उत्तर प्रदेश सरकार ने मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कई अहम निर्णय लिए। शिक्षामित्रों और अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय में इजाफा, छात्रों के लिए नए टैबलेट की खरीद और बलिया में मेडिकल कॉलेज खोलने जैसे प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में शिक्षामित्रों और अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी गई है। अब शिक्षामित्रों को 18 हजार रुपये और अंशकालिक अनुदेशकों को 17 हजार रुपये मासिक मानदेय मिलेगा। इससे पहले शिक्षामित्रों को 10 हजार और अनुदेशकों को 9 हजार रुपये ही मिलते थे। प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने बैठक के बाद बताया कि यह बढ़ा हुआ मानदेय 1 मई से लागू किया जाएगा।
शिक्षामित्र और अंशकालिक अनुदेशकों का मानदेय बढ़ा
कैबिनेट ने शिक्षामित्रों का मानदेय 18,000 रुपये और अंशकालिक अनुदेशकों का मानदेय 17,000 रुपये करने को मंजूरी दी। पहले शिक्षामित्रों को 10,000 रुपये और अंशकालिक अनुदेशकों को 9,000 रुपये प्रतिमाह मिलता था। प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने बताया कि यह बढ़ा हुआ मानदेय 1 मई 2026 से लागू होगा।
शिक्षा मंत्री ने कहा, 2017 में भाजपा सरकार आने के बाद शिक्षामित्रों का मानदेय 3,500 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये किया गया था। अब इसे 18,000 रुपये किया जा रहा है। अंशकालिक अनुदेशकों का मानदेय भी 9,000 रुपये से बढ़ाकर 17,000 रुपये किया गया है। प्रदेश में 27,000 से अधिक अंशकालिक अनुदेशक कार्यरत हैं।
कैबिनेट ने छात्रों को वितरित करने के लिए 25 लाख टैबलेट खरीदने की मंजूरी भी दी। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि प्रदेश में अब तक 60 लाख स्मार्टफोन और टैबलेट वितरित किए जा चुके हैं। नए टैबलेट की खरीद से डिजिटल शिक्षा और ऑनलाइन लर्निंग को और मजबूती मिलेगी।

बलिया में मेडिकल कॉलेज का निर्माण
उत्तर प्रदेश सरकार 'एक जिला, एक मेडिकल कॉलेज' योजना के तहत बलिया में मेडिकल कॉलेज खोलने जा रही है। कैबिनेट ने मंगलवार को इसके प्रस्ताव को मंजूरी दी।
- यह कॉलेज कारागार विभाग की जमीन पर बनेगा।
- जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज के अस्पताल के रूप में मर्ज किया जाएगा।
- एमबीबीएस पाठ्यक्रम के लिए 100 सीटों का मान्यता मिलने के बाद शैक्षणिक सत्र शुरू होगा।
- कॉलेज में ट्रॉमा सेंटर और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सुविधा भी उपलब्ध होगी।
इस पहल से न केवल चिकित्सा शिक्षा में सुधार होगा बल्कि स्थानीय स्तर पर मेडिकल और पैरामेडिकल स्टाफ के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।








