West Bengal में राज्यसभा चुनाव की सुगबुगाहट, उम्मीदवारों के नामों पर मंथन तेज

पश्चिम बंगाल में राज्यसभा चुनाव की सियासी हलचल तेज, TMC और BJP ने उम्मीदवारों की रणनीति तैयार की। निर्विरोध जीत की संभावना, विधानसभा चुनाव से पहले अहम।

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले राज्यसभा चुनाव की सियासी हलचल तेज हो गई है। TMC और BJP ने उम्मीदवारों की रणनीति तय कर ली है। 5 सीटों में से 4 TMC और 1 BJP के लिए सुरक्षित मानी जा रही हैं।

West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मी एक बार फिर तेज हो गई है। 17वीं विधानसभा का अंतिम बजट सत्र समाप्त होते ही अब राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी गतिविधियां बढ़ने लगी हैं। राज्य की पांच राज्यसभा सीटों के लिए तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। भले ही मौजूदा संख्या बल के आधार पर तस्वीर लगभग साफ मानी जा रही हो, लेकिन चुनावी तैयारी में कोई भी दल ढिलाई के मूड में नहीं है।

बजट सत्र खत्म, लेकिन राजनीति नहीं थमी

शनिवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा का अंतिम बजट सत्र खत्म हुआ। इसके साथ ही सदन की औपचारिक कार्यवाही भले ही थम गई हो, लेकिन राजनीतिक हलकों में हलचल और तेज हो गई है। एक तरफ जहां अगले एक महीने के भीतर विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राज्यसभा चुनाव ने भी सभी दलों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी भाजपा के विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय हो गए हैं। जनसंपर्क अभियान के साथ-साथ पार्टी नेतृत्व से लगातार संवाद किया जा रहा है, ताकि आने वाले हर राजनीतिक घटनाक्रम के लिए पूरी तैयारी रहे।

अप्रैल 2026 में खत्म होगा पांच सांसदों का कार्यकाल

अप्रैल 2026 में राज्यसभा की कुल 37 सीटों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इनमें से पांच सीटें पश्चिम बंगाल से जुड़ी हैं। इन सीटों पर चुनाव बंगाल विधानसभा के विधायकों के जरिए होना है। यही वजह है कि विधानसभा में मौजूद संख्या बल इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाने वाला है।

जिन सांसदों का कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है, उनमें तृणमूल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी, साकेत गोखले और ऋतब्रत बनर्जी शामिल हैं। इसके अलावा माकपा नेता, वरिष्ठ अधिवक्ता और कोलकाता के पूर्व मेयर विकास रंजन भट्टाचार्य का कार्यकाल भी इसी अवधि में खत्म हो रहा है। वहीं, मौसुम बेनजीर नूर के इस्तीफे के बाद एक सीट पहले से ही रिक्त है।

विधानसभा के गणित ने किया तस्वीर साफ

बंगाल विधानसभा में मौजूदा संख्या बल को देखते हुए इन पांच राज्यसभा सीटों में से चार पर तृणमूल कांग्रेस और एक पर भाजपा की जीत लगभग तय मानी जा रही है। सत्तारूढ़ दल के पास स्पष्ट बहुमत है, जबकि भाजपा मुख्य विपक्षी दल के रूप में एक सीट हासिल करने की स्थिति में है।

इसी गणित को ध्यान में रखते हुए दोनों पार्टियों ने अपने विधायकों को पहले ही सतर्क कर दिया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, जैसे ही राज्यसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होगी, विधायकों से औपचारिक संपर्क शुरू कर दिया जाएगा।

नामांकन प्रक्रिया पर खास नजर

राज्यसभा चुनाव में नामांकन प्रक्रिया बेहद अहम मानी जाती है। नियमों के अनुसार, प्रत्येक उम्मीदवार के लिए कम से कम 10 प्रस्तावक और 10 समर्थक विधायकों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं। किसी भी तरह की तकनीकी गलती से बचने के लिए आमतौर पर एक प्रत्याशी के लिए कई नामांकन पत्र दाखिल किए जाते हैं।

सूत्रों के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस अपने चार प्रत्याशियों के लिए 200 से अधिक विधायकों को नामांकन प्रक्रिया में शामिल कर सकती है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी नामांकन तकनीकी कारणों से खारिज न हो। वहीं भाजपा भी अपने 65 विधायकों के जरिए एक सीट के लिए कई नामांकन दाखिल करने की रणनीति पर काम कर रही है।

निर्विरोध निर्वाचन की पूरी संभावना

विधानसभा सचिवालय से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि अधिसूचना जारी होते ही पूरी प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ेगी। चूंकि दोनों प्रमुख दलों की संख्या बल स्पष्ट है, इसलिए इस बार मतदान की नौबत आने की संभावना बेहद कम है।

सूत्रों के मुताबिक, प्रत्येक उम्मीदवार को कम से कम 50 विधायकों के समर्थन की जरूरत होती है। तृणमूल और भाजपा दोनों के पास अपने-अपने उम्मीदवारों के लिए पर्याप्त संख्या मौजूद है। ऐसे में स्क्रूटनी के बाद प्रत्याशियों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए जाने की पूरी संभावना जताई जा रही है।

विधानसभा चुनाव से पहले क्यों अहम है राज्यसभा चुनाव

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव भले ही सीधे जनता के वोट से न होते हों, लेकिन विधानसभा चुनाव से पहले इनका खास राजनीतिक संदेश होता है। राज्यसभा के जरिए पार्टियां अपने भरोसेमंद नेताओं को संसद भेजती हैं और संगठनात्मक संतुलन भी साधती हैं।

तृणमूल कांग्रेस के लिए यह चुनाव इसलिए भी अहम है, क्योंकि पार्टी नेतृत्व यह दिखाना चाहता है कि विधानसभा में उसकी पकड़ मजबूत है। वहीं भाजपा के लिए एक सीट जीतना भी मनोवैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब पार्टी बंगाल में अपनी राजनीतिक जमीन और मजबूत करने की कोशिश में जुटी है।

उम्मीदवारों के नामों पर मंथन तेज

हालांकि अभी तक किसी भी दल ने आधिकारिक तौर पर अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित नहीं किए हैं, लेकिन अंदरखाने मंथन तेज हो चुका है। तृणमूल कांग्रेस अपने मौजूदा सांसदों को दोबारा मौका दे सकती है, जबकि भाजपा नए और संगठनात्मक रूप से मजबूत चेहरे पर दांव लगा सकती है।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि उम्मीदवार चयन में क्षेत्रीय संतुलन, संगठन में भूमिका और राजनीतिक अनुभव जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जा रहा है।

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