पश्चिम बंगाल की रेजीनगर और नंदीग्राम विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की मतगणना में भाजपा उम्मीदवार बढ़त बनाए हुए हैं। रेजीनगर में सखाराव सरकार आगे हैं, जबकि नंदीग्राम में हसीरानी रथ बढ़त पर हैं। अंतिम नतीजों की घोषणा का इंतजार है।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की मतगणना के दौरान भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार बढ़त बनाए हुए हैं। शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को सुबह 8 बजे से शुरू हुई वोटों की गिनती पर राजनीतिक दलों और समर्थकों की नजर है। शुरुआती रुझानों में रेजीनगर से भाजपा के सखाराव सरकार और नंदीग्राम से हसीरानी रथ आगे चल रहे हैं। रेजीनगर में सखाराव सरकार की बढ़त करीब 41 हजार वोटों तक पहुंचने की खबरें आई हैं। हालांकि, मतगणना के दौरान आंकड़े बदल सकते हैं और अंतिम परिणाम की पुष्टि चुनाव आयोग की आधिकारिक घोषणा से ही होगी।
इन दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान हुआ था। चुनाव में उच्च मतदान प्रतिशत दर्ज किया गया और सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती की गई थी। नंदीग्राम और रेजीनगर के नतीजे इसलिए भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं, क्योंकि इन सीटों पर उपचुनाव की जरूरत मौजूदा विधायकों के दूसरी सीट चुनने और इस्तीफे के बाद पड़ी थी।
रेजीनगर में सखाराव सरकार की बड़ी बढ़त
मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर विधानसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार सखाराव सरकार शुरुआती मतगणना में आगे चल रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उनकी बढ़त करीब 41 हजार वोटों तक पहुंच गई थी। आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के उम्मीदवार गुलाम नबी आजाद, जो पार्टी प्रमुख हुमायूं कबीर के बेटे हैं, पीछे चल रहे हैं।
रेजीनगर का चुनाव खास तौर पर चर्चा में रहा, क्योंकि यहां हुमायूं कबीर की राजनीतिक भूमिका और उनके परिवार की उम्मीदवारी पर ध्यान केंद्रित था। कबीर ने पहले इस सीट का प्रतिनिधित्व किया था, लेकिन दूसरी सीट को प्राथमिकता देने के बाद रेजीनगर में उपचुनाव की स्थिति बनी।
चुनाव से पहले इस क्षेत्र में राजनीतिक मुकाबला तीखा रहा। मतदान के दिन भी विवाद और आरोप-प्रत्यारोप सामने आए थे। कांग्रेस ने चुनावी अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए दोनों सीटों पर दोबारा मतदान की मांग की थी। इन आरोपों को चुनावी प्रक्रिया से जुड़े विवाद के रूप में देखा जाना चाहिए; इनकी पुष्टि संबंधित अधिकारियों और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करती है।
नंदीग्राम में हसीरानी रथ आगे
पूर्वी मेदिनीपुर जिले की नंदीग्राम सीट पर भाजपा उम्मीदवार हसीरानी रथ बढ़त बनाए हुए हैं। शुरुआती दौर की रिपोर्टों में वह कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान से आगे बताई गईं। बाद की कुछ रिपोर्टों में उनकी बढ़त काफी अधिक होने की जानकारी दी गई, लेकिन अलग-अलग समय पर जारी आंकड़ों में अंतर है। इसलिए अंतिम अंतर की पुष्टि के लिए चुनाव आयोग के नवीनतम आंकड़ों को देखना जरूरी है।
नंदीग्राम की राजनीतिक अहमियत राज्य की राजनीति में इसके पुराने प्रभाव से भी जुड़ी है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 2026 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से जीत दर्ज की थी। बाद में उन्होंने भवानीपुर सीट अपने पास रखी और नंदीग्राम छोड़ दी, जिसके बाद यहां उपचुनाव कराया गया।
भाजपा ने इस सीट से हसीरानी रथ को उम्मीदवार बनाया, जबकि कांग्रेस ने मिलन प्रधान को मैदान में उतारा। मतगणना के दौरान भाजपा की बढ़त पर पार्टी समर्थकों की नजर बनी हुई है। हालांकि, रुझानों को अंतिम नतीजे के रूप में पेश करना सही नहीं होगा।
दोनों सीटों पर क्यों है राजनीतिक नजर?
नंदीग्राम और रेजीनगर के उपचुनाव राज्य की राजनीति में अलग-अलग कारणों से महत्वपूर्ण हैं। नंदीग्राम का संबंध शुभेंदु अधिकारी की राजनीतिक स्थिति से जुड़ा है, जबकि रेजीनगर में हुमायूं कबीर और उनकी पार्टी AJUP की भूमिका चर्चा में रही है।
रेजीनगर में भाजपा की बढ़त की खबरें इसलिए भी ध्यान खींच रही हैं, क्योंकि इस सीट पर मुकाबला कई दलों और उम्मीदवारों के बीच था। वहीं, नंदीग्राम में भाजपा उम्मीदवार की स्थिति को पार्टी के स्थानीय संगठन और विपक्षी दलों की चुनावी रणनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है।
हालांकि, दो विधानसभा सीटों के उपचुनाव से पूरे राज्य के राजनीतिक रुझान पर निर्णायक निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। मतदाताओं की स्थानीय प्राथमिकताएं, उम्मीदवारों की पहचान, क्षेत्रीय मुद्दे और मतदान के दौरान बने समीकरण परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं।
6 अक्टूबर को हुआ था मतदान
दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान कराया गया था। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, शाम 5 बजे तक नंदीग्राम में 79.39 प्रतिशत और रेजीनगर में 78.42 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। मतदान के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती की गई थी।
उच्च मतदान प्रतिशत के बावजूद चुनाव के दौरान कुछ घटनाओं और शिकायतों की खबरें आईं। कांग्रेस ने दोनों सीटों पर कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए पुनर्मतदान की मांग की थी। दूसरी ओर, चुनाव आयोग की ओर से मतदान को कुल मिलाकर शांतिपूर्ण बताया गया, हालांकि कुछ घटनाओं का उल्लेख भी किया गया था।
मतदान प्रतिशत अपने आप में किसी दल की जीत या हार का संकेत नहीं देता। अंतिम परिणाम इस बात पर निर्भर करेगा कि अलग-अलग उम्मीदवारों को कितने वोट मिले और सभी मतों की गिनती पूरी होने पर उनकी स्थिति क्या रही।
हुमायूं कबीर के बेटे की स्थिति पर नजर
रेजीनगर में गुलाम नबी आजाद की उम्मीदवारी ने मुकाबले को अतिरिक्त राजनीतिक महत्व दिया। वह AJUP प्रमुख हुमायूं कबीर के बेटे हैं। कबीर के इस सीट को छोड़ने के बाद उपचुनाव कराया गया था और उनकी पार्टी ने गुलाम नबी आजाद को उम्मीदवार बनाया।
मतगणना के शुरुआती रुझानों में गुलाम नबी आजाद भाजपा के सखाराव सरकार से पीछे बताए गए। यदि यह बढ़त अंतिम नतीजों में भी कायम रहती है, तो इसका असर रेजीनगर में AJUP की चुनावी स्थिति पर पड़ सकता है। फिलहाल, अंतिम नतीजे आने तक किसी उम्मीदवार की जीत या हार को निश्चित नहीं माना जाना चाहिए।
मतगणना के दौरान आगे क्या देखना होगा?
चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर रेजीनगर और नंदीग्राम के लिए मतगणना की स्थिति उपलब्ध कराई जा रही है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि पोर्टल पर दर्ज जानकारी रिटर्निंग अधिकारियों द्वारा मतगणना केंद्रों से अपडेट की जाती है और अंतिम आंकड़े निर्धारित प्रपत्र में साझा किए जाएंगे।
इसलिए रुझानों में बढ़त का अंतर समय के साथ बदल सकता है। अंतिम परिणाम के लिए सभी दौरों की गिनती पूरी होने, डाक मतपत्रों सहित संबंधित मतों का मिलान और चुनाव अधिकारियों की औपचारिक घोषणा महत्वपूर्ण होगी।
निष्कर्ष: पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर सीटों पर मतगणना के दौरान भाजपा उम्मीदवार आगे चल रहे हैं। रेजीनगर में सखाराव सरकार और नंदीग्राम में हसीरानी रथ की बढ़त पर राजनीतिक दलों की नजर है। हालांकि, अंतिम जीत की पुष्टि चुनाव आयोग के आधिकारिक परिणाम घोषित होने के बाद ही की जा सकेगी।










