योगी आदित्यनाथ का सपा पर तंज, बोले- सपा को देखकर गिरगिट भी खुश होगा; राज्यसभा सीट को लेकर PDA पर निशाना

गोरखपुर में शिक्षक एमएलसी चुनाव की जनसभा में सीएम योगी आदित्यनाथ ने सपा पर तंज कसा। PDA, राज्यसभा चुनाव और विपक्ष की राजनीति को लेकर बयान दिया।
योगी आदित्यनाथ का सपा पर तंज, बोले- सपा को देखकर गिरगिट भी खुश होगा; राज्यसभा सीट को लेकर PDA पर निशाना
Photo Credit / Attribution: Google

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को गोरखपुर में शिक्षक विधान परिषद चुनाव को लेकर आयोजित जनसभा में समाजवादी पार्टी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने सपा की राजनीति, पीडीए के नारे और राज्यसभा चुनाव के घटनाक्रम को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा। मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी को देखकर गिरगिट भी खुश हो रहा होगा और सोच रहा होगा कि उसे एक साथी मिल गया है। उन्होंने विपक्ष के राजनीतिक रुख में बदलाव का आरोप लगाते हुए यह टिप्पणी की। मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब उत्तर प्रदेश में शिक्षक एमएलसी चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और विभिन्न दल अपने प्रत्याशियों के समर्थन में प्रचार कर रहे हैं।

गोरखपुर के महंत दिग्विजयनाथ पार्क में आयोजित शिक्षक मतदाता सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भाजपा प्रत्याशी ध्रुव त्रिपाठी के समर्थन में माहौल बनाना था। इस चुनाव में मुख्यमंत्री की सीधी भागीदारी को भाजपा की रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का विस्तार कई जिलों में है और यहां शिक्षक मतदाताओं की भूमिका अहम है। मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में चुनावी मुकाबले के साथ विपक्ष की राजनीति पर भी चर्चा की। उन्होंने सपा पर आरोप लगाया कि पार्टी अपने राजनीतिक नारों और व्यवहार में एकरूपता नहीं रखती। उनके भाषण का केंद्र शिक्षक एमएलसी चुनाव के साथ-साथ राज्यसभा चुनाव को लेकर विपक्ष पर की गई टिप्पणी भी रही।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को साथ लेकर चलने के समाजवादी पार्टी के दावे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने राज्यसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि पीडीए की बात करने वाली पार्टी ने एक धनाढ्य व्यक्ति को राज्यसभा भेजा। इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने सपा के राजनीतिक दावों और उसके फैसलों के बीच अंतर दिखाने की कोशिश की। मुख्यमंत्री के बयान का आशय विपक्षी दल की नीतियों और उसके उम्मीदवार चयन पर सवाल उठाना था। हालांकि, पीडीए को लेकर सपा की राजनीतिक व्याख्या और उसके फैसलों का मूल्यांकन अलग-अलग दल अपने दृष्टिकोण से करते हैं। योगी का यह बयान भाजपा और सपा के बीच जारी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा है।

राज्यसभा चुनाव का मुद्दा उत्तर प्रदेश की राजनीति में पिछले दिनों चर्चा में रहा है। हालिया चुनावी घटनाक्रम को लेकर भाजपा और सपा के नेताओं ने एक-दूसरे पर सवाल उठाए हैं। मुख्यमंत्री ने इसी घटनाक्रम को अपने भाषण में उठाते हुए सपा पर निशाना साधा। इससे पहले भी उन्होंने राज्यसभा चुनाव के परिणामों को आगामी विधानसभा चुनाव की राजनीतिक स्थिति से जोड़कर टिप्पणी की थी। सात अक्टूबर को लखनऊ में दिए गए बयान में उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर एनडीए और पीडीए के बीच 80-20 के मुकाबले की बात कही थी। इन बयानों से स्पष्ट है कि शिक्षक एमएलसी चुनाव के प्रचार के दौरान भी प्रदेश की व्यापक राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और 2027 के विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि चर्चा में बनी हुई है। 

गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा ने ध्रुव त्रिपाठी को अपना प्रत्याशी बनाया है। दूसरी ओर, डॉ. संजयन त्रिपाठी समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में मैदान में हैं। संजयन त्रिपाठी पहले भाजपा से टिकट पाने के दावेदारों में शामिल थे, लेकिन ध्रुव त्रिपाठी को टिकट मिलने के बाद उन्होंने समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। इसके बाद सपा ने उन्हें इस सीट से उम्मीदवार घोषित किया। इस घटनाक्रम ने चुनावी मुकाबले को और चर्चा में ला दिया है। भाजपा के लिए अपने प्रत्याशी के पक्ष में शिक्षक मतदाताओं का समर्थन जुटाना अहम है, वहीं सपा अपने उम्मीदवार के जरिए चुनाव में चुनौती पेश कर रही है।

इस सीट का चुनावी महत्व इसलिए भी बढ़ गया है, क्योंकि इसका क्षेत्र एक जिले तक सीमित नहीं है। गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में 17 जिले आते हैं और यहां 54 हजार से अधिक शिक्षक मतदाता पंजीकृत बताए गए हैं। इनमें आजमगढ़ और गोरखपुर में बड़ी संख्या में मतदाता हैं। ऐसे में प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों के लिए शिक्षकों तक पहुंचना, उनकी समस्याओं को सुनना और अपने पक्ष में समर्थन जुटाना महत्वपूर्ण हो गया है। शिक्षक मतदाताओं के बीच पुरानी पेंशन, वित्तविहीन शिक्षकों की स्थिति, सेवा संबंधी समस्याएं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दे चुनावी चर्चा का हिस्सा हो सकते हैं। अलग-अलग प्रत्याशी इन मुद्दों पर अपने एजेंडे और प्राथमिकताओं के आधार पर समर्थन मांग रहे हैं। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जनसभा से पहले भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय ने कार्यक्रम स्थल की तैयारियों का निरीक्षण किया था। सभा में शिक्षकों, शिक्षक मतदाताओं और शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों की भागीदारी को ध्यान में रखते हुए व्यवस्था की गई। भाजपा का प्रयास है कि शिक्षक वर्ग के बीच अपने प्रत्याशी की स्थिति मजबूत की जाए। मुख्यमंत्री का प्रचार अभियान इस चुनाव को पार्टी के लिए महत्वपूर्ण मानने का संकेत देता है। वहीं, सपा की ओर से भी संगठनात्मक स्तर पर प्रचार और संपर्क अभियान चलाया जा रहा है। अखिलेश यादव ने गोरखपुर दौरे के दौरान पार्टी नेताओं के साथ शिक्षक एमएलसी चुनाव की तैयारियों पर चर्चा की और संजयन त्रिपाठी के समर्थन में एकजुट होकर काम करने का संदेश दिया। 

योगी आदित्यनाथ के भाषण में गिरगिट वाली टिप्पणी ने राजनीतिक बयानबाजी को एक बार फिर चर्चा में ला दिया। राजनीतिक सभाओं में ऐसे व्यंग्यात्मक वाक्यों का इस्तेमाल विरोधी दलों की रणनीति और विश्वसनीयता पर सवाल उठाने के लिए किया जाता है। मुख्यमंत्री ने इस टिप्पणी के जरिए सपा पर अपने रुख और राजनीतिक सहयोग के संदर्भ में कटाक्ष किया। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी अपने पीडीए गठजोड़ को सामाजिक प्रतिनिधित्व और राजनीतिक भागीदारी से जोड़कर प्रस्तुत करती रही है। इसलिए इस तरह के बयानों का असर केवल एक चुनाव तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दलों के बीच व्यापक राजनीतिक बहस का हिस्सा भी बनता है। हालांकि, किसी दल के नारे या राजनीतिक दावे की वास्तविकता का आकलन उसके घोषित कार्यक्रमों, उम्मीदवार चयन, फैसलों और उनके प्रभाव के आधार पर किया जाना चाहिए।

शिक्षक एमएलसी चुनाव उत्तर प्रदेश की विधान परिषद की उस व्यवस्था से जुड़ा है, जिसमें निर्धारित निर्वाचन क्षेत्रों के पंजीकृत शिक्षक मतदाता अपने प्रतिनिधि का चुनाव करते हैं। इस कारण यह चुनाव सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग प्रक्रिया के तहत होता है। उम्मीदवारों को शिक्षक समुदाय के बीच अपनी पहचान, काम और मुद्दों के आधार पर समर्थन जुटाना पड़ता है। राजनीतिक दलों के लिए भी यह चुनाव अपने संगठन की सक्रियता और संबंधित मतदाता वर्ग के बीच पहुंच को परखने का अवसर होता है। हालांकि, इस चुनाव के परिणामों को सीधे विधानसभा चुनाव के परिणामों के बराबर नहीं माना जा सकता, क्योंकि दोनों चुनावों का मतदाता वर्ग, मुद्दे और चुनावी प्रक्रिया अलग-अलग हैं।

गोरखपुर की सभा में मुख्यमंत्री ने भाजपा प्रत्याशी ध्रुव त्रिपाठी के समर्थन में प्रचार किया और इसी दौरान सपा के खिलाफ अपने राजनीतिक आरोप रखे। राज्यसभा चुनाव और पीडीए को लेकर उनकी टिप्पणियों ने भाषण को व्यापक राजनीतिक संदर्भ दिया। अब इस निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा और सपा सहित अन्य प्रत्याशियों की गतिविधियां तथा शिक्षक मतदाताओं के बीच संपर्क अभियान महत्वपूर्ण रहेंगे। चुनाव में किस उम्मीदवार को कितना समर्थन मिलता है, यह मतदाताओं के फैसले से तय होगा। फिलहाल मुख्यमंत्री का बयान भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच जारी राजनीतिक बहस का नया हिस्सा बन गया है

Leave a comment