Winter Olympics 2026: यूक्रेनी एथलीट बनाम IOC, जानिए हेलमेट पर क्यों छिड़ा विवाद

Winter Olympics 2026 में यूक्रेनी एथलीट और IOC के बीच हेलमेट को लेकर विवाद क्यों हुआ? जानें पूरा मामला, नियम और इस विवाद के पीछे की असली वजह। ओलंपिक और

मिलानो-कोर्टिना शीतकालीन ओलंपिक 2026 में एक हेलमेट को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। यूक्रेन के स्केलेटन रेसर व्लादिस्लाव हेरास्केविच ने आरोप लगाया है कि अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने उन्हें ऐसा हेलमेट पहनने से रोक दिया है, जिस पर युद्ध में मारे गए यूक्रेनी खिलाड़ियों की तस्वीरें बनी हुई हैं।

स्पोर्ट्स न्यूज़: मिलानो-कोर्टिना शीतकालीन ओलंपिक 2026 में एक हेलमेट को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। यूक्रेन के स्केलेटन एथलीट व्लादिस्लाव हेरास्केविच का आरोप है कि अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) ने उन्हें युद्ध में मारे गए यूक्रेनी खिलाड़ियों की तस्वीरों वाला हेलमेट पहनने से रोक दिया है। IOC ने इस फैसले के लिए ओलंपिक चार्टर के नियम 50 का हवाला दिया है, जो खेल स्थलों पर राजनीतिक संदेशों पर रोक लगाता है।

27 वर्षीय हेरास्केविच का कहना है कि उनके लिए यह हेलमेट केवल एक डिज़ाइन नहीं, बल्कि उन खिलाड़ियों को श्रद्धांजलि है जिन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध में अपनी जान गंवाई। उन्होंने इस फैसले को चुनौती देने और आधिकारिक अपील करने की बात कही है।

IOC का पक्ष: नियम 50 का हवाला

रॉयटर्स से बातचीत में हेरास्केविच ने बताया कि IOC के एक प्रतिनिधि ने एथलीट्स विलेज में आकर उन्हें यह निर्णय सुनाया। उनके अनुसार, IOC ने कहा कि हेलमेट पर लगी तस्वीरें ओलंपिक चार्टर के नियम 50.2 का उल्लंघन करती हैं। नियम 50.2 के तहत ओलंपिक स्थलों—जैसे स्टेडियम, ट्रेनिंग वेन्यू और एथलीट्स विलेज—में किसी भी तरह के राजनीतिक, धार्मिक या नस्लीय प्रचार पर प्रतिबंध है। IOC का मानना है कि युद्ध से जुड़े संदेश, भले ही वे श्रद्धांजलि के रूप में हों, इस नियम के दायरे में आते हैं।

हालांकि, IOC ने अभी तक सार्वजनिक रूप से यह पुष्टि नहीं की है कि यह प्रतिबंध ट्रेनिंग और प्रतियोगिता दोनों पर लागू होगा, जैसा कि हेरास्केविच ने दावा किया है।

हेलमेट में क्या था खास?

हेरास्केविच के हेलमेट पर उन यूक्रेनी एथलीटों के चेहरे बने थे, जो 2022 में रूस के आक्रमण के बाद से मारे गए हैं। इनमें कुछ ओलंपियन और यूथ ओलंपिक पदक विजेता भी शामिल थे। सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में हेरास्केविच ने कहा, “यह सिर्फ कुछ तस्वीरें हैं—हमने इससे कहीं ज्यादा खिलाड़ी खोए हैं।” उनके अनुसार, यह हेलमेट दुनिया का ध्यान युद्ध और उसके मानवीय प्रभावों की ओर खींचने का प्रयास था।

IOC की रोक के बावजूद हेरास्केविच अपने फैसले पर अडिग हैं। उन्होंने कहा है कि वह आधिकारिक तौर पर अपील करेंगे और हेलमेट पहनने की अनुमति लेने की कोशिश जारी रखेंगे। उन्होंने अपने पोस्ट में यह भी लिखा कि यह प्रतिबंध उनकी ट्रेनिंग और मुकाबले—दोनों पर लागू किया गया है। उनके समर्थकों का कहना है कि यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और खेल के मानवीय पक्ष से जुड़ा है।

ओलंपिक और राजनीतिक संदेश: पुराना विवाद

यह पहली बार नहीं है जब ओलंपिक में नियम 50 को लेकर विवाद हुआ हो। इससे पहले भी एथलीटों द्वारा प्रतीकात्मक इशारे, आर्मबैंड, संदेश या झंडे दिखाने पर बहस हो चुकी है। IOC का रुख हमेशा से रहा है कि ओलंपिक खेलों को राजनीतिक मंच बनने से बचाया जाए। वहीं, कई एथलीट और मानवाधिकार समूह मानते हैं कि खेल पूरी तरह राजनीति से अलग नहीं हो सकता, खासकर जब युद्ध और मानवीय संकट की बात हो।

यह हेरास्केविच का तीसरा शीतकालीन ओलंपिक है। वह लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यूक्रेन की स्थिति को लेकर मुखर रहे हैं। हाल ही में मिलान में हुई ओपनिंग सेरेमनी में उन्होंने 46 सदस्यीय यूक्रेनी दल का नेतृत्व किया था। वह कई बार सार्वजनिक रूप से युद्ध के प्रभावों और अपने देश के खिलाड़ियों के संघर्षों के बारे में बोल चुके हैं।

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