यमुनानगर धान घोटाला: 237 दिन बाद भी जांच सुस्त, 30 से ज्यादा नामों पर कार्रवाई का इंतजार

यमुनानगर के 70 करोड़ रुपये के धान घोटाले में 237 दिन बाद भी जांच धीमी है। 30 से अधिक नाम सामने आने के बावजूद केवल तीन गिरफ्तारियां हुई हैं।

यमुनानगर के 70 करोड़ रुपये के धान घोटाले में एसआईटी गठन के बावजूद जांच धीमी बनी हुई है। 237 दिन बाद भी केवल तीन गिरफ्तारियां हुई हैं, जबकि 30 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम जांच में सामने आ चुके हैं।

यमुनानगर: हरियाणा के चर्चित 70 करोड़ रुपये के धान घोटाले की जांच को लेकर सवाल उठने लगे हैं। घोटाले का खुलासा हुए करीब आठ महीने बीत चुके हैं, लेकिन विशेष जांच दल (SIT) की कार्रवाई अब तक सीमित नजर आ रही है। कई नाम सामने आने के बावजूद अधिकांश आरोपितों पर कार्रवाई का इंतजार बना हुआ है।

एसआईटी गठन के बाद भी नहीं बढ़ी जांच की रफ्तार

यमुनानगर में सामने आए 70 करोड़ रुपये के धान घोटाले को लेकर जांच अभी भी धीमी गति से आगे बढ़ रही है। घोटाले के खुलासे के 237 दिन बाद भी जांच एजेंसियां मामले में बड़ी कार्रवाई नहीं कर सकी हैं। पांच थाना प्रभारियों को शामिल कर विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया था, लेकिन अब तक केवल तीन लोगों की गिरफ्तारी ही हो पाई है।

यमुनानगर धान घोटाला: 237 दिन बाद भी जांच सुस्त, 30 से ज्यादा नामों पर कार्रवाई का इंतजार

जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने के बावजूद अधिकांश संदिग्धों तक कार्रवाई नहीं पहुंच पाई है। यही कारण है कि मामले की जांच प्रक्रिया और उसकी गति पर सवाल उठने लगे हैं।

30 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम आए सामने

मुख्य आरोपित राइस मिलर संदीप सिंगला को दिसंबर 2025 में गिरफ्तार किया गया था। एसआईटी ने उसे कई चरणों में रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी। पूछताछ के दौरान 30 से अधिक अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य लोगों के नाम सामने आने की बात कही गई थी।

हालांकि जांच प्रभावित होने का हवाला देते हुए पुलिस ने इन नामों को सार्वजनिक नहीं किया। इतने नाम सामने आने के बावजूद अब तक किसी बड़े स्तर की गिरफ्तारी नहीं होने से मामले में कार्रवाई की गति पर सवाल खड़े हो रहे हैं। संदीप सिंगला की जमानत याचिका पर अगली सुनवाई 27 जुलाई को निर्धारित है।

अब तक मामले में केवल तीन गिरफ्तारियां हुई हैं। इनमें मुख्य आरोपित संदीप सिंगला के अलावा हैफेड के सीनियर मैनेजर शैलेंद्र कुमार और परचेज मैनेजर अनिल कुमार शामिल हैं।

रिकॉर्ड जांच में सामने आई थीं गंभीर अनियमितताएं

धान घोटाले का खुलासा खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक एवं उपभोक्ता मामले विभाग के महानिदेशक अंशज सिंह की जांच के दौरान हुआ था। जांच में मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल, मंडी गेट पास, मिल आवंटन, स्टॉक सत्यापन और सरकारी रिकॉर्ड में कई अनियमितताएं सामने आई थीं।

आरोप है कि नियमों के विपरीत धान खरीद और स्टॉक का रिकॉर्ड तैयार कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। फर्जी गेट पास और दस्तावेजों के माध्यम से स्टॉक में हेराफेरी कर करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका जताई गई थी।

प्रशासनिक कार्रवाई के बाद भी कई सवाल कायम

मामले में प्रशासनिक स्तर पर कुछ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इंस्पेक्टर मनोज यादव, सविता, विनोद कुमार और एएफएसओ देवेंद्र कुमार को सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है। इसके बावजूद जांच का दायरा अभी तक सीमित दिखाई दे रहा है।

घोटाले से जुड़े कई अन्य मुद्दे भी चर्चा में रहे हैं। प्रतापनगर में एक ही परिसर में कई लाइसेंस जारी किए जाने के मामले में अदालत ने सख्त टिप्पणी की थी और संबंधित विभागों से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी थी। हालांकि निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बाद भी कई पहलुओं पर स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आ सकी है।

जगाधरी के डीएसपी राजीव मिगलानी के अनुसार मामले की जांच अभी जारी है। उनका कहना है कि जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले में सभी की नजर एसआईटी की अगली कार्रवाई और जांच के निष्कर्षों पर बनी हुई है।

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