राज्य स्तर पर मजबूत जनाधार बनाए हुए है। यह जीत पार्टी के लिए मनोवैज्ञानिक और रणनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

राष्ट्रपति चुनाव 2027 में NDA को कैसे मिलेगा फायदा?

राष्ट्रपति चुनाव में जीत के लिए केवल लोकसभा संख्या ही पर्याप्त नहीं होती। राज्यों की विधानसभाओं में मजबूत उपस्थिति भी उतनी ही जरूरी होती है। यही वजह है कि विधानसभा चुनावों में लगातार जीत ने एनडीए की स्थिति को मजबूत बनाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौजूदा राजनीतिक समीकरण इसी तरह बने रहते हैं, तो अगले राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए को अपेक्षाकृत आसान स्थिति मिल सकती है। खासतौर पर उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार जैसे बड़े राज्यों में गठबंधन की मजबूत मौजूदगी विपक्ष के लिए चुनौती बन सकती है।

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