Goldman Sachs की रिपोर्ट के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आने वाले समय में लगभग 25% काम के घंटों को ऑटोमेट कर सकता है। खासकर दोहराए जाने वाले मानसिक काम जैसे डेटा एनालिसिस, अकाउंटिंग और बेसिक कोडिंग पर इसका असर होगा। हालांकि, तकनीक नई नौकरियां भी पैदा करेगी और प्रोडक्टिविटी बढ़ाने में मदद करेगी।
AI And The Impact On Jobs: Goldman Sachs की नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आने वाले समय में अमेरिका समेत वैश्विक स्तर पर लगभग 25% काम के घंटों को अपने आप संभाल सकता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि व्हाइट‑कॉलर जॉब्स जैसे डेटा एनालिसिस, अकाउंटिंग, बेसिक कोडिंग और लीगल रिसर्च सबसे पहले प्रभावित होंगे। इसके बावजूद तकनीक प्रोडक्टिविटी बढ़ाएगी और नई नौकरियां भी पैदा होंगी। कंपनियों, वर्कर्स और सरकारों को समय रहते तैयारी करने की सलाह दी गई है।
कौन से सेक्टर प्रभावित होंगे?
AI सबसे ज्यादा उन नौकरियों को प्रभावित करेगा जिनमें दोहराए जाने वाले मानसिक काम शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ऑफिस से जुड़ा कागजी काम, बेसिक कोडिंग, अकाउंटिंग और लीगल रिसर्च सबसे पहले AI के प्रभाव में आएंगे। वहीं, मेडिकल, इंजीनियरिंग और रचनात्मक क्षेत्र फिलहाल अपेक्षाकृत सुरक्षित हैं।

AI से प्रोडक्टिविटी में बढ़ोतरी
Goldman Sachs का अनुमान है कि AI से लेबर प्रोडक्टिविटी में करीब 15% तक का इजाफा होगा। पुराने अनुभव और तकनीकी बदलावों के आधार पर देखा जाए तो करीब 6–7% नौकरियों पर अस्थायी असर पड़ सकता है। ट्रांजिशन पीरियड में बेरोजगारी बढ़ सकती है, जिससे लगभग 10 लाख लोगों को कुछ समय के लिए नौकरी खोने का सामना करना पड़ सकता है।
इतिहास और नई नौकरियां
इतिहास दिखाता है कि तकनीकी बदलाव पुराने काम को खत्म करने के साथ नई नौकरियां भी पैदा करते हैं। आज के कंप्यूटर और डिजिटल सेक्टर में लाखों लोगों को रोजगार मिला है, जिनके प्रोफेशन 30–40 साल पहले अस्तित्व में नहीं थे। गिग इकॉनमी, ई-कॉमर्स और कंटेंट क्रिएशन भी बड़े रोजगार अवसर पैदा कर रहे हैं।
भविष्य की तैयारी जरूरी
AI का सकारात्मक या नकारात्मक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि वर्कर्स, कंपनियां और सरकारें कितनी तेजी से बदलाव को अपनाती हैं। नई स्किल्स सीखना, एजुकेशन सिस्टम में सुधार और AI से जुड़े जॉब्स तैयार करना आने वाले समय की सबसे बड़ी जरूरत होगी।











