उत्तर प्रदेश के वाराणसी में एक 27 वर्षीय डिलीवरी बॉय की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। आदमपुर थाना क्षेत्र के विजयीपुरा चौराहा, कोनिया इलाके में घर के अंदर युवक का शव फंदे से लटका मिला। मृतक की पहचान शुभम मौर्य के रूप में हुई है। घटना की जानकारी मिलने के बाद परिवार में कोहराम मच गया और आसपास के इलाके में भी चर्चा शुरू हो गई। परिजनों ने युवक की मौत को लेकर गंभीर संदेह जताया है। उनका कहना है कि घटनास्थल पर शव की स्थिति और शरीर पर दिखाई देने वाले निशानों के कारण मामला सामान्य नहीं लग रहा। परिवार की ओर से हत्या की आशंका जताए जाने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट नहीं हुई है और इसका निष्कर्ष पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा पुलिस की जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, शुभम वाराणसी के आदमपुर थाना क्षेत्र में रहता था और डिलीवरी बॉय के रूप में काम करता था। घटना के समय उसके पिता उमेश कुमार मौर्य बिहार के नवादा स्थित अपने गांव गए हुए थे। परिवार के अनुसार, शुभम ने शुक्रवार को अपने पिता से फोन पर बातचीत की थी। उसने बेंगलुरु जाने की योजना के बारे में बताया था और सोमवार, 12 अक्टूबर को यात्रा के लिए टिकट होने की बात कही थी। पिता ने उसे गांव आने और उनसे मिलकर जाने के लिए कहा था। परिवार को उम्मीद थी कि बेटा जल्द उनसे मिलने पहुंचेगा, लेकिन इससे पहले ही उसकी मौत की खबर आ गई। बेटे की मौत की सूचना मिलने के बाद पिता और परिवार के अन्य सदस्यों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
बताया गया है कि शनिवार दोपहर शुभम की बहन रंजना को एक पड़ोसी ने फोन कर उसकी तबीयत खराब होने की जानकारी दी। सूचना मिलने के बाद रंजना ने पहले अपने बेटे को मौके पर भेजा और फिर खुद वहां पहुंचीं। घर के बाहर लोगों की भीड़ जमा थी। रिपोर्टों के अनुसार, दरवाजे पर बाहर से कुंडी लगी हुई थी। जब परिजन अंदर पहुंचे तो शुभम का शव फंदे पर लटका हुआ मिला। इस दृश्य को देखकर परिवार के लोग घबरा गए। घटना के बाद से परिजन लगातार इस बात की मांग कर रहे हैं कि पुलिस हर पहलू की गंभीरता से जांच करे और यह पता लगाए कि युवक की मौत किन परिस्थितियों में हुई।
मृतक की बहन ने आरोप लगाया है कि शव की स्थिति और शरीर पर मौजूद कुछ निशान संदेह पैदा करते हैं। उनके मुताबिक, शुभम के गले पर खरोंच जैसे निशान दिखाई दिए थे और उसके निजी अंगों के पास से खून निकलने की बात भी सामने आई। परिवार ने इन परिस्थितियों को आधार बनाकर आशंका जताई कि युवक के साथ घटना से पहले कोई अप्रिय वारदात हुई हो सकती है। हालांकि, शरीर पर दिखाई देने वाले निशानों का कारण केवल परिवार के आरोपों के आधार पर तय नहीं किया जा सकता। इसके लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट, चिकित्सकीय परीक्षण और घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों का महत्व होगा। पुलिस को यह भी देखना होगा कि निशान किस परिस्थिति में आए और उनका मौत से क्या संबंध है।
मामले में मोबाइल फोन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। परिजनों ने आरोप लगाया है कि शुभम के पड़ोस में रहने वाली एक महिला ने उसके फिंगरप्रिंट की मदद से मोबाइल फोन का लॉक खोला और पुलिस के पहुंचने से पहले शव को नीचे उतारने के लिए रस्सी काट दी। परिवार के इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। मोबाइल फोन का लॉक किसने और किन परिस्थितियों में खोला, इस बात की जांच से घटना से जुड़े घटनाक्रम को समझने में मदद मिल सकती है। डिजिटल उपकरण में उपलब्ध जानकारी, कॉल रिकॉर्ड और अन्य प्रासंगिक साक्ष्यों की जांच के जरिए पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि घटना से पहले शुभम किन लोगों के संपर्क में था और उस दौरान क्या परिस्थितियां बनी थीं।
शुभम के पड़ोस में रहने वाली दो बच्चों की मां के साथ कथित प्रेम संबंध होने की चर्चा भी मामले के सामने आने के बाद शुरू हुई है। मृतक की बहन ने महिला के साथ उसके संबंधों का दावा करते हुए उस पर आरोप लगाए हैं। हालांकि, किसी संबंध की चर्चा या परिवार की ओर से लगाया गया आरोप अपने आप में किसी व्यक्ति की संलिप्तता साबित नहीं करता। यह भी अभी स्पष्ट नहीं है कि कथित संबंधों का युवक की मौत से कोई सीधा संबंध था या नहीं। जांच के दौरान पुलिस को सभी संबंधित व्यक्तियों के बयान लेने, उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की जांच करने और घटनास्थल की परिस्थितियों का मिलान करने की जरूरत होगी। किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराने से पहले आरोपों की पुष्टि ठोस साक्ष्यों से होना आवश्यक है।
परिवार के अनुसार, शुभम अपने पिता का सबसे छोटा और इकलौता बेटा था। उसकी मां का पहले ही निधन हो चुका था। उसकी दो बहनें हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। बहन रंजना वाराणसी की अन्नपूर्णा नगर कॉलोनी में बुटीक और सौंदर्य प्रसाधन से जुड़ी दुकान चलाती हैं। ऐसे में शुभम की मौत से परिवार को गहरा सदमा पहुंचा है। पिता का कहना है कि बेटे ने हाल ही में उनसे बातचीत की थी और बेंगलुरु जाने की तैयारी कर रहा था। परिवार अब यह जानना चाहता है कि उसके साथ आखिर क्या हुआ। परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की मांग की है।
घटना की सूचना मिलने पर पुलिस ने मामले की पड़ताल शुरू की। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शव का पोस्टमार्टम कराया गया और उसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। आदमपुर थाना प्रभारी विमल मिश्रा के हवाले से बताया गया है कि पुलिस मोबाइल फोन और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच कर रही है। इन साक्ष्यों के जरिए घटना से पहले और बाद की गतिविधियों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस के लिए यह जानना अहम होगा कि युवक को आखिरी बार किसने देखा था, घर में कौन-कौन आया था और शव मिलने से पहले क्या हुआ था। घटनास्थल की स्थिति, गवाहों के बयान और फॉरेंसिक या चिकित्सकीय निष्कर्षों का आपस में मिलान जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
इस मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट को विशेष महत्व दिया जा रहा है। रिपोर्ट से मृत्यु के संभावित कारण और शरीर पर मिले निशानों के बारे में चिकित्सकीय जानकारी मिल सकती है। यदि जांच के दौरान कोई विरोधाभास सामने आता है तो पुलिस दूसरे साक्ष्यों के साथ उसका मिलान कर सकती है। मोबाइल फोन और सीसीटीवी फुटेज से भी घटनाक्रम की समय-सीमा स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, अभी उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि शुभम की हत्या हुई है या उसने आत्महत्या की है। दोनों ही संभावनाओं पर निष्कर्ष निकालने के लिए जांच एजेंसियों को प्रमाणों के आधार पर आगे बढ़ना होगा।
शुभम की मौत से जुड़े मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि घर के अंदर वास्तव में क्या हुआ था। परिजन जहां शरीर पर कथित निशानों और मोबाइल फोन से जुड़े घटनाक्रम को लेकर संदेह जता रहे हैं, वहीं पुलिस साक्ष्यों की जांच कर रही है। किसी भी निष्कर्ष तक पहुंचने से पहले घटनास्थल से जुड़े तथ्यों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मोबाइल की जांच और संबंधित लोगों के बयानों को एक साथ देखना जरूरी होगा। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि युवक की मौत किन परिस्थितियों में हुई और क्या इस मामले में किसी आपराधिक घटना की पुष्टि होती है। फिलहाल परिवार न्याय की मांग कर रहा है और पुलिस की जांच पर मामले की आगे की दिशा निर्भर करेगी।










