दावोस वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में कनाडा ने अमेरिका पर तीखा हमला किया। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिकी वैश्विक नेतृत्व को "झूठी कहानी" बताया और कहा कि आर्थिक एकीकरण अब दबाव के उपकरण के रूप में इस्तेमाल हो रहा है।
Canada: दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान कनाडा ने अमेरिका पर कड़ा हमला किया है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिकी नेतृत्व वाली वैश्विक व्यवस्था को अब समाप्त मानते हुए इसे "झूठी कहानी" बताया। उन्होंने कहा कि महाशक्तियां अब आर्थिक एकीकरण को हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही हैं, जो कभी साझा समृद्धि का वादा किया करता था। कार्नी का यह बयान अमेरिकी वर्चस्व के युग के खत्म होने का संकेत माना जा रहा है।
अमेरिका के सहयोगियों के साथ तनाव
डॉनल्ड ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के लिए कनाडा ने 1 बिलियन डॉलर देने से साफ़ इंकार कर दिया। कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने इसकी पुष्टि की। ट्रंप ने फ्रांस, ब्रिटेन और कनाडा पर लगातार निशाना साधा, जिससे ट्रांसअटलांटिक संबंध तनावपूर्ण हो गए। दावोस में बैठक से पहले ट्रंप ने सोशल मीडिया पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रों के पर्सनल मैसेज लीक कर दिए। उन्होंने ब्रिटेन और अन्य देशों पर भी आलोचना की और अमेरिकी झंडे के रंग में कई देशों को रंगे हुए दिखाने वाली तस्वीर साझा की।
अमेरिकी वर्चस्व का अंत

मार्क कार्नी ने अपने भाषण में कहा कि नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था अब काम नहीं कर रही। उन्होंने बताया कि पुरानी व्यवस्था, जो अमेरिका की सुविधा के अनुसार नियम बनाती थी, अब प्रभावहीन हो चुकी है। कार्नी ने कहा कि अब हम एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं और पुरानी व्यवस्था लौटकर नहीं आएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वित्त, स्वास्थ्य, ऊर्जा और भू-राजनीति के हाल के संकटों ने वैश्विक परस्पर निर्भरता के खतरों को उजागर किया है।
आर्थिक एकीकरण अब हथियार
कार्नी ने यह बताया कि अब महाशक्तियां आर्थिक एकीकरण को दबाव के उपकरण के रूप में इस्तेमाल कर रही हैं। उन्होंने कहा कि पहले व्यापार नियमों का असमान रूप से पालन किया जाता था, जिससे अमेरिका को लाभ होता था। लेकिन अब यह तरीका काम नहीं करता। आर्थिक दबाव, टैरिफ, वित्तीय प्रणालियों और आपूर्ति श्रृंखलाओं के इस्तेमाल से वैश्विक संतुलन प्रभावित हो रहा है।
वैश्विक नेताओं की प्रतिक्रिया
दावोस में विश्व के प्रमुख नेता इस बदलाव को ध्यान से देख रहे हैं। अमेरिकी वर्चस्व के युग के खत्म होने के संकेत से यूरोप, एशिया और अन्य महाशक्तियों के बीच नई रणनीतिक स्थितियां बन सकती हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि अब वैश्विक नेतृत्व अधिक बहुपक्षीय और सहयोगात्मक ढांचे की ओर बढ़ सकता है, जिसमें अमेरिका का एकतरफा दबदबा कम होगा।











