नई दिल्ली में चल रही वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप के फाइनल मुकाबलों में आज कई बड़े मुकाबले होंगे। चीन के पास तीन स्वर्ण पदक जीतने का मौका है, जबकि फ्रांस और दक्षिण कोरिया दो-दो खिताब के लिए चुनौती पेश करेंगे।
World badminton championship: नई दिल्ली में आयोजित वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप अपने निर्णायक दौर में पहुंच चुकी है। टूर्नामेंट के फाइनल मुकाबले आज खेले जाएंगे, जहां दुनिया के शीर्ष खिलाड़ी और जोड़ियां विश्व चैंपियन बनने के लिए कोर्ट पर उतरेंगी। इस बार चीन के पास सबसे अधिक तीन स्वर्ण पदक जीतने का अवसर है। चीन की चुनौती महिला डबल्स, मिक्स्ड डबल्स और पुरुष सिंगल्स में बनी हुई है। वहीं फ्रांस और दक्षिण कोरिया भी दो-दो खिताब जीतने की दौड़ में शामिल हैं। इससे फाइनल का मुकाबला केवल खिलाड़ियों के लिए ही नहीं, बल्कि देशों के बीच पदक वर्चस्व के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।
चीन के पास तीन गोल्ड जीतने का मौका
चीन इस चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन अलग-अलग स्पर्धाओं के फाइनल तक पहुंचा है। महिला डबल्स में शीर्ष वरीय लियू शेंग शु और टैन निंग की जोड़ी खिताब के लिए उतरेगी। दोनों खिलाड़ियों ने पूरे टूर्नामेंट में मजबूत प्रदर्शन किया है और अब उनके सामने दक्षिण कोरिया की चुनौती होगी।
मिक्स्ड डबल्स में चीन की शीर्ष वरीय जोड़ी फेंग यान झे और हुआंग डोंग पिंग फ्रांस के थॉम गिकेल और डेलफिन डेलरू से भिड़ेगी। यह मुकाबला चीन और फ्रांस के बीच एक अहम खिताबी टक्कर होगा। पुरुष सिंगल्स में भी चीन फाइनल में मौजूद है। ऐसे में अगर चीनी खिलाड़ी और जोड़ियां अपने-अपने मुकाबले जीतने में सफल रहती हैं, तो देश के खाते में तीन स्वर्ण पदक आ सकते हैं।
महिला डबल्स में चीन और दक्षिण कोरिया आमने-सामने
महिला डबल्स का फाइनल टूर्नामेंट के सबसे चर्चित मुकाबलों में से एक होगा। चीन की शीर्ष वरीय लियू शेंग शु और टैन निंग का सामना दक्षिण कोरिया की बेक हा ना और ली सो ही से होगा।
चीनी जोड़ी टूर्नामेंट में शीर्ष वरीयता के दबाव को पीछे छोड़ते हुए फाइनल तक पहुंची है। अब उसके सामने दक्षिण कोरिया की मजबूत जोड़ी होगी। दोनों टीमों के बीच मुकाबले में रफ्तार, डिफेंस और नेट के पास नियंत्रण महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
दक्षिण कोरिया के लिए यह मुकाबला दो स्वर्ण पदक जीतने की उसकी उम्मीदों में पहला बड़ा पड़ाव है। टीम की दूसरी खिताबी चुनौती एक अन्य स्पर्धा में है।
मिक्स्ड डबल्स में फ्रांस की ऐतिहासिक चुनौती
मिक्स्ड डबल्स फाइनल में चीन की फेंग यान झे और हुआंग डोंग पिंग की शीर्ष वरीय जोड़ी का सामना फ्रांस के थॉम गिकेल और डेलफिन डेलरू से होगा।
फ्रांसीसी जोड़ी ने फाइनल में पहुंचकर अपने देश के लिए इतिहास रच दिया है। यह वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप के इतिहास में फ्रांस की पहली मिक्स्ड डबल्स फाइनलिस्ट जोड़ी है। इसलिए उनके लिए यह मुकाबला केवल पदक जीतने का अवसर नहीं, बल्कि देश के बैडमिंटन इतिहास में नया अध्याय लिखने का मौका भी है।
फ्रांस के पास पुरुष सिंगल्स में भी स्वर्ण पदक जीतने का अवसर है। अगर दोनों फ्रांसीसी दावेदार फाइनल जीतते हैं, तो देश एक ही चैंपियनशिप में दो विश्व खिताब हासिल कर सकता है।
एलेक्स लानियर ने रचा इतिहास
फ्रांस के एलेक्स लानियर ने पुरुष सिंगल्स में फाइनल में पहुंचकर इतिहास रच दिया है। वह वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप के पुरुष सिंगल्स फाइनल में पहुंचने वाले पहले फ्रांसीसी खिलाड़ी बन गए हैं।
सेमीफाइनल में लानियर ने कनाडा के विक्टर लाई को कड़े मुकाबले में 16-21, 21-13, 21-14 से हराया। मुकाबले में पहला गेम गंवाने के बाद उन्होंने शानदार वापसी की और लगातार दो गेम जीतकर फाइनल में जगह बनाई।

अब लानियर के सामने जापान के कोडाई नाराओका की चुनौती होगी। जापानी खिलाड़ी भी विश्व स्तर पर मजबूत दावेदार माने जाते हैं। ऐसे में पुरुष सिंगल्स का फाइनल फ्रांस के ऐतिहासिक अभियान और जापान की खिताबी चुनौती के बीच दिलचस्प मुकाबला बन गया है।
फ्रांस के लिए दो ऐतिहासिक मौके
फ्रांस के पास इस चैंपियनशिप में दो अलग-अलग स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतने का मौका है। एलेक्स लानियर पुरुष सिंगल्स के फाइनल में उतरेंगे, जबकि थॉम गिकेल और डेलफिन डेलरू मिक्स्ड डबल्स में चीन की शीर्ष वरीय जोड़ी से मुकाबला करेंगे।
फ्रांस के लिए मिक्स्ड डबल्स फाइनल विशेष महत्व रखता है, क्योंकि देश की कोई जोड़ी इससे पहले इस स्पर्धा के विश्व चैंपियनशिप फाइनल तक नहीं पहुंची थी। वहीं लानियर का पुरुष सिंगल्स फाइनल में पहुंचना भी फ्रांसीसी बैडमिंटन के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है।
अब फ्रांस की नजर इन दोनों मौकों को स्वर्ण पदक में बदलने पर होगी।
दक्षिण कोरिया के पास भी दो गोल्ड का मौका
दक्षिण कोरिया भी दो स्पर्धाओं में खिताब की दौड़ में है। महिला डबल्स में बेक हा ना और ली सो ही चीन की लियू शेंग शु और टैन निंग से भिड़ेंगी।
दक्षिण कोरियाई खिलाड़ियों के सामने शीर्ष वरीय जोड़ी को हराने की चुनौती होगी। हालांकि फाइनल जैसे मुकाबले में वरीयता से ज्यादा उस दिन का प्रदर्शन मायने रखता है। इसलिए दक्षिण कोरिया की जोड़ी चीन की मजबूत टीम के खिलाफ आक्रामक और संतुलित खेल के साथ उतरना चाहेगी।
दक्षिण कोरिया की दूसरी खिताबी चुनौती टूर्नामेंट की अन्य स्पर्धा में है। ऐसे में टीम के पास चैंपियनशिप का अंत दो स्वर्ण पदकों के साथ करने का अवसर मौजूद है।
आज के फाइनल तय करेंगे चैंपियनशिप का नतीजा
वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप के फाइनल मुकाबलों में खिलाड़ियों के सामने केवल पदक जीतने की चुनौती नहीं होगी, बल्कि विश्व चैंपियन बनने का दबाव भी रहेगा। पूरे टूर्नामेंट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों के लिए अब अंतिम मुकाबला सबसे कठिन परीक्षा होगी।
चीन जहां तीन स्वर्ण पदकों के साथ चैंपियनशिप पर अपना दबदबा मजबूत करने की कोशिश करेगा, वहीं फ्रांस ऐतिहासिक उपलब्धियों को खिताबी जीत में बदलना चाहेगा। दक्षिण कोरिया भी अपनी दो फाइनल प्रविष्टियों को स्वर्ण में बदलने की कोशिश करेगा।
पुरुष सिंगल्स में एलेक्स लानियर की ऐतिहासिक मौजूदगी इस टूर्नामेंट को फ्रांस के लिए पहले ही खास बना चुकी है। अब उनकी नजर खिताब पर होगी। दूसरी ओर जापान के कोडाई नाराओका इस ऐतिहासिक अभियान को रोकने की कोशिश करेंगे।
बैडमिंटन प्रशंसकों की नजर इन मुकाबलों पर
नई दिल्ली में होने वाले फाइनल मुकाबलों पर दुनियाभर के बैडमिंटन प्रशंसकों की नजर रहेगी। चीन की स्टार जोड़ियों, फ्रांस के ऐतिहासिक फाइनलिस्ट और दक्षिण कोरिया की मजबूत चुनौती ने टूर्नामेंट के अंतिम दिन को बेहद रोमांचक बना दिया है।
विशेष रूप से महिला डबल्स और मिक्स्ड डबल्स के मुकाबलों में चीन के सामने फ्रांस और दक्षिण कोरिया की चुनौती होगी। पुरुष सिंगल्स में एलेक्स लानियर की ऐतिहासिक यात्रा का अगला अध्याय भी तय होगा।
फाइनल के परिणाम यह तय करेंगे कि नई दिल्ली में आयोजित इस विश्व चैंपियनशिप का सबसे सफल देश कौन बनता है और कौन से खिलाड़ी अपने नाम विश्व चैंपियन का ताज दर्ज कराते हैं। चीन के पास तीन स्वर्ण जीतने का सबसे बड़ा अवसर जरूर है, लेकिन फ्रांस और दक्षिण कोरिया भी अंतिम दिन इतिहास बदलने की क्षमता रखते हैं।











