Women’s Day 2026: भारतीय महिलाओं ने इक्विटी MF को चुना, FD में निवेश घटकर हुआ 20%

Women’s Day 2026: भारतीय महिलाओं ने इक्विटी MF को चुना, FD में निवेश घटकर हुआ 20%

रिपोर्ट बताती है कि भारतीय महिलाएं सुरक्षित FD से हटकर इक्विटी म्युचुअल फंड, PMS और AIF में निवेश बढ़ा रही हैं। वे लंबी अवधि, लक्ष्य आधारित पोर्टफोलियो और लेगेसी प्लानिंग पर अधिक ध्यान दे रही हैं।

Women’s Day 2026: भारतीय महिला निवेशक पिछले कुछ वर्षों में पारंपरिक और सुरक्षित निवेश विकल्पों से धीरे-धीरे हटकर इक्विटी म्युचुअल फंड और वैकल्पिक निवेश विकल्पों की ओर बढ़ रही हैं। Equirus Wealth की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में महिलाओं का फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में निवेश लगभग 45 फीसदी से घटकर 20 फीसदी रह गया है, जबकि इक्विटी म्युचुअल फंड में निवेश तेजी से बढ़कर लगभग 10 फीसदी से 32 फीसदी तक पहुंच गया है। यह बदलाव महिलाओं की वित्तीय समझ, जोखिम लेने की क्षमता और लंबी अवधि के निवेश दृष्टिकोण को दर्शाता है।

महिलाओं में बढ़ता भरोसा और लंबी अवधि की सोच

रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, अब लगभग 75-90 फीसदी महिला निवेशक बाजार में गिरावट के समय घबराकर निवेश निकालने के बजाय उसे बनाए रखती हैं। वहीं करीब 55 फीसदी महिलाएं ऐसे समय में चुनिंदा रूप से अतिरिक्त निवेश भी करती हैं। यह दर्शाता है कि महिला निवेशक अब ‘सेफ्टी-फर्स्ट’ रणनीति से हटकर अधिक डिसिप्लिन्ड और स्ट्रक्चर्ड पोर्टफोलियो की ओर बढ़ रही हैं।

वैकल्पिक निवेश और PMS/AIF में रुचि

महिलाओं का निवेश केवल इक्विटी म्युचुअल फंड तक सीमित नहीं रह गया है। Portfolio Management Services (PMS) और Alternate Investment Funds (AIFs) जैसी वैकल्पिक निवेश कैटेगरी में भी रुचि बढ़ रही है। इन क्षेत्रों में निवेश का हिस्सा पिछले पांच वर्षों में लगभग 3 फीसदी से बढ़कर 7 फीसदी तक पहुंच गया है। इससे स्पष्ट होता है कि महिलाएं अब एसेट एलोकेशन आधारित पोर्टफोलियो की ओर ध्यान दे रही हैं, जिसमें लंबी अवधि के लक्ष्यों और जोखिम प्रबंधन को प्राथमिकता दी जाती है।

AI का सीमित लेकिन रणनीतिक उपयोग

रिपोर्ट के अनुसार, Artificial Intelligence (AI) भले ही वैश्विक निवेश चर्चाओं में प्रमुख विषय बन गया हो, लेकिन भारतीय महिला निवेशक इसे सावधानीपूर्वक अपना रही हैं। वे AI का मुख्य उपयोग रिसर्च, सीखने और पोर्टफोलियो मॉनिटरिंग के लिए करती हैं, न कि स्वचालित निवेश निर्णय लेने के लिए। 35-50 फीसदी महिलाएं AI टूल्स का या तो उपयोग नहीं करतीं या सीमित उपयोग करती हैं, जिससे यह साफ होता है कि निवेश के अंतिम निर्णय में मानवीय समझ और सलाहकार मार्गदर्शन अभी भी अहम है।

निवेश में ‘बकेट थिंकिंग’ का बढ़ता महत्व

महिला निवेशक अब अपने पोर्टफोलियो को विभिन्न लक्ष्यों के अनुसार अलग-अलग ‘बकेट्स’ में व्यवस्थित कर रही हैं। इन बकेट्स में सुरक्षा (Safety), वृद्धि (Growth), तरलता (Liquidity) और विरासत/भविष्य की योजना (Legacy) शामिल हैं। इस दृष्टिकोण से निवेशक यह तय करती हैं कि कोई एसेट उनके पोर्टफोलियो में किस भूमिका निभाएगा, बजाय केवल यह सोचने के कि कौन-सा प्रोडक्ट खरीदें। यह बदलाव निवेश में अनुशासन और लक्ष्य आधारित निर्णय लेने की दिशा में बड़ा कदम है।

पीढ़ी-दर-पीढ़ी संपत्ति हस्तांतरण और लेगेसी प्लानिंग

रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि Intergenerational Wealth Transfer या संपत्ति का पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरण अब महिला निवेशकों की प्राथमिकताओं में शामिल हो गया है। लगभग 75-90 फीसदी उत्तरदाता सक्रिय रूप से लेगेसी प्लानिंग पर ध्यान दे रही हैं, ताकि भविष्य में संपत्ति पाने वालों को केवल पूंजी ही नहीं, बल्कि वित्तीय अनुशासन और पोर्टफोलियो प्रबंधन का ज्ञान भी मिले। विशेषकर HNI और UHNI महिला निवेशकों के बीच सक्सेशन प्लानिंग और फैमिली गवर्नेंस स्ट्रक्चर अब वेल्थ मैनेजमेंट का अहम हिस्सा बन रहे हैं।

महिलाओं की निवेश रणनीति में संरचनात्मक बदलाव

पांच वर्षों के अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि महिलाओं की निवेश रणनीति में संरचनात्मक बदलाव आया है। पहले जहां मुख्य फोकस सुरक्षित विकल्प जैसे FD, सोना और प्रॉपर्टी पर था, वहीं अब महिलाएं एसेट एलोकेशन और लक्ष्य आधारित पोर्टफोलियो की ओर बढ़ रही हैं। इसमें इक्विटी म्युचुअल फंड, स्ट्रक्चर्ड डेट प्रोडक्ट्स, PMS, AIF और कुछ मामलों में ग्लोबल इक्विटी और प्राइवेट मार्केट भी शामिल हो गए हैं।

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